सभी ग्रह एक राशि से दूसरी राशि में प्रवेश करते हैं। ग्रहों के राशि परिवर्तन का प्रभाव सभी राशियों पर पड़ता है। ग्रहों के एक राशि से दूसरी राशि में गोचर करने से कुछ राशि के जातकों पर शुभ तो कुछ पर अशुभ प्रभाव पड़ता है। अन्य ग्रहों की तरह शनि ग्रह भी राशि परिवर्तन करते हैं लेकिन ये एक राशि से दूसरी राशि में बहुत ही धीमी गति से भ्रमण करते हैं। इनके शनैः शनैः चलने के कारण इन्हें शनैश्चर भी कहा जाता है। ज्योतिष के अनुसार शनि एक ही राशि में लगभग ढाई वर्ष बिताते हैं। ये अपने स्थान से मार्गी होने के साथ ही वक्री (उल्टी चाल चलना) भी होते हैं। जब शनि का परिवर्तन होता है तो सबसे ज्यादा प्रभाव उन राशियों पर होता है, जिनपर शनि की साढ़ेसाती या ढैय्या चल रही हो।
इस समय शनि मकर राशि में विराजमान हैं और भ्रमण पर हैं। 23 मई को शनि मकर राशि में ही वक्री होंगे जो लगभग पूरे 141 दिनों तक उल्टी चाल चलेंगे। इसके बाद 11 अक्टूबर को शनि पुनः मार्गी (सीधी चाल) होंगे। शनि की वक्री चाल से पांच राशि वालों पर शनि की टेढ़ी नजर रहेगी इन राशि वालों को परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। इस दौरान इन राशि को जातको को सतर्क रहना होगा। जानते हैं कि कौन सी हैं वे राशियां।