भवन के वास्तु में नौ ग्रहों का महत्वपूर्ण स्थान होता है। प्रत्येक ग्रह का भवन में एक निश्चित स्थान होता है। इसी प्रकार प्रत्येक दिशा के देवता भी अलग-अलग होते हैं। घर में इनके संतुलित होने पर सुख-समृद्धि रहती है वहीं इनके स्वभाव के विपरीत निर्माण करने पर वास्तु दोष उत्पन्न हो जाता है जिससे अनेकों प्रकार के जीवन में कष्ट उठाने पड़ सकते है।
मन को शांति देते हैं चन्द्रमा
वायव्य दिशा का स्वामी चन्द्रमा है। यह शांत चित्त एवं भाग्य का अधिपति ग्रह है। यह मन, चित्तवृत्ति, शारीरिक व मानसिक स्वास्थ्य, संपत्ति व माता का कारक है। वहीं वास्तु में वायव्य कोण वायुदेव का स्थान है, वायुदेव हमें शक्ति, प्राण, स्वास्थ्य प्रदान करते है। इस दिशा में भोजनकक्ष, अतिथि गृह, विवाह योग्य कन्याओं का कमरा एवं बिना टॉयलेट के बाथरूम होना शुभ होता है। सामाजिक जीवन एवं व्यापार पर इसका विशेष प्रभाव होता है।