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जानिए क्या होता है त्रिखल दोष, कैसे की जाती है इसकी शांति

Wed, 22 Jul 2020 07:13 AM IST
Shashi Shashi ज्योतिष डेस्क, अमर उजाला
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त्रिखल दोष (प्रतीकात्मक तस्वीर)

वैदिक ज्योतिष में कई तरह के दोषों का वर्णन किया गया है। कुंडली में कुछ दोष होने से जातक के जीवन में समस्याएं और कष्ट बने रहते हैं। ऐसा ही एक दोष ज्योतिष में बताया गया है जिसे त्रिखल दोष कहा जाता है। इस दोष को दो तरह से जाना जाता है एक दोष ज्योतिष के अनुसार कुंडली में बनता है तो वहीं दूसरा दोष जन्म के अनुसार लगता है। जानते हैं कैसे लगता है यह दोष-

 

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कुंडली दोष (प्रतीकात्मक तस्वीर)

जन्म कुंडली में लगने वाला त्रिखल दोष

जब कुंडली में एक ही ग्रह तीन परिस्थितियों में अपने कारक भाव में बैठ जाए। जब किसी का जन्म सूर्य कृतिका, उत्तरा फाल्गुनी या उत्तराषाढ़ा नक्षत्र में हुआ हो और सूर्य पहले या दसवें भाव में हो, तब जातक की कुंडली में त्रिखल दोष होता है। क्योंकि इन नक्षत्रों का स्वामी ग्रह सूर्य है और कुंडली में प्रथम एवं दशम भाव का कारक भी सूर्य होता है। इस तरह से एक ही ग्रह तीन परिस्थितियों में एक ही कारक भाव में होता है।

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जन्म के अनुसार त्रिखल दोष(सांकेतिक तस्वीर)

जन्म त्रिखल दोष
ज्योतिष मान्यतानुसार अगर तीन संतान पर कोई संतान जन्मी हो तो त्रिखल दोष होता है जैसे तीन पुत्रियों के बाद एक पुत्र या तीन पुत्रों के बाद पुत्री का जन्म होने पर त्रिखल दोष लगता है।

 

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- फोटो : kundali

त्रिखल दोष होने से क्या कष्ट होते हैं
जन्म त्रिखल दोष के बारें में कहा जाता है कि जब किसी को यह दोष लगता है, तो यदि पुत्रों के बाद पुत्री ने जन्म लिया है या पुत्रियों के बाद पुत्र ने जन्म लिया है तो उस पुत्र या पुत्री को बहुत कष्ट रहता है यहां तक की जातक को मृत्यु तुल्य कष्ट सहन करना पड़ता है। कोई न कोई रोग हमेशा घेरे रहता है। इसलिए इसका निवारण करना आवश्यक होता है। शास्त्रों में इस दोष का निवारण करने की विधि बताई गई है।

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निवारण करने के लिए तीनों देवो की पूजा करनी चाहिए(प्रतीकात्मक तस्वीर)

सामान्यतः जन्म के बाद के अशौच के दिन निकल जाने के बाद किसी भी शुभ दिन इस दोष का निवारण किया जा सकता है। धान की ढेरी पर चार कलशों की स्थापना करने त्रिदेव और देवराज इंद्र की पूजा करनी चाहिए। रुद्र सूक्त और शांति सूक्त का पाठ करवा कर हवन करावाना चाहिए। पूजा के लिए पुरोहित जी से किसी भी योग्य शुभ मुहूर्त के बारें में जानकर यह पूजा कर सकते हैं। अगर जन्म के समय इस दोष के बारे में न पता हो और बाद में पता चले तो घबराना नहीं चाहिए, बाद में भी आप इस दोष का निवारण करवा सकते हैं।

 

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