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E20 Petrol: कार्बोरेटेड वाहनों में जब इथेनॉल-मिश्रित पेट्रोल जाता है, तो इंजन में क्या होता है, जानें डिटेल्स

Wed, 13 Aug 2025 02:11 PM IST
अमर शर्मा ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

इथेनॉल-मिश्रित पेट्रोल को लेकर नई और पुरानी गाड़ियों में काफी सवाल उठ रहे हैं। ऐसे में यह जानना बहुत अहम है कि पुराने वाहनों और कार्ब्युरेटर वाले वाहनों में जब इथेनॉल-मिश्रित पेट्रोल जाता है तो क्या इसका क्या असर हो सकता है।
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E20 पेट्रोल डिस्पेंसर (सांकेतिक तस्वीर) - फोटो : AI
इथेनॉल-मिश्रित पेट्रोल को लेकर नई और पुरानी गाड़ियों में काफी सवाल उठ रहे हैं। टाटा मोटर्स का कहना है कि उनकी कारें बिना किसी परेशानी के E20 पेट्रोल पर चल सकती हैं। लेकिन टोयोटा का कहना है कि अगर किसी कार का इंजन E10 के लिए डिजाइन किया गया है और उसमें E20 डाला गया, तो इंजन को नुकसान हो सकता है।

टोयोटा ने ये भी साफ किया है कि E10 पर चलने वाली कार में E20 डालने से अगर कोई नुकसान हुआ, तो उसकी वारंटी में कवर नहीं मिलेगा। दिक्कत ये है कि देशभर के कई पेट्रोल पंप अब E20 बेचने लगे हैं, जिससे कार मालिकों में भ्रम बढ़ गया है।

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पेट्रोल पंप - फोटो : अमर उजाला
दोपहिया वाहनों पर असर
दोपहिया सेगमेंट में बजाज का कहना है कि उनकी सभी मोटरसाइकिलें बिना दिक्कत E20 पेट्रोल पर चल सकती हैं। हालांकि, पुरानी BS3 गाड़ियों के लिए सलाह दी गई है कि हर 1000 किलोमीटर पर एक बार फ्यूल सिस्टम क्लीनर का इस्तेमाल किया जाए। ऐसा इसलिए क्योंकि इथेनॉल ईंधन में चिपचिपा पदार्थ जमा सकता है, जो फ्यूल पंप को जाम कर सकता है।

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पेट्रोल पंप - फोटो : संवाद
अगर ये पदार्थ पंप से निकलकर इंजेक्टर तक पहुंच गया, तो इंजन की परफॉर्मेंस पर असर पड़ेगा। यही वजह है कि कई वाहन मालिक प्रदर्शन और माइलेज में गिरावट की शिकायत कर रहे हैं। इथेनॉल की ऊर्जा क्षमता (एनर्जी डेनसिटी) पेट्रोल से कम होती है। जिससे इंजन को ज्यादा मेहनत करनी पड़ती है और घिसावट बढ़ती है।

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पेट्रोल पंप - फोटो : संवाद
पुराने वाहनों और कार्ब्युरेटर की समस्या
कई पुराने वाहन, खासकर टू-व्हीलर, आज भी कार्ब्युरेटर सिस्टम पर चलते हैं। समस्या ये है कि इथेनॉल हाइज्रोस्कोपिक होता है, यानी यह नमी को सोख लेता है और गाढ़ा चिपचिपा पदार्थ बनाता है।

नमी के कारण फ्यूल टैंक में जंग लग सकती है, जो फ्यूल लाइन से होकर कार्ब्युरेटर तक पहुंचती है और जेट्स को ब्लॉक कर देती है। इससे इंजन तक पेट्रोल की सप्लाई रुक जाती है।

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पेट्रोल पंप - फोटो : संवाद
कार्ब्युरेटर में फ्लोट चेंबर होता है, जिसमें पेट्रोल जमा रहता है। यहां भी यह चिपचिपा पदार्थ जमा हो सकता है, जिससे फ्यूल सिस्टम जाम हो जाता है। ये समस्या तब ज्यादा होती है जब गाड़ी लंबे समय तक खड़ी रहती है। ऐसे में कार्ब्युरेटर की सफाई ही एकमात्र समाधान है।

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पेट्रोल पंप - फोटो : अमर उजाला
क्या है उचित समाधान
सबसे अच्छा तरीका है कि गाड़ी के ओनर मैनुअल में दी गई फ्यूल सिफारिशों का पालन करें। अगर गाड़ी E20 संभाल सकती है, तो ईंधन को ज्यादा समय तक टैंक में न रहने दें। अगर आप बिल्कुल भी जोखिम नहीं लेना चाहते, तो इथेनॉल-फ्री पेट्रोल का इस्तेमाल करें। हालांकि, इसकी कीमत लगभग 160 रुपये प्रति लीटर है। 

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