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Electric Vehicles: बीवाईडी को झटका, टेस्ला को मौका, भारत ने ईवी निवेश नीति में बरती सतर्कता, जानें वजह

Tue, 08 Apr 2025 07:07 PM IST
अमर शर्मा ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

भारत सरकार अपनी इलेक्ट्रिक व्हीकल (ईवी) नीति को लेकर काफी सतर्क रणनीति अपना रही है। एक तरफ चीन की बड़ी कंपनी BYD (बीवाईडी) को निवेश की मंजूरी नहीं मिल रही, वहीं दूसरी ओर टेस्ला जैसे अमेरिकी ब्रांड को भारत में निवेश के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है।
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Tesla Car - फोटो : Tesla
भारत सरकार अपनी इलेक्ट्रिक व्हीकल (ईवी) नीति को लेकर काफी सतर्क रणनीति अपना रही है। एक तरफ चीन की बड़ी कंपनी BYD (बीवाईडी) को निवेश की मंजूरी नहीं मिल रही, वहीं दूसरी ओर टेस्ला जैसे अमेरिकी ब्रांड को भारत में निवेश के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। इससे साफ झलकता है कि चीन के साथ राजनीतिक संबंधों में सुधार के बावजूद भारत सरकार अब भी रणनीतिक स्तर पर सतर्क बनी हुई है।

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मीडिया रिपोर्ट में केंद्रीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल के हवाले से कहा गया है कि भारत को अपने रणनीतिक हितों को लेकर सतर्क रहना होगा। गोयल ने भारत के ईवी निवेश के बारे में बात करते हुए कहा, "भारत को अपने रणनीतिक हितों को लेकर सतर्क रहना होगा, कि हम किसे निवेश करने की अनुमति देते हैं।"

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2025 BYD Seal - फोटो : Amar Sharma
BYD का प्रस्ताव खारिज, टेस्ला को रास्ता साफ
2024 में बीवाईडी ने भारत में 1 अरब डॉलर का निवेश प्रस्ताव दिया था, जिसमें एक लोकल पार्टनर के साथ मिलकर ईवी प्लांट खोलने की योजना थी। लेकिन सरकार ने इसे मंजूरी नहीं दी। ठीक ऐसा ही मामला चीन की दूसरी कंपनी Great Wall Motors (ग्रेट वाल मोटर्स) के साथ भी हुआ। जिसे रेगुलेटरी क्लीयरेंस नहीं मिला और उन्हें भारत से बाहर होना पड़ा।

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Vinfast Electric Car - फोटो : Vinfast
वहीं दूसरी तरफ, टेस्ला लगातार भारत में अपनी मौजूदगी दर्ज कराने की कोशिश कर रही है। सरकार भी इसके लिए नियमों में कुछ बदलाव कर रही है। हाल ही में हुए ऑटो एक्सपो 2025 में वियतनाम की कंपनी VinFast (विनफास्ट) ने भी भारत में बड़ा निवेश करने का एलान किया, जिसे लेकर अब तक कोई अड़चन नहीं आई है। इससे यह साफ हो गया है कि चीन की कंपनियों के मुकाबले अन्य देशों की कंपनियों को ज्यादा सहूलियत मिल रही है।

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2025 Tesla Model Y - फोटो : X/@Tesla
टैरिफ को लेकर विदेशी कंपनियों की चिंता
भारत में अभी पूरी तरह से बनी गाड़ियों (कंप्लीट बिल्ट यूनिट्स) (सीबीयू) पर 100 प्रतिशत तक का आयात शुल्क है, जो दुनिया के प्रमुख देशों में सबसे ज्यादा है। अमेरिका, जर्मनी और चीन जैसे देशों में यह कहीं कम है। यही कारण है कि टेस्ला जैसी कंपनियों को भारत में गाड़ियां लाने में दिक्कतें आ रही थीं।

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Tesla Model S - फोटो : Tesla
हालांकि, अब भारत सरकार अमेरिका और यूरोपीय संघ के साथ फ्री ट्रेड एग्रीमेंट्स को लेकर बातचीत कर रही है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, भारत टैरिफ को धीरे-धीरे 10% तक कम करने के लिए तैयार हो रहा है, लेकिन घरेलू कंपनियां चाहती हैं कि कम से कम 30% टैरिफ बरकरार रखा जाए, ताकि विदेशी कंपनियां सस्ते दामों पर गाड़ियां बेचकर उन्हें नुकसान न पहुंचाएं।

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Tata Punch EV - फोटो : Tata Motors
घरेलू कंपनियों के लिए चुनौती का वक्त?
अब तक, ऊंचे आयात शुल्क की वजह से घरेलू कंपनियों को फायदा मिला है। खासकर ईवी सेगमेंट में टाटा मोटर्स जैसी कंपनियों ने तेजी से बढ़त बनाई है। जो अभी भारत के इलेक्ट्रिक कार बाजार का लगभग 70 प्रतिशत हिस्सा रखती है। लेकिन अगर सरकार टैरिफ में ढील देती है, तो भारत की कंपनियों को विदेशी मुकाबले का सामना करना पड़ सकता है।

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