इस राज्य के लोगों को अब व्हीकल रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट (वाहन पंजीकरण प्रमाण पत्र) और ड्राइविंग लाइसेंस के लिए रिजनल ट्रांसपोर्ट ऑफिस (आरटीओ) जाने की जरूरत नहीं पड़ेगी।
असम में रहने वाले लोगों को अब व्हीकल रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट (वाहन पंजीकरण प्रमाण पत्र) और ड्राइविंग लाइसेंस के लिए रिजनल ट्रांसपोर्ट ऑफिस (आरटीओ) जाने की जरूरत नहीं पड़ेगी। असम सरकार ने इन दस्तावेजों को जारी करने के लिए एक नई ऑनलाइन प्रणाली शुरू की है।
परिवहन सचिव आदिल खान ने कहा कि अब पुराने हो चुके चिप-आधारित स्मार्ट कार्ड की जगह क्यूआर (क्विक रिस्पॉन्स) कोड-आधारित रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट और ड्राइविंग लाइसेंस कार्ड जारी करने के लिए एक नई प्रणाली शुरू की गई है।
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उन्होंने कहा कि इसे केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्रालय की अधिसूचना के अनुरूप पेश किया गया है।
खान ने कहा, "नए सिस्टम के कारण, डिस्ट्रिक्ट ट्रांसपोर्ट ऑफिस (डीटीओ) के दफ्तर में कागजात जमा करने, शुल्क का भुगतान करने और प्रिंटेड ड्राइविंग लाइसेंस / आरसी लेने के लिए कोई बार-बार नहीं जाना होगा।"
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नई आरसी में एम्बेडेड क्यूआर कोड के साथ टॉप लेयर के नीचे गिलोच पैटर्न, माइक्रो लाइन, वॉटरमार्क और होलोग्राम जैसी अतिरिक्त सेफ्टी फीचर्स होंगे।
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खान ने यह भी कहा कि ड्राइविंग टेस्ट पास करने के बाद, व्यक्ति को लाइसेंस हासिल करने के लिए डीटीओ जाने की जरूरत नहीं है क्योंकि "मुद्रण की प्रक्रिया रिमोट सेंट्रलाइज्ड लोकेशन (दूरस्थ केंद्रीकृत) स्थानों पर की जाएगी और इसे 3-5 दिनों के भीतर डाक द्वारा भेज दिया जाएगा।"
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उन्होंने कहा, "क्यूआर कोड एम्बॉस्ड ड्राइविंग लाइसेंस का फायदा यह है कि कोई भी ट्रैफिक कर्मी या कानून प्रवर्तन एजेंसी मोबाइल फोन के साथ क्यूआर कोड को स्कैन करके कार्ड धारक के पूर्ववृत्त (केस हिस्ट्री) को आसानी से वेरिफाई (सत्यापित) कर सकती है, और नकल का कोई खतरा नहीं है।"
परिवहन सचिव ने जोर देकर कहा कि डीलर पॉइंट्स पर आरसी की छपाई और डिलीवरी और दूरस्थ केंद्रीकृत स्थानों के जरिए ड्राइविंग लाइसेंस न सिर्फ बिचौलियों की भूमिका को खत्म करेगा, बल्कि पूरी प्रणाली में पारदर्शिता भी लाएगा।
खान ने कहा, "परिवहन अधिकारी उम्मीद जता रहे हैं कि नई प्रणाली की शुरुआत के बाद हर साल लगभग 10-15 लाख मोटर चालकों को फायदा पहुंचेगा।"