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Bihar Flood: समस्तीपुर में गंगा की बाढ़ से तबाही; गांव डूबे, लोग बांधों व सड़क किनारे तंबुओं में रहने को मजबूर

Sun, 17 Aug 2025 10:27 AM IST
हिमांशु प्रियदर्शी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, समस्तीपुर

सार

Samastipur News: समस्तीपुर जिले के मोहनपुर प्रखंड के नवघोडिया, जौनापुर, मटियोर, चापर समेत कई गांव अब भी गंगा की बाढ़ से प्रभावित हैं। पानी घरों में भरा हुआ है और झोपड़ियां डूबी हुई हैं, जिससे लोगों को भारी परेशानी झेलनी पड़ रही है।
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गंगा की बाढ़ से बेघर हुए लोग, तंबुओं में रहने को मजबूर - फोटो : अमर उजाला
गंगा नदी में आई बाढ़ ने समस्तीपुर जिले के दर्जनों गांवों को जलमग्न कर दिया है। गांवों और घरों में पानी घुसने के कारण लोग बेघर होकर बांधों व सड़कों किनारे अस्थायी तंबुओं में गुजर-बसर करने को विवश हैं। न पीने का पानी है, न भोजन का इंतजाम। बीमारियों का खतरा भी बढ़ गया है, लेकिन प्रशासन की ओर से मदद नदारद है। हालात इतने गंभीर हैं कि लोग जुगाड़ू नाव बनाकर अपने डूबे घरों की रातभर रखवाली कर रहे हैं।
 
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गंगा की बाढ़ से बेघर हुए लोग, तंबुओं में रहने को मजबूर - फोटो : अमर उजाला
बाढ़ का पानी घटा, लेकिन संकट बरकरार
समस्तीपुर जिले के मोहनपुर प्रखंड के नवघोडिया, जौनापुर, मटियोर, चापर समेत कई गांव अब भी गंगा की बाढ़ से प्रभावित हैं। पानी घरों में भरा हुआ है और झोपड़ियां डूबी हुई हैं। हालांकि कुछ इलाकों से धीरे-धीरे पानी निकलने लगा है, लेकिन इससे लोगों की परेशानी कम नहीं हुई है। गांव छोड़कर तंबुओं में रह रहे परिवारों को हर वक्त भूख-प्यास और बीमारी का खतरा सता रहा है।

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बाढ़ प्रभावितों को बीमारियों का खतरा - फोटो : अमर उजाला
तंबुओं में रातें काट रहे लोग, घरों की चिंता सताती
गांव छोड़कर बांधों और सड़कों के किनारे अस्थायी तंबुओं में रह रहे लोग लगातार इस चिंता में डूबे हैं कि कहीं उनके घर और सामान सुरक्षित हैं या नहीं। अमर उजाला की टीम ने जब मोहनपुर प्रखंड के डुमरी गांव का जायजा लिया तो देखा कि वहां की झोपड़ियां अब भी पानी में डूबी हुई हैं। लोगों के पास आने-जाने का कोई साधन नहीं है और वे खुद ही लकड़ी व बांस की मदद से नाव बनाकर घरों की रखवाली कर रहे हैं।
 
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भूख-प्यास से परेशान हो रहे बाढ़ प्रभावित - फोटो : अमर उजाला
प्रशासन की मदद नदारद, हालात बद से बदतर
बाढ़ से बेहाल लोगों की मदद के लिए प्रशासन की ओर से नाव या सामुदायिक किचन की कोई व्यवस्था नहीं की गई है। न राहत सामग्री मिल रही है, न स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध हैं। लोग अपनी जुगाड़ू नाव से किसी तरह घर-परिवार और पशुधन को बचाने की जद्दोजहद में लगे हुए हैं।

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भूख-प्यास और बीमारी का संकट
पानी भरे गांवों में स्वच्छ पेयजल और भोजन का अभाव है। दूषित पानी और अस्वच्छ माहौल के कारण बीमारियों का खतरा मंडरा रहा है। बच्चों और बुजुर्गों की स्थिति सबसे ज्यादा दयनीय है।
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