कब हुई लॉन्च और कैसे पड़ा “पद्मिनी” नाम
Padmini Taxi
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साल 1964 में फिएट 1100 के स्वदेशी वर्जन के तौर पर इस गाड़ी को बतौर 'Fiat 1100 Delight' बाजार में पेश किया गया था। और इसके लॉन्च के एक साल बाद इसका नाम नाम बदलकर 'Premier President' कर दिया गया। साल 1974 में एक बार फिर से इसका नाम रानी पद्मिनी के नाम पर 'Premier Padmini' रखा गया। यह नाम काफी लोकप्रिय हुआ और फिर दुबारा इसका नाम नहीं बदला गया।
क्यों हुई थी इतनी लोकप्रिय
Premier Padmini taxi
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वैसे तो मुंबई में कई कंपनियों की टेक्सी आज भी चल रही हैं लेकिन 'पद्मिनी टैक्सी' में बैठना एक सुखद अहसास इसलिए भी होता था क्योंकि बस स्टेशन,रेल स्टेशन या फिर एयरपोर्ट आने-जाने वाले हर शख्स का सामना सबसे पहले पद्मिनी से ही होता था । इतना ही नहीं इसमें ज्यादा स्पेस, आरामदायक सीट और छत पर सामान रखने के लिए कैरियर लगा होता था। जिससे इसमें यात्रा करने वालों को कोई दिक्कत नहीं होती थी।
चार दशकों तक किया राज
Premier Padmini taxi
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मुम्बई में 'पद्मिनी टैक्सी' धीरे-धीरे लोगों को भाने लगी। नई टैक्सी खरीदने के लिए लोगों की पहली पसंद पद्मिनी ही बनती जा रही थी करीब चार दशकों तक “पद्मिनी: ने लोगों के दिलों राज किया। आंकड़ों के मुताबिक 90 के दशक में तकरीबन 63,200 पद्मिनी टैक्सी ट्रांसपोर्ट डिपार्टमेंट में रजिस्टर हुई थीं जो उस समय अपने-आप में एक रिकॉर्ड था।
पिज्जा से भी ज्यादा मशहूर थी पद्मिनी
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एक दौर ऐसा भी था जब मायानगरी मुंबई में 'पद्मिनी टैक्सी' पिज्जा से भी ज्यादा लोकप्रिय हुआ करती थी। लेकिन मौजूदा समय में मुंबई में सिर्फ 50 से भी कम टैक्सी बची हैं।
कोलकता में एम्बेसडर तो मुंबई में 'पद्मिनी टैक्सी'
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दिल्ली और कोलकाता में 60 के दशक में एम्बेसडर कार का वर्चस्व था। उस दौर एम्बेसडर कार रखना और इसकी सवारी करना ही अपने आप में एक बड़ी बात मानी जाती थी। लेकिन मुंबईवासियों ने 'एम्बेसडर' के बजाए 'पद्मिनी टैक्सी' को तरजीह दी थी।
लाल बहादुर शास्त्री की पहली कार
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लाल बहादुर शास्त्री ने सन् 1964 में प्रधानमंत्री बनने के बाद इस कार को खरीदना चाहा क्योंकि उस समय उनके पास कोई कार नहीं थी। उस समय मशहूर रही पद्मिनी की कीमत 12,000 रुपए थी,जबकि शास्त्री जी के पास मात्र 7,000 रुपए थे। हालांकि शास्त्री जी ने इस कार को लेने के लिए लोन लिया था। दुर्भाग्यवश लोन की रकम चुकाने से पहले ही शास्त्री जी की मृत्यु हो गई और शास्त्री जी की पत्नी ललिता ने इस कार का बचा हुआ लोन उतारा। बता दें आज भी यह कार दिल्ली में लाल बहादुर शास्त्री मेमोरियल संग्रहालय में जगह बनाए हुए है।
हिंदी फिल्मों में भी चला पद्मिनी का जादू
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इस कार का जादू हमारी हिंदी फिल्मों में भी खूब चला, फिल्म सड़क, क्योंकि मैं झूठ नहीं बोलता, Taxi No 9211, और न जानें कितनी ही फिल्मों में इस कार को देखा जा सकता था। हमारी फिल्मों के नायकों ने इस कार की खूब सवारी की थी।
बंद करने की बड़ी वजह
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साल 2013 में बढ़ते प्रदूषण को देखते हुए भी 20 साल पुराने वाहनों पर प्रतिबंध लगाने के निर्देश दिये थे। ऐसे में इन कारों को सड़कों से हटाना एक मजबूरी बन गया है। अब चूंकि कंपनी ने इस कार साल 2000 में ही बंद कर दिया था तो ऐसे में इसे अपग्रेड भी नहीं किया जा सकता था।
पद्मिनी की कमी हमेशा खलेगी
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पद्मिनी टैक्सी से हर मुंबई वासी भावानात्मक रूप से जुड़ा हुआ है, इसलिए पद्मिनी की कमी उन्हें हमेशा खलेगी। मुंबई के रहने वाले नरेन्द्र मधुकर बताते हैं कि पिछले 18 से 20 सालों में न जाने कितनी ही बार टैक्सी 'पद्ममिनी' की सवारी की है। कॉलेज के एग्जाम से लेकर नौकरी के इन्टरव्यू तक के सफर में इस कार ने काफी साथ निभाया है। अगले साल से मुंबई की सड़कों पर यह पूरी तरह से बंद हो जाएगी यह सोचकर दुख होता है।
ऐसा था इंजन
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इंजन के बात करें तो फिएट की यह कार (1100 Delight) दो इंजन 1,089 cc और 1,366 cc ऑप्शन में थी, और दोनों इंजन 4 स्पीड मैन्युअल गियरबॉक्स से लैस थे कार का व्हीलबेस 2,340 mm, लंबाई 3,905–3,940 mm, चौड़ाई1,460 mm और उंचाई 1,470 mm थी, जबकि इस कर्ब वजन 895 kg था। प्रीमियर के इस मॉडल का प्रोडक्शन 1974-2000 तक रहा था।