फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

22 मई को शनि जयंती, उससे पहले जानें कहीं शनि आपकी राशि के लिए घातक तो नहीं !

Sat, 16 May 2020 07:53 AM IST
विनोद शुक्ला पं जयगोविंद शास्त्री, ज्योतिषाचार्य
विज्ञापन
1 of 5
शनि जयंती 2020: शनिदेव को प्रसन्न करने के लिए उन्हें तेल चढ़ाया जाता है।
22 मई को अमावस्या के दिन शनि जयंती मनाई जाएगी। इसी तिथि पर शनिदेव का जन्म हुआ था। इस दिन शनिदेव की पूजा करने से शनि दोष के प्रकोप से बचा जा सकता है। शनिदेव की साढ़ेसाती का नाम आते ही प्राणी किसी न किसी कारण से बेचैन होने लगते हैं कि ये साढ़ेसाती उनके लिए शुभ रहेगी या अशुभ। सत्य ये है कि इनकी साढ़ेसाती, ढैया और मारकेश दशा के रूप में गोचरकाल प्राणियों के अच्छे बुरे कर्मों के अनुसार उन्हें पुरस्कार तथा दंड देने के लिए ही आता है। प्राणी के कर्म अच्छे हैं तो अशुभ प्रभाव कम होगा और उसे अच्छे फल मिलेंगे किंतु, प्राणियों के कर्म ज्यादा बुरे हैं तो अशुभ प्रभाव अतिशय पीड़ादाई होगा। जानें शनि की साढ़ेसाती और उनके गोचर काल के प्रभाव के बारे में।

Shani Jayanti 2020: जानिए क्यों होती हैं शनिदेव पर तेल चढ़ाने से परेशानियां दूर

शनि साढ़े साती और ढैय्या से बचने के लिए शनि धाम कोकिलावन में कराएं तेल अभिषेक
विज्ञापन

2 of 5
शनि गोचर 2020
क्या है शनि की साढ़ेसाती-
अपने गोचरकाल में शनिदेव एक राशि पर ढाई वर्ष रहते हैं। जब यह आपकी जन्म राशि से पहले, दूसरे और बारहवें स्थानों में भ्रमण करते हैं तो यह काल शाढ़े सात वर्ष का रहता है और इसे ही साढ़ेसाती कहते हैं। ज्योतिष सूत्र के अनुसार द्वादशे जन्मगे राशौ द्वितीये च चनैश्चरः। सार्द्धानि सप्तवर्षाणि तदा दुःखैर्युतो भवेत्। शनि गोचर से बारहवें स्थान पर हों तो सिर पर, जन्म राशि पर हों तो हृदय पर और जन्म राशि से द्वितीय स्थान में हों तो पैर पर उतरती साढ़ेसाती के रूप में अपना प्रभाव डालते हैं। जन्म राशि से चतुर्थ और अष्टम स्थानों पर गोचर करते हुए शनि की ढैया रहती है, जो ढ़ाई वर्ष तक चलती है यह भी जातक के लिए अति कष्टकारी रहती है।

Shani Dev Jayanti 2020: 22 मई को शनि जयंती, जानिए इस दिन से जुड़ी विशेष बातें
विज्ञापन

3 of 5
शनिदेव
शनि का पाया विचार
शनि के राशि परिवर्तन के समय यदि चंद्रमा पहले, छठे और ग्यारहवें स्थान में हों तो सोने का पाया, दूसरे, पांचवें में तथा नवम स्थान में हो तो चांदी के पाये पर गोचर करते कहलाते हैं। जब शनिदेव तीसरे, सातवें एवं दसवें स्थान में हों तो तांबे का पाया और चौथे, आठवें तथा बारहवें स्थान में हो तो लोहे के पाए पर गोचर करते हुए माने गए हैं। सोने के पाए पर हों तो सुखों को देने वाले, चांदी के पाये पर गोचर करते हुए सौभाग्य बढ़ाने वाले और तांबे के पाए पर गोचर करते हुए शनि मध्यम फल देते हैं जबकि लोहे के पाए पर गोचर करते हुए शनि अनेक प्रकार के कष्ट एवं धन हानि करते हैं।

शनि का कौन सा पाया आपकी राशि पर डाल रहा असर, जानिए मेष से मीन राशि तक

4 of 5
shanidev
राशियों पर इनका प्रभाव
यदि शनि जातक के जन्म के समय मिथुन, कर्क, कन्या, धनु अथवा मीन राशि पर गोचर कर रहे हों तो मध्यम फलदाई होते हैं। मेष, सिंह और वृश्चिक पर गोचर करते हुए शनिदेव प्रतिकूल प्रभाव देने के लिए तत्पर रहते हैं। वृषभ तुला मकर और कुंभ राशि वालों के लिए शनि हमेशा लाभदायक रहते हैं इन राशियों में इनके गोचर करते समय जो जातक जन्म लेते हैं उनके जीवन में एक समय ऐसा अवश्य आता है जब ये जातक को रंक से राजा बना देते हैं। ऐसे व्यक्तियों के जीवन में आकस्मिकता का प्रभाव सर्वाधिक रहता है। लोग जनप्रिय होते हैं और छोटे स्तर से कार्य करके कामयाबी की बुलंदी तक पहुंचते हैं।

 
विज्ञापन
विज्ञापन

5 of 5
shani dev
शनि की साढेसाती अथवा मारकेश में सर्वाधिक पीड़ा पाने वाले कौन-
शनिदेव अपनी साढ़ेसाती या ढैय्या या मारकेश दशा में ऐसे लोगों को अत्यधिक कष्ट पहुंचाते हैं जो, विश्वासघाती, गुरुजनों से धोखा करने वाले, अति झूठ बोलने वाले, मित्रों से झूठ बोलकर उनको हानि पहुंचाने वाले, कृतघ्न, न्यायालय में झूठी गवाही देने वाले, भिखारियों को अपमानित करने वाले, अति स्वार्थी, धूर्तता या चालाकी से धन हड़पने वाले, बुजुर्गों को अपमानित करने वाले, रिश्वत लेने वाले, व्यभिचार में लिप्त तथा नशा करने वाले, चींटी, कुत्ते या कौवे को मारने वाले होते हैं।
 
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें