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इसका असर बाकी दुनिया पर कैसे पड़ेगा?
विशेषज्ञों के मुताबिक, चीन में मांग कमजोर होने का मतलब है कि वहां से वाहनों का निर्यात और बढ़ेगा। साइनो ऑटो इनसाइट्स के तू ली का कहना है कि चीनी कंपनियां पहले ही विदेशों में ज्यादा मुनाफे वाले बाजार तलाश रही हैं।
बर्नस्टीन का अनुमान है कि 2026 में चीन से वाहन निर्यात 10-15 प्रतिशत और बढ़कर 65-70 लाख यूनिट्स तक पहुंच सकता है। जबकि 2018 में यह आंकड़ा सिर्फ 7.5 लाख यूनिट्स था। इससे बाकी देशों की कार कंपनियों पर दबाव और बढ़ेगा। खासकर उन पर जिन्होंने चीनी ईवी निर्माताओं से मुकाबले के लिए भारी निवेश किए हैं।
आगे क्या उम्मीद की जा सकती है?
यह अभी साफ नहीं है कि चीन का कार बाजार कितने समय तक सुस्त रहेगा। लेकिन इतना तय है कि दुनिया की ऑटो इंडस्ट्री के लिए चीन की चाल बेहद अहम है। वहां होने वाला हर उतार-चढ़ाव वैश्विक कार उद्योग की दिशा तय करता है। और यह गिरावट भी उसी सच्चाई की एक और याद दिलाती है।