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Shani Sade Sati: इस राशि के जातकों को मिलेगी साढ़ेसाती से मुक्ति, अंतिम चरण में हैं शनिदेव

Thu, 22 Apr 2021 02:35 PM IST
विनोद शुक्ला ज्योतिष डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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shanidev - फोटो : अमर उजाला
शनि की साढ़ेसाती का नाम आते ही लोग परेशान हो जाते हैं। ज्योतिशास्त्र के अनुसार जिन जातकों पर शनि की अशुभ छाया पड़ने लगती है उन्हें कई तरह की परेशानियां आने लगती है। शनि किसी एक राशि में साढ़े सात वर्षों तक रहते हैं। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार शनि सभी ग्रहों में सबसे मंद गति से चलने वाले ग्रह हैं। शनि की साढ़ेसाती के तीन चरण होते हैं। 
 
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शनि की साढ़ेसाती के पहले चरण में शनिदेव व्यक्ति को मानसिक कष्ट देते हैं। साढ़ेसाती के आरंभ होते ही इसका प्रथम प्रभाव 100 दिनों तक मनुष्य के मुख पर रहता है जो बेहद कष्ट कारक होता है। शनि के आरंभ का यह समय इतना पीड़ा देने वाला होता है कि व्यक्ति शनिदेव की साढ़ेसाती के नाम से घबराता है।
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शनि की साढ़ेसाती के दूसरे चरण में व्यक्ति को आर्थिक और शारीरिक परेशानियों से दो चार होना पड़ता है। इसके बाद शनि के साढ़ेसाती का अंतिम चरण होता है जिसमें धीरे-धीरे व्यक्ति की परेशानियां कम होने लगती है। अंतिम चरण में शनिदेव जातक पर मेहरबान होते है और उसको लाभ पहुंचाते हैं। इस समय धनु राशि के जातकों पर शनि की साढ़ेसाती का अंतिम चरण चल रहा है।

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धनु राशि वालों को कब मुक्ति मिलेगी शनि की साढ़ेसाती से
जब शनिदेव 29 अप्रैल 2022 को मकर राशि से कुंभ राशि में आ जाएंगे तब धनु राशि के जातकों से शनि कीसाढ़ेसाती खत्म हो जाएगी। शनि के साढ़ेसाती से मुक्ति मिलते ही आपको तमाम तरह की परेशानियों से निजात मिल जाएगी। हालांकि शनिदेव एक बार फिर से 12 जुलाई 2021 से 17 जनवरी 2023 तक वक्री चाल से चलते हुए मकर राशि में प्रवेश करेंगे। इस कारण से एक बार फिर से धनु राशि पर शनि की साढ़ेसाती चढ़ जाएगी। लेकिन इस बार शनि का प्रभाव पहले जैसा नहीं रहेगा। 17 जनवरी 2023 के बाद से धनु राशि के जातकों से शनि की साढ़ेसाती पूरी तरह से हट जाएगी।
 
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शनिदोष से मुक्ति के उपाय
शनिवार के दिन शनि महाराज को नीले रंग का अपराजिता फूल चढ़ाएं और काले रंग की बाती और तिल के तेल से दीप जलाएं। साथ ही शनिवार के दिन महाराज दशरथ का लिखा शनि स्तोत्र पढ़ें। शनिवार या अमावस्या के दिन सूर्यास्त के बाद पीपल के पेड़ के नीचे बैठकर शनिदेव का ध्यान करें। फिर एक दीपक में सरसों का तेल डालकर जलाएं।  शनि साढ़ेसाती के अशुभ प्रभावों से बचने के लिए शमी के वृक्ष की जड़ को काले कपड़े में पिरोकर शनिवार की शाम दाहिने हाथ में बांधे तथा ॐ प्रां प्रीं प्रौं स: शनिश्चराय नम: मंत्र का तीन माला जप करें।
 
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