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Ethanol: केंद्र की 20 प्रतिशत इथेनॉल-मिश्रित पेट्रोल नीति को चुनौती, सुप्रीम कोर्ट में दायर हुई जनहित याचिका

Sat, 23 Aug 2025 11:41 AM IST
अमर शर्मा ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

सुप्रीम कोर्ट में एक जनहित याचिका (PIL) (पीआईएल) दाखिल की गई है, जिसमें केंद्र सरकार की इथेनॉल मिश्रण योजना को चुनौती दी गई है। इस योजना के तहत अब 20 प्रतिशत इथेनॉल मिले पेट्रोल (E20) की बिक्री अनिवार्य कर दी गई है।
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सुप्रीम कोर्ट - फोटो : एएनआई (फाइल)
सुप्रीम कोर्ट में एक जनहित याचिका (PIL) (पीआईएल) दाखिल की गई है, जिसमें केंद्र सरकार की इथेनॉल मिश्रण योजना को चुनौती दी गई है। इस योजना के तहत अब 20 प्रतिशत इथेनॉल मिले पेट्रोल (E20) की बिक्री अनिवार्य कर दी गई है। याचिका में कहा गया है कि उपभोक्ताओं को इथेनॉल-फ्री पेट्रोल (E0) का विकल्प दिए बिना सिर्फ E20 उपलब्ध कराना उन करोड़ों वाहन मालिकों के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन है, जिनके वाहन इस तरह के पेट्रोल के लिए उपयुक्त नहीं हैं।

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E20 पेट्रोल डिस्पेंसर (सांकेतिक तस्वीर) - फोटो : AI
याचिका दाखिल करने वाले की दलील
यह याचिका अधिवक्ता अक्षय मल्होत्रा ने दायर की है। उनका कहना है कि बिना किसी जागरूकता अभियान चलाए इस तरह की नीति लागू करना उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 के तहत उपभोक्ताओं के "जानकारी पर आधारित विकल्प" के अधिकार का हनन है। याचिका में कहा गया है कि देश के करोड़ों वाहन मालिकों को यह पता ही नहीं है कि वे जो पेट्रोल इस्तेमाल कर रहे हैं, वह पूरी तरह पेट्रोल नहीं है बल्कि उसमें इथेनॉल मिलाया गया है। इतनी अहम जानकारी छुपाना उपभोक्ता की सूचित पसंद (इंफॉर्मड चॉइस) को खत्म करता है।

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तेल भरवाते समय इन बातों का रखें ध्यान - फोटो : Adobe Stock
वाहन और उपभोक्ताओं पर असर
याचिका में यह भी कहा गया है कि E20 पेट्रोल का इस्तेमाल करने से गाड़ी की फ्यूल एफिशिएंसी (माइलेज) घटती है और गाड़ी के कई पुर्जों में जंग लगने का खतरा बढ़ जाता है। इससे उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त खर्च और सुरक्षा से जुड़े खतरे भी पैदा होते हैं। अधिवक्ता मल्होत्रा का तर्क है कि जब तक वाहन निर्माता कंपनियों को E20 के अनुकूल गाड़ियां बनाने और बाजार में उतारने का पर्याप्त समय न दिया जाए, तब तक इस नीति को लागू करना अनुचित और मनमाना कदम है।

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पेट्रोल पंप - फोटो : AI
पुराने वाहन उपयुक्त नहीं
याचिका के मुताबिक, अप्रैल 2023 से पहले बनी गाड़ियां इथेनॉल-मिश्रित पेट्रोल के लिए उपयुक्त नहीं हैं। यहां तक कि दो साल पुरानी गाड़ियां भी, भले ही वे बीएस-6 मानकों के अनुरूप हों, 20 प्रतिशत इथेनॉल मिश्रण के लिए सही नहीं हैं। वे अधिकतम 10 प्रतिशत इथेनॉल मिले पेट्रोल (E10) तक ही चलने लायक हैं।

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Petrol Pump - फोटो : AdobeStock
उपभोक्ताओं के लिए मांग
याचिका में सुप्रीम कोर्ट से अपील की गई है कि पेट्रोलियम कंपनियों को आदेश दिया जाए कि वे बाजार में इथेनॉल-फ्री पेट्रोल (E0) भी उपलब्ध कराते रहें। इसके अलावा पेट्रोल पंपों पर यह स्पष्ट लिखना भी अनिवार्य किया जाए कि वहां मिलने वाला पेट्रोल E20 है। याचिका में यह भी कहा गया है कि जबकि पेट्रोल में 20 प्रतिशत इथेनॉल मिलाया जा रहा है, इसका फायदा उपभोक्ताओं को कीमत में कमी के रूप में नहीं मिला है।

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तेल भरवाते समय इन बातों का रखें ध्यान - फोटो : Adobe Stock
अंतरराष्ट्रीय तुलना
याचिका में यह भी उल्लेख है कि अमेरिका और यूरोपीय संघ जैसे देशों में आज भी इथेनॉल-फ्री पेट्रोल उपलब्ध है और वहां पेट्रोल पंपों पर स्पष्ट लेबलिंग होती है। जिससे उपभोक्ता अपनी पसंद के अनुसार पेट्रोल चुन सकें। 

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