क्या है पत्र?
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म फेसबुक और ट्विटर पर लोग एक सरकारी चिट्ठी शेयर कर रहे हैं, अपनी पोस्ट में लोग लिख रहे हैं कि वकीलों को अब टोल टैक्स नहीं चुकाना होगा। पत्र को 03 दिसंबर को जारी किया गया है और इस पत्र को सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के मंत्री नितिन ग़डकरी के निजी सचिव संकेत भोंडवे ने लिखा है।
वकीलों को छूट देने का दावा!
उन्होंने यह पत्र बेंगलुरू के एक वकील रवि गौड़ा के नाम लिखा है। पत्र के मुताबिक गौड़ा ने उन्हें एक दिसंबर को पत्र लिखा था। जिसके जवाब में संकेत ने लिखा है कि आपके एक दिसंबर एक पत्र के अनुसार मुझे सूचित करने के लिए निर्देशित किया गया है कि भारत के सभी राज्यों के वकीलों को देश के सभी टोल प्लाजा पर टोल चार्जेज देने से स्थाई तौर पर छूट दे दी गई है और यह छूट पाने के लिए वकीलों को अपना पहचान पत्र दिखाना होगा।
एक और पत्र में छूट का दावा
वहीं इस पत्र पर लोग जमकर अपनी भड़ास निकाल रहे हैं। एक यूजर ने लिखा है कि देश के सेवा करने वालों और सीमा प्रहरियों को तो सरकार छूट के नाम पर ठेंगा दिखा रही है, तो वहीं वकीलों को छूट देना कितना जायज है। वहीं संकेत भोंडवे के लेटरहेड पर एक और पत्र वायरल हो रहा है, जो उन्होंने चेन्नई के वकील भास्करदौस को लिखा है, जिसमें नेशनल हाईवे के टोल प्लाजा पर दिए जाने वाले शुल्क से छूट देने के लिए वकीलों को सूचीबद्ध करने के निर्देश दिए गए हैं।
मंत्रालय ने दी सफाई
लेकिन असलियत कुछ और ही है। तहकीकात में पता चला कि दोनों ही पत्र फर्जी हैं और संकेत भोंडवे के लेटरहेड के साथ लोगों ने छेड़छाड़ की गई है। वहीं सड़क परिवहन मंत्रालय ने भी अपने ट्विटर हैंडल से किसी प्रकार की छूट से इंकार किया है। 11 दिसंबर को जारी ट्वीट में मंत्रालय ने सफाई दी है कि वकीलों को टोल प्लाजा पर किसी प्रकार की छूट नहीं दी गई है।
पीआईबी ने बताया फर्जी
इसके अलावा पीआईबी यानी प्रेस सूचना ब्यूरो ने भी भी ट्वीट के जरिये साफ किया है कि ये दोनों ही पत्र फर्जी हैं और सड़क परिवहन मंत्रालय की तरफ से ऐसे कोई दिशा-निर्देश जारी नहीं किये गए हैं। अतः निष्कर्ष स्पष्ट है कि यह पत्र फर्जी हैं और इन पर आंख मूंद कर बिल्कुल भी भरोसा न करें।