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भगवान भैरव के ये उपाय करने से शीघ्र होता है समस्या का समाधान, दुर्भाग्य से भी मिलता है छुटकारा

Fri, 12 Feb 2021 12:21 AM IST
Shashi Shashi ज्योतिष डेस्क, अमर उजाला
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काल भैरव
धर्म शास्त्रों में पूजा-पाठ की शक्ति का बहुत महत्व माना गया है। वहीं ज्योतिष में पूजा-पाठ से संबंधित कुछ ऐसे उपाय बताए गए हैं, जो कठिन से कठिन समय को टालने और आपके दुर्भाग्य को भी सौभाग्य में बदलने की क्षमता रखते हैं। जिसके अनुसार भगवान भैरव की पूजा-अर्चना समस्या निवारण के लिए शीघ्र फलदायी होती है। ज्योतिष में भगवान भैरव को प्रसन्न करके, समस्याओं से छुटकारा पाने के लिए कुछ सरल लेकिन तीव्र और प्रभावशाली उपाय बताए गए हैं। इन उपायों को करने से न केवल आपकी समस्याएं दूर होती हैं बल्कि आपका भाग्य भी जाग्रत होता है। तो चलिए जानते हैं ऐसे ही कुछ उपायों के बारे में...
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कालभैरव बाबा - फोटो : amar ujala
यदि आप समस्याओं से घिरे हुए हैं और उससे निकलने का रास्ता नजर नहीं आ रहा है। आपको लग रहा है कि जैसे दुर्भाग्य आपका पीछा ही नहीं छोड़ रहा है तो भगवान भैरव के समक्ष भैरव चालीसा का पाठ करें। ये कार्य आपको किसी रविवार के दिन से आरंभ कर अगले 40 दिनों तक लगातार नियम और निष्ठा के साथ करना है। इसके अलावा ही नियमित रूप से किसी कुत्ते को रोटी या फिर कुछ खाने के लिए दें। कुत्ते को भगवान भैरव का वाहन माना गया है, इसलिए कुत्ते को भोजन कराने से वे बहुत जल्दी प्रसन्न होते हैं। समस्याओं से छुटकारा पाने और दुर्भाग्य से पीछा छुड़ाने के लिए यह उपाय बहुत ही प्रभावशाली माना गया है।
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Kaal Bhairav
भगवान भैरव शिव जी का ही रूद्र रूप हैं। इनकी पूजा आराधना करने से शत्रु, भय और संकटों से रक्षा होती है। भैरव भगवान की पूजा करने से शनि ग्रह का प्रकोप भी दूर होता है। भगवान भैरव की आराधना करने से साथ उनका स्मरण करते हुए जरूमंदो को भोजन कराना चाहिए। इसके साथ ही कुष्ठ रोगियों और भिक्षुओं को कंबल दान करने चाहिए और भगवान भैरव से संकटो को दूर करने की प्रार्थना करनी चाहिए।
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बाबा कालभैरव - फोटो : अमर उजाला
भगवान काल भैरव के दो मुख्य रूप माने गए हैं, बटुक भैरव जो सौम्य स्वरूप हैं और काल भैरव जो रूद्र स्वरूप हैं। काल भैरव भगवान के बटुक स्वरूप की आराधना साधारण जन के लिए उत्तम रहती है। शनिवार के दिन किसी ऐसे भैरव मंदिर में जाएं जहां पर लोग कम जाते हो या फिर वहां पर काफी समय से पूजा अर्चना न की जा रही हो। उसके बाद रविवार को प्रातः वहां जाकर भगवान कालभैरव को सिंदूर, तेल, नारियल, पुए और जलेबी आदि अर्पित करें और सच्चे हृदय से एकाग्र होकर उनकी पूजा अर्चना करें। पूजा के बाद नारियल पुए और जलेबी को प्रसाद स्वरूप बटुको (पांच से सात साल के लड़के) को बांट दें। मान्यता है कि अपूज्य भैरव की पूजा करने से भगवान भैरव बहुत जल्दी प्रसन्न होते हैं और आपकी सभी समस्याओं का जल्दी निवारण होता है।
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