E20 पेट्रोल डिस्पेंसर (सांकेतिक तस्वीर)
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याचिका दाखिल करने वाले की दलील
यह याचिका अधिवक्ता अक्षय मल्होत्रा ने दायर की है। उनका कहना है कि बिना किसी जागरूकता अभियान चलाए इस तरह की नीति लागू करना उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 के तहत उपभोक्ताओं के "जानकारी पर आधारित विकल्प" के अधिकार का हनन है। याचिका में कहा गया है कि देश के करोड़ों वाहन मालिकों को यह पता ही नहीं है कि वे जो पेट्रोल इस्तेमाल कर रहे हैं, वह पूरी तरह पेट्रोल नहीं है बल्कि उसमें इथेनॉल मिलाया गया है। इतनी अहम जानकारी छुपाना उपभोक्ता की सूचित पसंद (इंफॉर्मड चॉइस) को खत्म करता है।
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