कुंडली दोष (प्रतीकात्मक तस्वीर)
जन्म कुंडली में लगने वाला त्रिखल दोष
जब कुंडली में एक ही ग्रह तीन परिस्थितियों में अपने कारक भाव में बैठ जाए। जब किसी का जन्म सूर्य कृतिका, उत्तरा फाल्गुनी या उत्तराषाढ़ा नक्षत्र में हुआ हो और सूर्य पहले या दसवें भाव में हो, तब जातक की कुंडली में त्रिखल दोष होता है। क्योंकि इन नक्षत्रों का स्वामी ग्रह सूर्य है और कुंडली में प्रथम एवं दशम भाव का कारक भी सूर्य होता है। इस तरह से एक ही ग्रह तीन परिस्थितियों में एक ही कारक भाव में होता है।