केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने हाल ही में कहा है कि आने वाले समय में भारत का सड़क बुनियादी ढांचा (रोड इंफ्रास्ट्रक्चर) अमेरिका से बेहतर होगा। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि कुशल राजमार्ग, जलमार्ग और रेलवे रसद लागत को कम कर सकते हैं और अर्थव्यवस्था को बढ़ावा दे सकते हैं।
उन्होंने सड़कों के लिए विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) बनाने वाले सलाहकारों पर भी निशाना साधा और कहा कि वे घर बैठे ही यह दस्तावेज तैयार करते हैं।
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Nitin Gadkari
- फोटो : X/@nitin_gadkari
केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री भोपाल में शनिवार को 'सड़क एवं पुल निर्माण में नवीनतम उभरते रुझान एवं प्रौद्योगिकी' विषय पर आयोजित दो दिवसीय सेमिनार के उद्घाटन सत्र को संबोधित कर रहे थे।
गडकरी ने याद किया कि जब वे महाराष्ट्र में मंत्री थे, तो उनके कार्यालय में पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति जॉन एफ कैनेडी का एक कथन था, "अमेरिकी सड़कें इसलिए अच्छी नहीं हैं क्योंकि अमेरिका समृद्ध है, बल्कि अमेरिका इसलिए समृद्ध है क्योंकि अमेरिका की सड़कें अच्छी हैं।"
रतन टाटा का इस महीने की शुरुआत में निधन हो गया था। वरिष्ठ भाजपा नेता ने कहा कि उनके मित्र रतन टाटा ने उनके कार्यालय में आने के दौरान कई बार उनसे इस उद्धरण के बारे में पूछा था। गडकरी ने कहा, "आने वाले समय में, भारतीय सड़क बुनियादी ढांचा अमेरिका से भी बेहतर होगा। हम ऐसा करेंगे।"
उन्होंने सेमिनार में भाग लेने वालों से कहा कि वे यह बदलाव ला सकते हैं।
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Highway
- फोटो : Freepik
बंगलूरू-चेन्नई हाईवे के हेलीकॉप्टर सर्वेक्षण के अपने अनुभव को साझा करते हुए, गडकरी ने कहा कि उन्होंने हाईवे के अलाइनमेंट (संरेखण) के रास्ते में तीन से चार “बड़े टावर” देखे और उन्हें बताया गया कि उन्हें हटाने में 300-400 करोड़ रुपये खर्च होंगे।
गडकरी ने कहा कि उन्होंने एक अधिकारी से कहा कि राजमार्ग के निर्माण के दौरान टावरों को हटाया जा सकता था, जिससे उन्हें हटाने की लागत बच जाती।
गडकरी ने चुटकी लेते हुए कहा, "मेरे साथ सहमति जताते हुए अधिकारी ने कहा कि यह उन लोगों की वजह से हुआ जिन्होंने डीपीआर (विस्तृत परियोजना रिपोर्ट) तैयार की... डीपीआर तैयार करने वाले महान लोग हैं... वे 'पद्म' पुरस्कार के हकदार हैं... वे घर बैठे गूगल पर डीपीआर तैयार करते हैं।"
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Highway
- फोटो : Freepik
उन्होंने कहा कि जब गलत अलाइनमेंट जैसी गलतियों की ओर इशारा किया जाता है तो ऐसे लोग माफी मांगते हैं। उन्होंने कहा कि इंजीनियर परियोजना से पहले साइट पर यह देखने के लिए नहीं जाते हैं कि मस्जिद और मंदिर रास्ते में आ रहे हैं या नहीं। और जब ऐसी संरचनाओं के कारण मुश्किलें आती हैं तो वे अधिकारियों से संपर्क करते हैं।
गडकरी ने कहा कि इसमें स्वामित्व की भावना होनी चाहिए। उन्होंने राज्य सरकारों से डीपीआर में गलतियों को सुधारने के लिए इंजीनियरिंग कॉलेजों के छात्रों को शामिल करने का आग्रह किया। उन्होंने कहा, "इसके बाद, कई गलतियों को सुधारा जा सकता है।"
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Mumbai-Nagpur Expressway
- फोटो : X/@Dev_Fadnavis
केंद्रीय मंत्री के अनुसार, भारत में 63 लाख किलोमीटर लंबी सड़कों के साथ दूसरा सबसे बड़ा सड़क नेटवर्क है।
गडकरी ने व्यंग्यात्मक लहजे में कहा कि डामर की सड़कों पर गड्ढे उभर आते हैं, जिसके कारण हर साल उनका पुनर्निर्माण करना पड़ता है। उन्होंने कहा, "इससे कुछ लोगों को बहुत खुशी मिलती है।"
उन्होंने कहा, "अगर यह 'खुशी' खत्म होनी है, तो हमें सफेद कंक्रीट की टॉपिंग शुरू करनी चाहिए। 25 साल तक सड़क को कोई नुकसान नहीं होगा। मैंने अपने शहर (नागपुर) की सड़कों को कंक्रीट की सड़कों में बदल दिया है।"
उन्होंने कहा कि अगर जल निकासी व्यवस्था अच्छी नहीं है तो डामर की सड़कें भी प्रभावित होती हैं क्योंकि पानी बिटुमेन के लिए खतरनाक होता है।
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गौरीफंटा बॉर्डर पर लगी मालवाहक ट्रकों की कतार
- फोटो : अमर उजाला
गडकरी ने बेहतर परिवहन नेटवर्क के महत्व के बारे में भी बात की।
उन्होंने कहा, "हमारी लॉजिस्टिक्स लागत जीडीपी का 14 प्रतिशत है, जो चीन में आठ प्रतिशत है। मैं अमेरिकन चैंबर्स ऑफ कॉमर्स के एक कार्यक्रम में गया था और बड़े सीईओ से मिला था। उन्होंने कहा कि उनके देशों में यह 12 प्रतिशत है।"
गडकरी ने कहा कि लॉजिस्टिक्स लागत कम करने के लिए देश को राजमार्गों, जलमार्गों और रेलवे की दक्षता बढ़ाने की जरूरत है।
नागपुर से लोकसभा सांसद के मुताबिक, अगर लॉजिस्टिक्स लागत को नौ प्रतिशत तक कम किया जा सकता है, तो इससे निर्यात में बढ़ोतरी हो सकती है और अर्थव्यवस्था को बढ़ावा मिल सकता है।
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Petrol Pump
- फोटो : Adobe Stock
जैव ईंधन को प्रोत्साहित करने की जरूरत पर जोर देते हुए गडकरी ने कहा कि भारत हर साल 22 लाख करोड़ रुपये का जीवाश्म ईंधन (पेट्रोल/डीजल) आयात करता है। और प्रदूषण देश में स्वास्थ्य समस्याओं का सबसे बड़ा कारण है।
पराली (धान के भूसे) को जैव ईंधन में बदलने के बारे में बात करते हुए गडकरी ने कहा कि किसान भी ऊर्जा उत्पादन में योगदान दे रहे हैं। उन्होंने कहा, "कृषि को ऊर्जा और बिजली क्षेत्रों में डायवर्सिफिकेशन (विविधीकृत) करने से खेती में बदलाव आएगा।"
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Kargil-Zanskar Intermediate Lane on National Highway 301 in Ladakh
- फोटो : X/@Nitin_Gadkari
केंद्रीय मंत्री ने सड़क निर्माण में अलग-अलग कचरे के इस्तेमाल की वकालत की और सुझाव दिया कि प्लास्टिक को बिटुमेन के साथ मिलाया जाना चाहिए। चंडीगढ़, दिल्ली और अहमदाबाद के उदाहरणों का हवाला देते हुए गडकरी ने कहा, "हमने अब तक सड़कों पर 80 लाख टन कचरा इस्तेमाल किया है।"
गडकरी ने देश की सड़कों पर होने वाली मौतों पर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि डॉक्टरों और इंजीनियरों सहित लगभग 1.78 लाख लोग सड़क दुर्घटनाओं में मरते हैं, जो कोविड महामारी या किसी युद्ध के दौरान जाने वाली जानों से कहीं ज्यादा है। इन दुर्घटनाओं से देश की जीडीपी को 3 प्रतिशत का नुकसान होता है।
लोगों को सामाजिक रूप से जागरूक, संवेदनशील और जिम्मेदार होने की जरूरत है। क्योंकि यह मनुष्य के लिए सबसे महत्वपूर्ण चीज है। उन्होंने कहा कि दुर्घटनाओं का कारण बनने वाले ब्लैक स्पॉट की पहचान की जानी चाहिए और सड़क इंजीनियरिंग को बेहतर बनाया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि लोगों को बेहतर जीवन देने के लिए सड़क सुरक्षा और पर्यावरण में सुधार की जरूरत है।
इस कार्यक्रम में मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव, मुख्य सचिव अनुराग जैन और अन्य मंत्री भी शामिल हुए।