इलेक्ट्रिक मोबिलिटी के मामले में भारत अभी भी शुरुआती चरण में है और देश का लक्ष्य 2030 तक 30 प्रतिशत ईवी पैठ हासिल करना है। हालांकि, नॉर्वे जैसे देश फुल इलेक्ट्रिफिकेशन हासिल करने की संभावनाओं के मजबूत उदाहरण साबित हो रहे हैं।
इलेक्ट्रिक मोबिलिटी के मामले में भारत अभी भी शुरुआती चरण में है और देश का लक्ष्य 2030 तक 30 प्रतिशत ईवी पैठ हासिल करना है। हालांकि, नॉर्वे जैसे देश फुल इलेक्ट्रिफिकेशन (पूर्ण विद्युतीकरण) हासिल करने की संभावनाओं के मजबूत उदाहरण साबित हो रहे हैं। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, नॉर्वे दुनिया का पहला ऐसा देश बनने की राह पर है, जिसका बाजार पूरी तरह से इलेक्ट्रिक कारों से बना है।
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Electric Car Charging
- फोटो : Freepik
रिपोर्ट के अनुसार, नॉर्वे में हर 10 में से 9 नई कार पंजीकरण बैटरी से चलने वाले वाहनों के लिए हैं। इस बीच, देश का लक्ष्य है कि 2025 तक नई कारों की बिक्री में 100 प्रतिशत इलेक्ट्रिक कारें हों।
सरकारी प्रोत्साहनों और विकसित बुनियादी ढांचे के संयोजन के कारण नॉर्वे ने इलेक्ट्रिक वाहनों को लोकप्रिय बनाने में एक लंबा सफर तय किया है। अन्य बातों के अलावा, नॉर्वे की संसद ने 2025 को शून्य-उत्सर्जन नई कार बिक्री (इलेक्ट्रिक या हाइड्रोजन) की समय सीमा के रूप में स्थापित करने का राष्ट्रीय लक्ष्य निर्धारित किया है।
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Electric Car
- फोटो : BMW
नॉर्वे की वेबसाइट 'नॉर्स्क एल्बिलफोरिंग' के अनुसार, नॉर्वे में पंजीकृत कुल कारों में से 27 प्रतिशत BEV हैं। जबकि बेचे गए सभी नए वाहनों में से 88.9 प्रतिशत BEV थे। सफलता दर के पीछे मुख्य कारण इलेक्ट्रिक वाहनों पर टैक्स छूट, टोल शुल्क में कमी और सरकार द्वारा EV चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर पर भारी निवेश बताया जाता है। दिलचस्प बात यह है कि देश में पूरे देश में 7,753 फास्ट चार्जर के साथ 3,463 से ज्यादा सार्वजनिक चार्जिंग स्टेशन होने का दावा किया जाता है।
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Electric Car
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भारत में ईवी परिदृश्य में बदलाव
इसके उलट, भारतीय ईवी बाजार अभी भी काफी युवा है और भविष्य के लिए बहुत उम्मीदें रखता है। रिपोर्टों के अनुसार, अक्तूबर 2022 से सितंबर 2023 तक भारत में कुल वाहन बिक्री का लगभग 5 प्रतिशत इलेक्ट्रिक था। इन रिपोर्टों का यह भी मानना है कि इससे 2030 तक भारत में कुल नए वाहनों की बिक्री का 40 प्रतिशत इलेक्ट्रिक हो जाएगा, जो इलेक्ट्रिक दोपहिया और इलेक्ट्रिक तिपहिया वाहनों की लोकप्रियता में तेजी से बढ़ोतरी के कारण होगा।
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Electric Car
- फोटो : Freepik
मैकिन्से एंड कंपनी द्वारा बताए गए अनुसार, FAME योजना जैसी विभिन्न सरकारी पहलों ने भारत में इलेक्ट्रिक वाहनों को अपनाने में बढ़ोतरी की है। हालांकि, रेंज की चिंता और ओनरशिप की कुल लागत को लेकर उपभोक्ताओं के डर को शांत करने की जरूरत है। इसके साथ ही, व्यापक चार्जिंग नेटवर्क, वाहन सुरक्षा और स्पष्ट सर्विसिंग सुविधाओं जैसी चुनौतियों का समाधान करने की जरूरत है। ताकि इसे तेजी से अपनाया जा सके।
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Electric Car
- फोटो : Bridgestone
नॉर्वे की विद्युतीकरण स्थिति हमें इस बात की स्पष्ट तस्वीर देती है कि नीति-केंद्रित रूपरेखा और बुनियादी ढांचे में बड़ा निवेश ईवी अपनाने में मदद करने के लिए कितना महत्वपूर्ण है। टैक्स छूट, सब्सिडी और वित्तीय प्रोत्साहन जैसी नीतियों से ईवी अपनाने में आने वाली मुख्य बाधाओं में से एक, उच्च प्रारंभिक लागत को संबोधित करने और इन ईवी को किफायती बनाने में मदद मिलने की संभावना है।
इसके अलावा, एक संपूर्ण और व्यापक चार्जिंग नेटवर्क शुरू करने से रेंज से जुड़ी चिंताओं की बाधाओं को दूर किया जा सकता है। और सुगम यात्रा विकल्पों को बढ़ावा दिया जा सकता है। इसके अलावा, इलेक्ट्रिक वाहनों के पर्यावरणीय फायदा और व्यावसायिक व्यवहार्यता को दर्शाने वाली सार्वजनिक जागरूकता पहल अन्य गतिशीलता विकल्पों के बीच निर्णय लेने में परिप्रेक्ष्य पैदा करेगी जो टिकाऊ हो सकते हैं। इन रणनीतियों को लागू करने पर आखिरकार भारत में ग्रीन ऑटोमोबाइल की खोज के समर्थन में मुख्यधारा बन जाएगा।