इलेक्ट्रिक वाहनों (ईवी) पर सब्सिडी की जांच शुरू करने के यूरोपीय संघ के फैसले को ऐसे समय में लिया गया है जब चीनी ईवी निर्माता बाजार पर हावी होने की कोशिश कर रहे हैं। इस पर बीजिंग ने काफी ठंडी प्रतिक्रिया मिली थी। लेकिन अब जब जांच आधिकारिक तौर पर शुरू हो गई है, तो देश ने खुलकर अपनी भावनाएं उजागर कर दी हैं।
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- फोटो : अमर उजाला
चीन की तीखी प्रतिक्रिया अपेक्षित थी। लेकिन इसके जल्द आने की उम्मीद थी। बहरहाल, देश ने ईवी सब्सिडी में यूरोपीय आयोग की जांच की औपचारिक शुरुआत की निंदा की और कहा कि उसे परामर्श के लिए 'कम समय' दिया गया था और वह 'बहुत ज्यादा असंतुष्ट' है।
यह जांच ईवी पर सरकार द्वारा दी जा रही सब्सिडी जैसे - अनुदान, लोन, टैक्स कटौती, छूट - पर केंद्रित है। इनसे यूरोपीय बाजार में मौजूद चीनी वाहन निर्माताओं को भारी लाभ पहुंचा सकता है और यूरोपीय ब्रांडों के सामने ऐसी स्थिति बन सकती है जिससे वे बाजार में अपनी अहम हिस्सेदारी खो देंगे। रिपोर्टों से पता चलता है कि ये ब्रांड कीमत के मामले में चीनी ईवी के साथ प्रतिस्पर्धा करने में असमर्थ हैं, जिन्होंने यूरोपीय कार बाजारों में बाढ़ लानी शुरू कर दी है। और क्योंकि बैटरी चालित मोबिलिटी अभी भी एक अपेक्षाकृत नई टेक्नोलॉजी है। ऐसे में ज्यादातर खरीदार अन्य सभी प्रासंगिक कारकों की तुलना में कम कीमत वाले विकल्पों को ही चुनेंगे।
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आंकड़ों के अनुसार, यूरोपीय ईवी बाजार में चीनी ईवी की हिस्सेदारी वर्तमान में आठ प्रतिशत है और 2025 तक बढ़कर 15 प्रतिशत होने की उम्मीद है। यह बढ़ोतरी यूरोपीय ब्रांडों की कीमत पर हो रही है। और यूरोपीय उद्योग इस पर अपनी आंखें बंद नहीं कर सकता।
IAA Mobility 2023 international motor show
- फोटो : IAA
जबकि यह दावा किया गया है कि चीन को इस मामले पर पर्याप्त परामर्श सामग्री दी गई है, चीन ने इसके उलट इशारा किया है। बीजिंग का कहना है कि जांच को प्रेरित करने वाले कारकों में उचित सबूतों का अभाव है और वे विश्व व्यापार संगठन के नियमों के मुताबिक नहीं हैं। हालांकि इसकी कोई संभावना नहीं है कि चीन की यह प्रतिक्रिया यूरोपीय संघ जांच की प्रगति में बाधा बनेगी। लेकिन फिर भी प्रतिक्रिया की तीव्रता बढ़ सकती है।