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Vastu Tips: जानिए वास्तु के अनुसार नव ग्रहों का भवन के वास्तु पर कैसे होता है असर

Mon, 28 Jun 2021 06:53 AM IST
विनोद शुक्ला अनीता जैन, वास्तुविद, नई दिल्ली
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ज्योतिषशास्त्र में ग्रहों की भूमिका
भवन के वास्तु में नौ ग्रहों का महत्वपूर्ण स्थान होता है। प्रत्येक ग्रह का भवन में एक निश्चित स्थान होता है। इसी प्रकार प्रत्येक दिशा के देवता भी अलग-अलग होते हैं। घर में इनके संतुलित होने पर सुख-समृद्धि रहती है वहीं इनके स्वभाव के विपरीत निर्माण करने पर वास्तु दोष उत्पन्न हो जाता है जिससे अनेकों प्रकार के जीवन में कष्ट उठाने पड़ सकते है।

मन को शांति देते हैं चन्द्रमा
वायव्य दिशा का स्वामी चन्द्रमा है। यह शांत चित्त एवं भाग्य का अधिपति ग्रह है। यह मन, चित्तवृत्ति, शारीरिक व मानसिक स्वास्थ्य, संपत्ति व माता का कारक है। वहीं वास्तु में वायव्य कोण वायुदेव का स्थान है, वायुदेव हमें शक्ति, प्राण, स्वास्थ्य प्रदान करते है। इस दिशा में भोजनकक्ष, अतिथि गृह, विवाह योग्य कन्याओं का कमरा एवं बिना टॉयलेट के बाथरूम होना शुभ होता है। सामाजिक जीवन एवं व्यापार पर इसका विशेष प्रभाव होता है।
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भगवान सूर्य - फोटो : Social media
पूर्व दिशा के स्वामी सूर्य
पूर्व दिशा के स्वामी सूर्य ग्रह एवं देवता इंद्र है। सूर्य स्वास्थ्य, ऐश्वर्य और तेजस्व प्रदान करने वाला ग्रह है यदि घर की पूर्व दिशा दोषमुक्त रहे तो उस भवन का स्वामी और उसमें रहने वाले सदस्य महत्वकांक्षी,सत्वगुणों से युक्त और उनके चेहरे पर तेज होता है ,ऐसे भवन स्वामी को खूब मान-सम्मान मिलता है। कभी भी इस दिशा को भारी व बंद नहीं करें। इसलिए वास्तु में पूर्व दिशा को खुला छोड़ने की सलाह दी जाती है ताकि अंनत गुणधर्म वाली सूर्य की रोशनी भवन में प्रवेश कर सकें।
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मंगल के उपाय
अमंगल से दूर रखते हैं मंगल
दक्षिण दिशा मंगल ग्रह के अधीन होती है एवं इस दिशा के देवता यम हैं। मंगल ग्रह समस्त प्रकार का साहस एवं धन लाभ प्रदान करने वाला होता है। मंगल ग्रह  निडर, साहसी और दिलेर होता है और यह युद्ध, लड़ाई, क्रोध का अधिपति भी है। दक्षिणदिशा विधि, न्याय, मुकदमेबाजी, आराम, जीवन और मृत्यु से संबंधित है। इसलिए इस दिशा में शयन कक्ष तथा भण्डार गृह रखना चाहिए।

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कहां रहता है शुभ राहु
दक्षिण पश्चिम दिशा या नैऋत्य कोण का स्वामी राहु ग्रह है एवं इस दिशा की देवी आसुरी शक्ति वाली है। घर में भूलकर भी इस दिशा को हल्की एवं खुली नहीं रखें। इस दिशा में बेडरूम, ऑफिस, बाथरूम या स्टोर रूम बनाना लाभदायक रहता है। इस दिशा में तमस तत्व सर्वाधिक होता है इसलिए वास्तु में इस दिशा को सबसे अधिक भारी रखना शुभ होता है।
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mercury transit
सम्पन्नता देता है बुध
यह ग्रह उत्तर दिशा के स्वामी एवं इस दिशा के देवता कुबेर देव होते हैं। बुध वाकचातुर्य एवं विद्धता का प्रतिनिधि ग्रह है। जिस घर में उत्तर दिशा शुभ होती है वहां के लोग अत्यंत बुद्धिमान, विद्वान, लेखन एवं कविता में रूचि रखने वाले होते हैं। बुध सम्पन्नता और करियर का प्रतिनिधि ग्रह है इसलिए इस दिशा में अध्ययन कक्ष, तिजोरी और पुस्तकालय शुभ माने गए हैं।
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jupiter
ईशान के स्वामी हैं गुरु
यह उत्तर-पूर्व या ईशान कोण का स्वामी ग्रह है एवं विष्णुदेव इस दिशा के देवता हैं। गुरु, ईश्वरीय तेज एवं आध्यात्मिक वृत्ति का प्रदाता ग्रह है। बौद्धिक विकास एवं बौद्धिक शांति के लिए तथा ईश्वर की कृपा पाने के लिए यह दिशा स्वस्थ्य रखनी चाहिए। इस दिशा में पूजा स्थल एवं योग कक्ष बनाना अत्यंत शुभकारी है।
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शुक्र ग्रह (प्रतीकात्मक तस्वीर) - फोटो : Pixabay
ऐश्वर्य प्रदान करते हैं शुक्र
शुक्र आग्नेय कोण के अधिपति ग्रह एवं इस दिशा के देवता अग्निदेव हैं। शुक्र ग्रह ऐश्वर्य के स्वामी हैं। जिस भवन में दक्षिण-पूर्व या आग्नेय कोण शुभगुणों से युक्त और दोष रहित होता है ऐसे वास्तु की आंतरिक ऊर्जा स्वस्थ्य और शुक्र के गुणधर्म वाली होती है। इस दिशा में रसोई, बिजली के सामान एवं विद्युत केंद्र होना वास्तु के अनुसार शुभ माने गए हैं।
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भाग्यवान बनाते हैं शनि
पश्चिम दिशा लाभ एवं प्रसन्नता की दिशा है। इस दिशा के ग्रह शनि एवं देवता वरुण देव है। शनि ग्रह भाग्य, कर्म, यश तथा पौरुष संबंधी कार्यों का कारक होता है।इस दिशा में ड्राइंगरूम, बेडरूम, पुस्तकालय होना शुभ होता है। इस दिशा को हमेशा स्वस्थ्य रखना चाहिए।
 
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