बाबा कालभैरव
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भगवान काल भैरव के दो मुख्य रूप माने गए हैं, बटुक भैरव जो सौम्य स्वरूप हैं और काल भैरव जो रूद्र स्वरूप हैं। काल भैरव भगवान के बटुक स्वरूप की आराधना साधारण जन के लिए उत्तम रहती है। शनिवार के दिन किसी ऐसे भैरव मंदिर में जाएं जहां पर लोग कम जाते हो या फिर वहां पर काफी समय से पूजा अर्चना न की जा रही हो। उसके बाद रविवार को प्रातः वहां जाकर भगवान कालभैरव को सिंदूर, तेल, नारियल, पुए और जलेबी आदि अर्पित करें और सच्चे हृदय से एकाग्र होकर उनकी पूजा अर्चना करें। पूजा के बाद नारियल पुए और जलेबी को प्रसाद स्वरूप बटुको (पांच से सात साल के लड़के) को बांट दें। मान्यता है कि अपूज्य भैरव की पूजा करने से भगवान भैरव बहुत जल्दी प्रसन्न होते हैं और आपकी सभी समस्याओं का जल्दी निवारण होता है।