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EV: भारत में ईवी इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए 2030 तक 6,900 एकड़ जमीन और नौ अरब डॉलर के निवेश की जरूरत, जानें डिटेल

Thu, 12 Jun 2025 09:32 PM IST
अमर शर्मा ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

एक नई रिपोर्ट में बताया गया है कि साल 2030 तक ईवी निर्माण, लिथियम-आयन बैटरी उत्पादन और चार्जिंग स्टेशन जैसी सुविधाओं को स्थापित करने के लिए करीब 6,900 एकड़ जमीन और 9 अरब अमेरिकी डॉलर (लगभग 75,000 करोड़ रुपये) का निवेश जरूरी होगा।
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Electric Car - फोटो : Freepik
भारत में इलेक्ट्रिक व्हीकल्स (ईवी) के तेजी से बढ़ते बाजार को देखते हुए एक नई रिपोर्ट सामने आई है। इसमें बताया गया है कि साल 2030 तक ईवी निर्माण, लिथियम-आयन बैटरी उत्पादन और चार्जिंग स्टेशन जैसी सुविधाओं को स्थापित करने के लिए करीब 6,900 एकड़ जमीन और 9 अरब अमेरिकी डॉलर (लगभग 75,000 करोड़ रुपये) का निवेश जरूरी होगा। यह रिपोर्ट रियल एस्टेट कंसल्टेंट सैविल्स इंडिया ने जारी की है। जिसका नाम है 'चार्ज्ड फॉर चेंज: हाउ ईवी आर रिशेपिंग इंडियन रियल एस्टेट' यानी कैसे ईवीएस भारतीय रियल एस्टेट को नया आकार दे रहे हैं। 

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Electric Car Charging - फोटो : Freepik
सरकार की पहल और मार्केट ग्रोथ ने दी रफ्तार
रिपोर्ट में बताया गया है कि भारत में ईवी सेक्टर का विस्तार बाजार की मांग, सरकारी नीतियों, पर्यावरण को लेकर बढ़ती चिंताओं और ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी के चलते हो रहा है। सरकार ने ईवी अपनाने को तेज करने के लिए कई योजनाएं और नीतियां शुरू की हैं। जिससे इसका इन्फ्रास्ट्रक्चर तैयार करने की दिशा में भी गति आई है।

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Electric Car Charging - फोटो : Freepik
कितना निवेश और कितनी जमीन की जरूरत होगी?
रिपोर्ट के मुताबिक अगर ईवी अपनाने की गति तेज रही, तो साल 2030 तक ईवी निर्माण, बैटरी प्लांट और चार्जिंग स्टेशन के लिए 9 अरब डॉलर तक का निवेश लगेगा। अगर ग्रोथ मध्यम गति से हुई, तो भी करीब 7.5 अरब डॉलर की जरूरत होगी। जमीन की बात करें तो 5,760 एकड़ से लेकर 6,852 एकड़ तक की जरूरत पड़ेगी।

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MG Windsor Electric Car - फोटो : JSW MG Motor India
रियल एस्टेट सेक्टर को भी मिलेगा बड़ा मौका
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, सैविल्स इंडिया के इंडस्ट्रियल और लॉजिस्टिक्स विभाग के मैनेजिंग डायरेक्टर श्रीनिवास एन का कहना है कि भारत ने 2030 तक 30 प्रतिशत ईवी पैठ का लक्ष्य रखा है। इसे ध्यान में रखते हुए रियल एस्टेट सेक्टर को भी तेजी से बढ़ने का मौका मिलेगा। क्योंकि ईवी फैक्ट्रियों, असेंबली यूनिट्स और कंपोनेंट स्टोरेज के लिए बड़े पैमाने पर इंडस्ट्रियल और वेयरहाउसिंग स्पेस की मांग बढ़ेगी।

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MG Windsor Electric Car - फोटो : JSW MG Motor India
सप्लाई चेन का विस्तार बढ़ाएगा लॉजिस्टिक्स पार्क की मांग
ईवी से जुड़ी सप्लाई चेन को मजबूत करने के लिए बड़े-बड़े लॉजिस्टिक्स पार्क और वेयरहाउस की जरूरत होगी, जो रणनीतिक रूप से सही जगहों पर बने हों। 

श्रीनिवास ने यह भी कहा कि भारत सरकार द्वारा बनाई गई ईवी नीतियां देश में ईवी इकोसिस्टम को मजबूत करने के साथ-साथ इनोवेशन, निवेश और इन्फ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट को भी बढ़ावा दे रही हैं। इससे ऊर्जा सुरक्षा और जलवायु परिवर्तन जैसी बड़ी समस्याओं का समाधान भी मिल सकता है।

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Electric Car Charging - फोटो : Freepik
2030 तक कितनी होगी ईवी बिक्री?
सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH), नीति आयोग और रॉकी माउंटेन इंस्टिट्यूट (RMI) के अनुमान के अनुसार भारत में 2030 तक कुल ईवी बिक्री 2.5 से 3.1 करोड़ यूनिट्स तक पहुंच सकती है। इसका मतलब है कि हर साल औसतन 42 से 53 लाख ईवी की बिक्री हो सकती है।

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Electric Car Charging - फोटो : Freepik
निर्माण क्षेत्र की क्षमता पर भी असर
इस संभावित बिक्री के आधार पर सैविल्स का अनुमान है कि ईवी मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स के लिए 2,009 से 2,467 एकड़ जमीन और 4.3 करोड़ से 5.3 करोड़ स्क्वायर फीट तक बिल्ट-अप स्पेस की जरूरत होगी। 

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