ग्रीन फ्यूल सॉल्यूशंस (हरित ईंधन समाधानों) पर बढ़ते फोकस के साथ, पूरे भारत में इलेक्ट्रिक वाहनों की पहुंच बढ़ रही है। साथ ही, इलेक्ट्रिक वाहनों की काफी ऊंची कीमतें कई कार खरीदारों को अन्य ऑप्शंस की ओर ले जा रही हैं और ऐसे में सीएनजी की चर्चा होती है। पिछले कुछ वर्षों में देश भर में कंप्रेस्ड नेचुरल गैस या सीएनजी से चलने वाली कारों की मांग और बिक्री में बढ़ोतरी देखी जा रही है।
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CNG Car
- फोटो : Tata Motors
सीएनजी कारों की इतनी ज्यादा मांग और बिक्री कई कारकों से प्रेरित है। सीएनजी पेट्रोल या डीजल की तुलना में काफी सस्ती है। साथ ही, यह काफी बेहतर ईंधन दक्षता (माइलेज) देती है। एक और दिलचस्प बात यह है कि सीएनजी से चलने वाली कारें आमतौर पर पेट्रोल-सीएनजी कंबिनेशन के साथ आती हैं, जिससे वाहन पेट्रोल और सीएनजी दोनों पर चल सकता है। इसका मतलब यह है कि जब अपफ्रंट कॉस्ट (अग्रिम लागत) की बात आती है तो सीएनजी-ईंधन वाली कारें इलेक्ट्रिक वाहनों की तुलना में सस्ती होती हैं। साथ ही वे ओनरशिप की काफी कम लागत की पेशकश करती हैं।
नई कार खरीदने वालों के लिए यह एक आम उलझन है कि वे सिर्फ पेट्रोल इंजन वाली कार खरीदें या पेट्रोल-सीएनजी कार। इस निर्णय लेने में आपकी मदद के लिए यहां हमको इस बारे में डिटेल में बता रहे हैं।
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CNG KIT
- फोटो : संवाद
सिर्फ-पेट्रोल कारें बनाम पेट्रोल-सीएनजी कारें
पेट्रोल की कीमत आमतौर पर सीएनजी से काफी ज्यादा होती है। इसकी वजह से सिर्फ पेट्रोल पर चलने वाली कारों की ओनरशिप की लागत या चलाने की लागत ज्यादा हो जाती है। सिर्फ पेट्रोल कारों की अग्रिम लागत पेट्रोल-सीएनजी मॉडल की तुलना में कम है। सिर्फ पेट्रोल कारों की रखरखाव लागत पेट्रोल-सीएनजी मॉडल की तुलना में कम है। बड़ी संख्या में पेट्रोल ईंधन भरने वाले स्टेशनों की उपलब्धता पेट्रोल इंजन वाली कारों के लिए एक फायदा है।
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CNG Car
- फोटो : Tata Motors
जब पेट्रोल-सीएनजी कारों की बात आती है, तो वे सिर्फ-पेट्रोल मॉडल की तुलना में कम चलने की लागत प्रदान करते हैं। इसके पीछे कारण यह है कि ड्राइवर कार को पेट्रोल के बजाय सीएनजी मोड में चलाना चुन सकता है, जो ज्यादा माइलेज सुनिश्चित करता है। हालांकि, पेट्रोल-सीएनजी मॉडल की अग्रिम लागत उनके सिर्फ-पेट्रोल समकक्षों की तुलना में थोड़ी ज्यादा है। जब रखरखाव की बात आती है, तो पेट्रोल-सीएनजी मॉडल के लिए लागत ज्यादा होती है। क्योंकि ये वाहन पेट्रोल और सीएनजी पावरट्रेन सिस्टम दोनों को मिलाकर ज्यादा जटिल टेक्नोलॉजी के साथ आते हैं। सीएनजी रीफिलिंग स्टेशनों की उपलब्धता की कमी पेट्रोल-सीएनजी कारों के मालिकों के सामने एक समस्या है।
सीएनजी कारों के लिए पावर आउटपुट एक समस्या है, क्योंकि पेट्रोल मोड की तुलना में सीएनजी मोड में पावर कम हो जाता है। हालांकि, भारत में यात्री वाहन जो सीएनजी किट से लैस हैं, वे पेट्रोल पावरट्रेन से भी लैस हैं, जिससे यह अंतर का कोई खास पॉइन्ट नहीं रह जाता।
सिर्फ पेट्रोल और पेट्रोल-सीएनजी कारों दोनों के अपने-अपने फायदे और नुकसान हैं। आपको इन दोनों कारकों पर विचार करने के बाद ही अपने वाहन को चुनना चाहिए।