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बेहद सुंदर है ये ग्रह, रोचक है इस ग्रह के बनने की कहानी

Thu, 20 Feb 2020 06:55 AM IST
रुस्तम राणा ज्योतिष डेस्क, अमर उजाला
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सौरमंडल के ग्रह - फोटो : Pixabay
बेहद सुंदर चमकीले चंद्रमा का हिन्दु धर्म में काफी महत्व है। चंद्रमा अन्य देवताओं के समान ही पूज्यनीय है। ज्योतिष में तो चंद्रमा का बहुत ही महत्वपूर्ण स्थान है। दिन-रात, महीना-साल, प्रतिपदा से लेकर अमावस्या पूर्णिमा सब तिथियां चंद्रमा पर निर्भर करती हैं।
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चंद्रमा की सतह - फोटो : Social media
चंद्रमा की उतरती और चढ़ती कलाओं से ही तिथियों का, माह के कृष्ण और शुक्ल पक्षों का निर्धारण होता है।यहां तक की कुंडली भी चंद्रमा की दशा के अनुसार ही बनती है। जिस भाव में चंद्रमा होता है, उसी के अनुसार जातक की चंद्र राशि बनती है। वेदों में चन्द्र को मन का कारक कहा गया है। आज हम आपको पुराणों के आधार पर बताएंगे की चंद्रमा की उत्पति कैसे हुई?
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चंद्रमा - फोटो : Pixabay
अग्नि पुराण के अनुसार जब ब्रह्मा जी ने सृष्टि की रचना की तो सबसे पहले मानस पुत्रों को बनाया। उनमें से एक मानस पुत्र ऋषि अत्रि का विवाह ऋषि कर्दम की कन्या अनुसुइया से हुआ और चंद्रमा उन्हीं की संतान हैं।

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चंद्रमा - फोटो : Pixabay
पद्म पुराण के अनुसार ब्रह्मा ने अपने मानस पुत्र अत्रि को सृष्टि का विस्तार करने की आज्ञा दी । उनकी आज्ञा पाकर महर्षि अत्रि ने एक तप प्रारंभ किया। तप काल में एक दिन महर्षि की आंखो से जल की कुछ बूंदें गिरी जो काफी प्रकाशमय थी। 
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चांद - फोटो : self
तब दिशाओं ने स्त्री रूप में आ कर पुत्र प्राप्ति की इच्छा से उन बूंदों को ग्रहण कर लिया। परंतु उन बूंदो को दिशाएं धारण न रख सकी और उन्हें त्याग दिया।
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Moon Shot on Huawei P30 Pro - फोटो : Gaurav Pandey
उस त्यागे हुए गर्भ को ब्रह्मा ने चंद्रमा के नाम से प्रख्यात किया । स्कन्द पुराण के अनुसार देवों और असुरों ने मिलकर जब सागर मंथन किया तब चौदह रत्न निकले थे। चंद्रमा उन्हीं चौदह रत्नों में से एक है।
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