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हिंदू धर्म में सोलह श्रंगार क्यों माना गया है इतना अहम और इसमें क्या क्या चीजें होती है शामिल

Tue, 08 Jun 2021 12:20 PM IST
Shashi Shashi ज्योतिष डेस्क, अमर उजाला
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(प्रतीकात्मक तस्वीर)
हिंदू धर्म में विवाह के बाद हर स्त्री के लिए सोलह श्रंगार बहुत मायने रखता है। मांग में सिंदूर, माथे पर बिंदिया, हाथों में चूड़ी, पांव में पायल और बिछिया.ये प्रतीक धारण कर जब एक लड़की अपने घर को छोड़ किसी दूसरे घर में प्रवेश करती है तो उसके जीवन के मायने ही बदल जाते हैं। श्रंगार एक स्त्री की सुंदरता में चार चांद तो लगाता ही है साथ ही यह एक स्त्री के जीवन में परिवर्तन और समाज में उसकी पहचान को एक नए रुप में प्रस्तुत करता है। केवल धार्मिक दृष्टि से ही नहीं बल्कि वैज्ञानिक दृष्टि से भी सोलह श्रंगार का महत्व माना जाता है। साज-श्रंगार में उपयोग होने वाला सामान किसी भी सुहागन स्त्री के वैवाहिक जीवन का प्रतिनिधत्व करता है। इसमें प्रयोग की जाने वाली हर चीज का अपना एक अलग महत्व होता है। हिंदू धर्म मानने वाली प्रत्येक सुहागन स्त्री अपने पती की लंबी आयु और सुख जीवन की कामना के साथ सोलह श्रंगार धारण करती है। जानते हैं कि सोलह श्रंगार में किन-किन चीजों को शामिल किया जाता है और इनका क्या महत्व होता है।
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प्रतीकात्मक तस्वीर। - फोटो : अमर उजाला।
सिंदूर 
विवाह के समय मंत्रोच्चार का साथ सिंदूर दान किया जाता है जो सबसे सुहाग के सामान में सबसे अधिक महत्व पूर्ण माना जाता है। यह एक सुहागन स्त्री की पहचान होता है। वर, वधू की मांग में सिंदूर भरता है। यह सिंदूर एक स्त्री के विवाहित होने की पहचान करवाता है धार्मिक मान्यता के अनुसार स्त्रियां अपने पती की दीर्घायु की कामना के साथ सिंदूर लगाती हैं।
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(प्रतीकात्मक तस्वीर)
बिंदी
बिंदी एक स्त्री के मुख की आभा को और ज्यादा बढ़ा देती है। आज के समय में भले ही स्त्रियां बाजार में मिलने वाली स्टिकर बिंदी का प्रयोग करती है लेकिन पहले के समय में कुमकुम की बिंदी लगाई जाती थी। मान्यता अनुसार यह एक स्त्री के सुहाग का प्रतीक तो होती ही है साथ ही यह भृकुटि के बीचो-बीच लगाई जाती है इसलिए बिंदी दिमाग को शांत रखने का काम भी करती है।

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(प्रतीकात्मक तस्वीर)
काजल
आज के समय में आंखो की सुंदरता बढ़ाने के लिए बाजार में कई तरह का सामान उपलब्ध होता है लेकिन केवल काजल लगाने भर से ही आंखों की सुंदरता में चार-चांद लग जाते हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार काजल बुरी नजर से रक्षा करता है इसलिए इस सोलह श्रृंगार काजल को भी शामिल किया गया है।
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mangalsutra
मंगलसूत्र 
सिंदूर की तरह ही मंगलसूत्र धारण करने का भी एक अलग महत्व होता है। विवाह के समय सामाजिक रितिरिवाजों का निर्वहन करते हुए मंत्रोच्चार के बीच वर अपनी वधू के गले में मंगलसूत्र पहनाता है। यह एक स्त्री के सुहाग का प्रतीक होता है। मान्यता है कि इससे पति की आयुु जुड़ी होती है। गले में पहना हुआ मंगलसूत्र जब शरीर से स्पर्श करता है तो उसके कई फायदे भी होते हैं।
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दुल्हन - फोटो : प्रतीकात्मक चित्र
मेहंदी 
हिंदू धर्म में शादी के समय मेहंदी रचाना एक महत्वपूर्ण रस्म होती है। मेहंदी को बहुत ही शुभ माना जाता है। हर सुहागन स्त्री के लिए हाथों में मेहंदी रचाना सौभाग्य का प्रतीक माना जाता है। लोकमान्यता अनुसार मेहंदी का रंग जितना गहरा होता है वैवाहिक जीवन भी उतना ही खुशहाल होता है। कवंदती अनुसार मेहंदी के रंग की गहराई पति के प्रेम की गहराई का प्रतीक होती है।
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हरी चूड़ियां पहनने का महत्व - फोटो : pixabay
चूड़ियां
आजकल के समय में कई तरह के डिजाइन और धातु आदि की बनी हुआ चूड़ियां आने लगी हैं लेकिन सुहागन स्त्री के लिए कांच की चूड़िया पहनना शुभ माना जाता है। लाल और हरे रंग की चूड़ियां सुहागन स्त्री की सुंदरता को और भी अधिक बढ़ा देती हैं। सोलह श्रंगार में चूड़िया एक महत्वपूर्ण स्थान रखती हैं। मान्यता है कि चूड़ियों की खनक से नकारात्मकता दूर होती है।

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'जबरन विवाह' रोकने की ट्रेनिंग - फोटो : BBC
बिछिया 
हिंदू धर्म में एक विवाहित स्त्री के लिए पैरों में बिछिया पहनना अनिवार्य माना जाता है। शादी के समय पैरों में बिछियां भी पहनाई जाती हैं जो कांसे की बनी होती हैं। कुछ दिनों बाद इन्हें बदलकर चांदी से बनी बिछियां पहन ली जाती हैं। सुहाग के सामान में बिछिया भी बहुत महत्वपूर्ण मानी जाती हैं।

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gajra
गजरा
स्नानादि करने के पश्चात मांग में सिंदूर लगाने के साथ ही बालों का सजाने का प्रचलन बहुत पहले के समय से रहा है। जब भी सोलह श्रृंगार की बात आती है कोशों को संवारने और आलंकृत करने की बात जरूर आती है। पहले के समय में स्त्रियां अपने बालो में चंदन आदि की सुगंधित धूप देती थी जिसके बाद फूलों आदि से उन्हें सजाया जाता था। सलीके से बंधे और सजे हुए बाल सुहागन स्त्री का प्रतीक माना जाता था। मान्यता है कि बालों में गजरा लगाने से वैवाहिक जीवन में प्रेम की सुगंध से महकता है।

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दुल्हन का लाल जोड़ा (सांकेतिक तस्वीर) - फोटो : डेमो फोटो
लाल जोड़ा
हिंदू धर्म में लाल रंग को बहुत तरजीह दी जाती है क्योंकि यह शुभता और सुहाग की निशानी माना जाता है। हालांकि आजकर बाजार में कई डिजाइनर और अलग-अलग रंगों को जोड़े आने लगे हैं लेकिन ज्यादातर लड़कियां अपनी शादी में लाल रंग का जोड़ा ही पहनती हैं। देवी मां को भी लाल रंग की चुनरी ही चढ़ाई जाती है।

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tika - फोटो : social media
मांग टीका 
एक सुहागन स्त्री के लिए मांग टीका बहुत ही महत्वपूर्ण होता है। मांग के बीचो-बीचे पहना जाने वाला यह आभूषण चेहरे की आभा को तो बढ़ाता ही है साथ ही यह वैवाहिक जीवन के सही सा साध कर चलने का प्रतीक भी होता है।

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(सांकेतिक तस्वीर)
नथ
शादी के समय दुल्हन को सोने की नथ अवश्य पहनाई जाती है। नथ के बिना दुल्हन का श्रंगार अधूरा सा लगता है। सुहागन स्त्री के लिए नथ एक आवश्यक आभूषण माना गया है।

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(प्रतीकात्मक तस्वीर)
कर्णफूल
कर्णफूल यानी कानों में पहने जाने वाले कुंडल। आज के समय में वैसे तो कई तरह के डिजाइनों में आर्टिफिशियल कुंडल आने लगे हैं लेकिन आमतौर पर सोने, चांदी और कुंदन के बने हुए कर्णफूल धारण किए जाते हैं। यह महिलाओं की सुंदरता को तो बढ़ाते ही हैं साथ ही इनका संबंध स्वासथ्य से भी माना जाता है। कानों के पास कई एक्यूप्रेशर पॉइंट्स होते हैं कर्ण फूल पहनने से उनपर दबाव पड़ता है जो सेहत के लिए अच्छा रहता है। लोककिवदंती के अनुसार कर्णफूल धारण करना सदैव अच्छी बातों को सुनने के प्रतीक होता है।

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दुल्हन
बाजूबंद
हाथों के ऊपरी हिस्से में स्वर्ण, कुंदन या चांदी आदि धातुओं का बना हुआ बाजूबंद धारण किया जाता है। माना जाता है कि यह महिलाओं के शरीर में रक्तसंचार को बेहतर बनाने में सहायक होता है। इसके साथ ही धार्मिक मान्यता के अनुसार इसका संबंध धन रक्षा से माना गया है।

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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला
अंगूठी
शादी की रस्मों की शुरूआत वर-वधू के द्वारा एक दूसरे से अंगूठी पहनाकर की जाती है। यह प्यार और विश्वास की निशानी मानी जाती है। अंगूठी बाएं हाथ की अनामिका उंगली में पहनाई जाती है। इसके पीछे कारण माना जाता है कि अनामिका उंगली की नसे हृदय से लगती हैं। इससे पति-पत्नी के बीच प्रेम बना रहता है।

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(प्रतीकात्मक तस्वीर) - फोटो : Social Media
कमरबंद
कमर में चांदी, सोने की धातु के बने हुए रत्न जड़ित आभूषण स्त्री के शरीर की शोभा बढ़ाता है। महिलाओं के लिए चांदी की धातु का कमरबंद बहुत शुभ माना जाता है। यह अपने घर के प्रति स्त्री की जिम्मेदारयों का प्रतीक होता है।
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(प्रतीकात्मक तस्वीर)
पायल
पैरो चांदी की पायल शुभता और संपन्नता का प्रतीक होती है। बहू को घर की लक्ष्मी माना जाता है, इसलिए घर की संपन्नता बनाए रखने के लिए दुल्हन के श्रंगार में पायल आवश्यक मानी गई हैं। पायल सदैव चांदी की ही पहननी चाहिए कभी भी पायल सोने की नहीं पहनी जाती हैं।
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