सूर्यदेव का रथ 16 जुलाई को शायं 04 बजकर 51 मिनट से उत्तरायण की यात्रा संपन्न करके दक्षिणायन की यात्रा पर प्रस्थान करेंगे। इसी के साथ कर्क राशि से लेकर छः राशियों कर्क, सिंह, कन्या, तुला वृश्चिक और धनु राशि की सूर्य की यात्रा की अवधि के मध्य पितरों का दिन और देवताओं की रात्रि आरम्भ हो जायेगी। इस यात्रा में आरम्भ के दो माह सूर्य के रथ के साथ इंद्र तथा विवस्वान नाम के दो आदित्य, अंगिरा और भृगु नाम के दो ऋषि, एलापर्ण तथा शंखपाल नाम के दो नाग, प्रम्लोचा और दुंदुका नाम की दो अप्सराएं, भानु और दुर्धर नामक दो गन्धर्व, सर्प तथा ब्राह्म नाम के दो राक्षस, स्रोत तथा आपूरण नाम के दो यक्ष चलेंगे। सूर्य के उदय होते ही इंद्र, दोपहर को यमराज, अस्त के समय वरुण और अर्धरात्रि के समय सोम निरंतर पूजन करते हैं। विष्णु, शिव, रूद्र, ब्रह्मा, अग्नि, वायु, ईशान आदि सभी देवगण ब्रह्म मुहूर्त में कल्याण हेतु सूर्य आराधना करते हैं। दक्षिणायन सूर्य की यात्रा के समय देवप्राण क्षीण पड़ने लगते हैं और आसुरी शक्तियों का वर्चस्व बढ़ जाता है।