Society of Manufacturers of Electric Vehicles (सोसाइटी ऑफ मैन्युफैक्चरर्स ऑफ इलेक्ट्रिक व्हीकल्स) (SMEV) ने सरकार से ईवी अपनाने को प्रोत्साहित करने और कच्चे तेल के आयात से होने वाले प्रदूषण को कम करने में मदद करने के लिए ICE (इंटरनल कंब्शन इंजन) (आईसीई) वाले दोपहिया वाहनों पर अतिरिक्त ग्रीन टैक्स लगाने की मांग की है। इलेक्ट्रिक वाहनों का प्रतिनिधित्व करने वाले उद्योग संगठन SMEV (एसएमईवी) ने एक बयान में कहा कि इस महीने से ईवी सब्सिडी में कटौती की जा रही है, जिसकी वजह से ईवी की बिक्री में गिरावट की आशंका है, जिसे ग्रीन टैक्स युक्तिसंगत बनाएगा।
एसएमईवी का मानना है कि पारंपरिक प्रदूषणकारी आईसीई दोपहिया वाहनों पर टैक्स में 100 बेसिस पॉइन्ट्स तक की बढ़ोतरी से इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहनों के लिए सब्सिडी की फंडिंग और फेम योजना को पटरी पर लाने में मदद मिलेगी।
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Hero Electric Scooter
- फोटो : Social Media
एसएमईवी के महानिदेशक सोहिंदर गिल ने कहा कि अब समय आ गया है कि ईवी क्षेत्र को आईसीई वाहनों के बराबर प्रतिस्पर्धा करने की अनुमति दी जाए।
"जब हम एक उद्योग के रूप में जागरूकता और ईवी को अपनाए जाने के मुद्दों से निपट रहे हैं, तो सबसे बड़ी बाधा ओनरशिप की लागत है क्योंकि भारतीय बाजार में कीमत बहुत मायने रखता है।
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Hero Electric Optima ER and Nyx ER
- फोटो : Hero Electric
उन्होंने कहा, "आईसीई वाहनों पर अतिरिक्त ग्रीन टैक्सिंग न सिर्फ ईवी और आईसीई को समान स्तर पर लाएगी, बल्कि बड़े ओईएम को विश्वास और दीर्घकालिक नजरिये के साथ ईवी बाजार में एंट्री करने के लिए प्रोत्साहित करेगी, जिससे देश को फायदा होगा।"
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Simple One Electric Scooter
- फोटो : Simple Energy
भारी उद्योग मंत्रालय ने 1 जून से इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहनों पर सब्सिडी कम कर दी है, जिससे कंपनियों को कीमतें बढ़ाने के लिए मजबूर होना पड़ा है। इस महीने से इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहनों के लिए इंसेंटिव की सीमा वाहनों के एक्स-फैक्ट्री कीमत के 40 प्रतिशत से घटकर 15 प्रतिशत हो गई है।
फास्टर एडॉप्शन एंड मैन्युफैक्चरिंग ऑफ इलेक्ट्रिक एंड हाइब्रिड व्हीकल्स (फेम) (FAME) इंडिया स्कीम 1 अप्रैल, 2019 को तीन साल की अवधि के लिए शुरू हुई थी, जिसे 31 मार्च, 2024 तक दो साल के लिए और बढ़ा दिया गया था।