तमिलनाडु के उद्योग मंत्री टीआरबी राजा ने इंडिया ईवी कॉन्क्लेव के मौके पर कहा कि राज्य सरकार अपनी खुद की व्हीकल स्क्रैप पॉलिसी (वाहन परिमार्जन नीति) ला रही है। उन्होंने कहा कि यह नीति लोगों पर इलेक्ट्रिक वाहन अपनाने के लिए दबाव नहीं डालेगी और देश के लिए एक रोल मॉडल होगी।
मंत्री ने कहा कि यह नीति, जो अभी चर्चा के चरण में है, समावेशी होगी। यह ग्रीन एनर्जी ट्रांजिशन में शामिल होने के लिए गरीबों को सब्सिडी की पेशकश करके सभी श्रेणियों के लोगों की जरूरतों को पूरा करेगी। वह इस सवाल का जवाब दे रहे थे कि वाहनों को चरणबद्ध तरीके से हटाने की अंतिम तारीख क्या होगी।
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Vehicle Scrapping
- फोटो : Social Media
यह तब आया है जब केंद्र एक नीति लेकर आई है जिसमें कहा गया है कि 20 साल से ज्यादा पुराने निजी वाहनों को 1 जून, 2024 से डी-रजिस्टर कर दिया जाएगा। यानी ऐसे वाहनों का रजिस्ट्रेशन खत्म हो जाएगा। ऐसा तभी होगा जब वे टेस्टिंग में नाकम हो गए हों या पंजीकरण प्रमाणपत्र जारी नहीं किया गया हो।
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इससे पहले, कॉन्क्लेव में बोलते हुए, राजा ने इलेक्ट्रिक वाहनों में बदलाव में मदद के लिए राज्य भर में चार्जिंग बुनियादी ढांचे के निर्माण की जरूरत पर रोशनी डाला। उन्होंने कहा कि जनवरी में होने वाली ग्लोबल इन्वेस्टर्स मीट के दौरान एक बड़ी घोषणा की जाएगी। हालांकि मंत्री ने कोई संख्या नहीं बताई, लेकिन उन्होंने कहा कि राज्य इस संबंध में नंबर वन बनने की कोशिश कर रहा है।
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उन्होंने कहा कि तमिलनाडु में ईवी क्षेत्र कई बेनिफिट्स प्रदान करता है। जिसमें फॉसिल फ्यूल (जीवाश्म ईंधन) पर कम निर्भरता, 2025 तक अनुमानित 50,000 करोड़ के निवेश के साथ निवेश में बढ़ोतरी, लगभग 1.5 लाख नौकरियों पैदा होंगी और सतत विकास लक्ष्यों में योगदान शामिल है। मंत्री ने कहा कि ईवी क्लस्टरों के आसपास के ग्रामीण इलाकों में महिलाओं को रोजगार पैदा होने से बहुत फायदा होगा।
मंत्री ने यह भी कहा कि राज्य तमिलनाडु की जनता के मन में 'जलवायु सामान्य ज्ञान' पैदा करने का प्रयास करेगा। और उनसे इस महत्वपूर्ण मुद्दे के प्रति संवेदनशील होने का आग्रह करेगा। उन्होंने कहा, "यहां तमिलनाडु में, सरकार हमारे लोगों में 'जलवायु सामान्य ज्ञान' पैदा कर रही है। यह एक अंतर्निहित समझ है कि पर्यावरण के लिए क्या अच्छा है और क्या नहीं। यह जलवायु परिवर्तन को संबोधित करने के लिए एक व्यावहारिक और सूचित दृष्टिकोण को दर्शाता है। जो वैज्ञानिक साक्ष्य की साझा समझ और सामूहिक, जिम्मेदार कार्रवाई की जरूरत पर आधारित है।"