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डीलर ने ग्राहक को थमाई ‘फर्जी’ कार, कार कंपनी ने दी बिल्कुल नई कार, पढ़ें पूरी कहानी

Fri, 17 May 2019 09:55 PM IST
Harendra Chaudhary ऑटो डेस्क, अमर उजाला नई दिल्ली
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Skoda Rapid Black - फोटो : File
सुहास मंजूनाथ के लिए कार खरीदने का अनुभव किसी डरवाने सपने से कम नहीं रहा। डीलर अपनी इनवेंट्री फटाफट निकलाने के लिए किस-किस तरह की तिकड़म लगाते हैं, इसका अंदाजा शायद आपको नहीं है। लेकिन मंजूनाथ ने हार नहीं मानी और लंबी ल़ड़ाई के बाद उन्होंने अपनी जिद पूरी की, जिसके आगे कंपनी को भी झुकना पड़ा। आइए जानते हैं क्या है सुहास मंजूनाथ की कहानी...
 
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खरीदनी थी नई कार

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Skoda Rapid Delivery - फोटो : Team-BHP
बंगलुरू के रहने वाले मंजूनाथ ने 2016 में नई स्कोडा रैपिड खरीदने का मन बनाया और उन्हें स्कोडा रैपिड का खास लिमिटेड एडिशन ब्लैक पैकेज खरीदना था। वे डीलरशिप के पास गए और इसके बारे में पूछताछ की। सुहास स्कोडा की बिल्ड क्वॉलिटी और उसकी कम कीमत से बेहद प्रभावित थे। पहली डीलरशिप ने कार नहीं होने का हवाला दिया, जिसके बाद उन्होंने दूसरी डीलरशिप का रुख किया।
 
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डीलर ने बोला झूठ

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skoda rapid onyx
डीलर ने उन्हें बताया कि उनके पास केवल एक ही स्कोडा रैपिड ब्लैक पैकेज स्टॉक में है, ताकि सुहास कार खरीदने का जल्द फैसला कर लें। सुहास ने डिस्काउंट आदि फाइनल करने के बाद 1.6 लीटर मैनुअल ट्रांसमिशन वाली कैंडी व्हाइट रंग में ब्लैक पैकेज फाइनल कर ली। कार के लिए उन्हें 11.8 लाख रुपये ऑनरोड कीमत बताई गई। सुहास ने 14 अक्टूबर, 2016 को 20  हजार का बुकिंग अमाउंट देकर कार बुक कर दी। 18 अक्टूबर को डीलर ने उनसे 30 हजार रुपये अतिरिक्त मांगे ताकि कार को परी तरह से ब्लॉक कर सके। लोन वगैरहा होने के बाद 31 अक्टूबर को उन्हें कार की डिलीवरी मिल गई।
 

टैक्स इनवॉइस में अंतर

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Skoda Rapid Monte Carlo sedan
सुहास को जब कार मिली तो उन्होंने देखा कि डीलर की बताई कीमत और कागजों पर लिखी कीमत मेल नहीं खा रही है। टैक्स इनवाइस पर सुहास ने पाया कि तकरीबन 48 हजार रुपये का अंतर है, क्योंकि कार का एक्स-शोरूम प्राइस 9.24 लाख है और डीलर ने उन्हें 9.72 लाख रुपये बताया। वहीं कागजों में पता चला कि कार लिमिटेड एडिशन ब्लैक पैकेज नहीं है। डीलर ने उन्हें 2 नवंबर को आने को कहा और सुहास को 67 हजार रुपये डेबिट नोट का ऑफर दिया। लेकिन सुहास ने ठुकरा दिया, बाद में बैक अधिकारी और डीलरशिप के बीच हुई बातचीत के बाद उन्होंने डेबिट नोट ले लिया।
 
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कागजों पर नहीं थी ब्लैक पैकेज की बात

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skoda rapid boot space
लेकिन सुहास कार के ब्लैक पैकेज होने की बात पर संतुष्ट नहीं थे, क्योंकि डॉक्यूमेंट्स पर कहीं भी ब्लैक पैकेज होने की बात नहीं थी। इस बीच कार के हेडलैंप फ्लैश और बीम ने काम करना बंद कर दिया, उन्होंने इसकी शिकायत डीलरशिप से की। डीलर ने टैक्स इनवॉइस में संशोधन करके उस पर ब्लैक पैकेज लिख कर भेज दिया और कार सर्विस सेंटर पर वही इनवॉइस दिखाने को कहा।
 
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लिमिटेड एडिशन नहीं थी कार

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Skoda Car delivery Suhas - फोटो : Team-BHP
27 दिसंबर को सुहास शोरूम गए और कार टेक्निशियंस को दिखाया। सर्विस सेंटर ने कार ठीक करने के लिए 8-10 दिन की मोहलत मांगी। सर्विस सेंटर पर उन्हें दिखाया गया कि कैसे रेगुलर स्कोडा रैपिड के हेडलैंप कार में ठीक से काम कर रहे हैं, लेकिन ‘ब्लैक पैकेज’ के साथ आने वाले प्रोजेक्टर हेडलैंप्स काम नहीं कर रहे हैं। सुहास को महसूस हुआ कि डीलर ने कार के कुछ पार्ट्स को बदल दिया है, जो केवल लिमिटेड एडिशन में आते थे। डीलर ने सुहास को बताया कि उसने उसने उनकी कार के लिए खास हेडलैंप्स का ऑर्डर दिया है, लेकिन सुहास को माइ स्कोडा मोबाइल एप पर पता चला कि कार रेगुलर वर्जन की है और लिमिटेड एडिशन नहीं है।
 
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कंपनी ने दी उन्हें नई कार

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Skoda Car delivery Black - फोटो : Team-BHP
सुहास ने कंज्यूमर कोर्ट में केस फाइल किया और ड़ीलर की चिटिंग के बारे में जानकारी दी, जिसके बाद इस साल लंबी लड़ाई के बाद स्कोडा और सुहास में सैटलमेंट हुआ और उन्हें नई कार दी। सुहास ने इस दौरान कई दिक्कतों का सामना किया, यहां तक कि स्कोडा ने भी कहा कि उन्होंने सुहास को नई कार की डिलीवरी की है। सुहास को दूसरी कारें भी ऑफर की गईं, लेकिन सुहास ने लेने से मना कर दिया। कंज्यूमर कोर्ट ने सुहास को नई कार देने का आदेश दिया और जिसके बाद मार्च के आखिर में कंपनी ने उन्हें नई कार की डिलीवरी दी।।
 
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