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अगर आपके पास है BS6 इंजन बाइक या स्कूटर, तो भूलकर न करें ये गलतियां

Mon, 16 Mar 2020 02:27 PM IST
Harendra Chaudhary ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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BS6 Bike or Scooter - फोटो : Amar Ujala
BS4 और BS6 गाड़ियों में सबसे बड़ा अंतर कैब्युरटर (Carburettor) का है, क्योंकि नए उत्सर्जन मानक वाली गाड़ियों में फ्यूल इंजेक्शन सिस्टम दिया गया है। यहां तक कि छोटे से छोटे वाहन में भी फ्यूल इंजेक्शन सिस्टम मिलेगा। अगर आपके पास बीएस6 बाइक या स्कूटर है तो आपको थोड़ी सावधानी रखने की जरूरत है। क्योंकि अभी भी बीएस6 गाड़ियों के लिए सर्विस सेंटर्स की कमी है, वहीं मैकेनिक भी ठीक से प्रशिक्षित नहीं हैं।
 
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petrol pump

फ्यूल और टैंक

तो बात करते हैं सबसे पहले फ्यूल और टैंक की। तो फ्यूल टैंक में जंग नहीं लगना चाहिए और धूल-मिट्टी और गंदगी अंदर नहीं जानी चाहिए। अगर गलती से पानी या कोई बाहरी तत्व ईंधन टैंक में पहुंच गया तो फ्यूल इंजेक्टर्स काम करना बंद कर देंगे। हालांकि ये समस्या कैब्युरटर के साथ नहीं होती है। धूल-मिट्टी के कण फ्यूल इंजेक्टर्स को खराब कर सकते हैं। साथ ही मिलावटी तेल से भी सावधान रहना होगा। बेहतर होगा कि कंपनी के आउटलेट से ही ईंधन भरवाएं। क्योंकि ये पार्ट्स वारंटी में कवर नहीं होते हैं और इन्हें बदलवाने में अच्छा खासा खर्च जेब पर पड़ सकता है।
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Hero Motocorp new Splendor BS6 - फोटो : Social

फ्यूल इंजेक्टर्स

फ्यूल इंजेक्शन सिस्टम में कई फ्यूल इंजेक्टर्स होते हैं। इन्हें समय-समय पर ऑथराइज्ड सर्विस सेंटर पर ही क्लीन कराएं। इन गाड़ियों के साथ मिलने वाली मैनुअल गाइड में बताया गया है कि बीच-बीच में इनकी सर्विस कराया जाना जरूरी है। इसका पालन करने से न केवल बाइक की वारंटी बरकरार रहेगी, बल्कि इंजन भी ठीक रहेगा। वहीं अगर ईंधन की वजह से फ्यूल इंजेक्टर्स में कोई खराबी आती भी है जो इंस्ट्रूमेंट कंसोल पर इसकी इंडीकेशन आ जाएगा।

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Car Coolant - फोटो : Google

कूलेंट

अगर आपकी बाइक में कूलेंट डलता है तो ध्यान रखें कि कूलेंट का स्तर बरकरार रहे और गंदा न हो। स्कूटर में कूलेंट नहीं डलता है। ध्यान रखें कि बीच-बीच में कूलेंट बदलते भी रहें। अपनी गाड़ी के कंसोल पैनल पर बनने वाले इंटीकेटर्स लाइट्स पर जरूर ध्यान दें। अगर राइड के दौरान इंस्ट्रूमेंट कंसोल में कम कूलेंट का साइन नजर आता है तो आप उसमें पानी भी डाल सकते हैं। लेकिन इसके लिए मैनुअल गाइड चेक करना न भूलें।
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Change Engine Oil in car or bike - फोटो : Social

इंजन ऑयल

अपने गाड़ी में इंजन ऑयल के लेवल को बीच-बीच में जरूर चेक करते रहें। इसी जांच करने के लिए अपनी बाइक को बीच वाले स्टैंड पर खड़ी करें, ध्यान रखें कि गाड़ी का इंजन उस वक्त ठंडा हो। डिप स्टिक के जरिए लेवल को चेक करें। अगर ऑयल ज्यादा चिपचिपा नहीं है और आपकी अंगुलियों पर चिपक नहीं रहा है, तो ऑयल को बदलने का वक्त है। यहां तक अगर इंजन ऑयल काला पड़ गया है तो इसे बदलने की जरूरत है। गाड़ी के सर्विस मैनुअल में लिखा रहता है कि ऑयल किस ग्रेड का होना चाहिए। हर बार ऑयल बदलने के दौरान ऑयल फिल्टर को भी बदलना आवश्यक है।
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Honda Activa BS6 - फोटो : Google

एयर फिल्टर

हालांकि ज्यादातर दो पहिया वाहनों में आप खुद ही एयर फिल्टर जांच सकते हैं। लेकिन कुछ में खास टूल्स की आवश्यकता होती है। सर्विस मैनुअल में लिखा होता है कि कब एयर फिल्टर को बदला या साफ किया जाए। आमतौर पर 40 हजार किमी पर बदलने की जरूरत होती है। इंजन तक साफ सुथरी हवा पहुंचने के लिए एयर फिल्टर का अहम रोल है। वहीं अगर इसकी अनदेखी करते हैं तो वाहन कम माइलेज देगा, साथ ही उसकी परफॉरमेंस पर भी असर पड़ता है।
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bike tyre

टायर प्रेशर

वाहन के टायरों में हवा का दबाव बिल्कुल सही होना चाहिए। अगर टायर प्रेशर सही रहता है तो सड़क पर गाड़ी चिपक कर चलती है। इससे न केवल माइलेज बढ़ता है, बल्कि बाइक की परफॉरमेंस भी ठीक रहती है। साथ ही ब्रेकिंग सिस्टम भी ठीक काम करता है। गाड़ी की हैंडलिंग और राइडिंग क्वालिटी सीधे-सीधे सही टायर प्रेशर पर निर्भर करती है।
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