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Nakshatra In Astrology: क्या होते हैं नक्षत्र और चंद्रमा से क्या है इसका कनेक्शन?

Fri, 18 Jul 2025 03:53 PM IST
ज्योति मेहरा ज्योतिष डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

वैदिक ज्योतिष शास्त्र में कुल 27 नक्षत्रों का विवरण है, जिनमें प्रत्येक का अपना स्वामी ग्रह, गुण, प्रकृति और महत्व होता है। वैदिक ज्योतिष शास्त्र में ग्रह-नक्षत्रों की चाल का विशेष महत्व माना जाता है। ग्रह-नक्षत्रों की चाल का प्रभाव व्यक्ति के जीवन पर भी पड़ता है। 
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क्या होते हैं नक्षत्र? - फोटो : adobe stock
Nakshatra वैदिक ज्योतिष शास्त्र में ग्रह-नक्षत्रों की चाल का विशेष महत्व माना जाता है। ग्रह-नक्षत्रों की चाल का प्रभाव व्यक्ति के जीवन पर भी पड़ता है। ग्रहों की चाल से जीवन पर शुभ-अशुभ प्रभाव पड़ते हैं और नक्षत्रों की गणना से ही व्यक्ति के स्वभाव और जीवनशैली के बारे में भी पता चलता है। वैदिक ज्योतिष शास्त्र में कुल 27 नक्षत्रों का विवरण है, जिनमें प्रत्येक का अपना स्वामी ग्रह, गुण, प्रकृति और महत्व होता है।
 
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क्या होते हैं नक्षत्र? - फोटो : adobe stock
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार इन 27 नक्षत्रों को दक्ष प्रजापति की पुत्रियां माना गया है। वैदिक ज्योतिष में ज्योतिषीय गणना के लिए कुल 12 राशियां होती हैं। आकाश को 27 नक्षत्रों में बांटा गया है और कुल 9 ग्रहों को इन 27 नक्षत्रों में बांटा गया है। इसमें हर एक ग्रह 3 नक्षत्रों के स्वामी होते हैं।
 
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क्या होते हैं नक्षत्र? - फोटो : adobe stock
नक्षत्र क्या होते हैं?
नक्षत्र आकाश मंडल के वो भाग हैं जिनसे चंद्रमा अपनी गति के दौरान गुजरता है। पूरे आकाश को 360 अंश में विभाजित किया गया है और इसे 27 भागों में बांटकर हर नक्षत्र को 13 अंश 20 मिनट का स्थान दिया गया है। ये 27 नक्षत्र हैं: अश्विनी, भरणी, कृत्तिका, रोहिणी, मृगशिरा, आर्द्रा, पुनर्वसु, पुष्य, आश्लेषा, मघा, पूर्वा फाल्गुनी, उत्तर फाल्गुनी, हस्त, चित्रा, स्वाति, विशाखा, अनुराधा, ज्येष्ठा, मूल, पूर्वाषाढ़ा, उत्तराषाढ़ा, श्रवण, धनिष्ठा, शतभिषा, पूर्वा भाद्रपद, उत्तर भाद्रपद और रेवती।

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चंद्रमा से नक्षत्रों का क्या संबंध है? - फोटो : Freepik
चंद्रमा से नक्षत्रों का क्या संबंध है?
चंद्रमा का सीधा संबंध नक्षत्रों से होता है। दरअसल चंद्रमा हर रोज़ एक नक्षत्र में भ्रमण करता है और लगभग 27.3 दिनों में वह सभी 27 नक्षत्रों की परिक्रमा पूरी कर लेता है। इसी आधार पर चंद्रमास की गणना की जाती है, जो लगभग 29.5 दिन का होता है। जिस नक्षत्र में व्यक्ति का जन्म होता है, उसे जन्म नक्षत्र कहा जाता है और यह उसकी मानसिकता, स्वभाव, सोच, और जीवन के कई पहलुओं को प्रभावित करता है।
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नक्षत्र और ज्योतिष का संबंध - फोटो : Amar Ujala
नक्षत्र और ज्योतिष का संबंध
किसी दिन का शुभ-अशुभ फल नक्षत्रों पर निर्भर करता है। विवाह, यात्रा, गृह प्रवेश, पूजा-पाठ जैसे कार्यों के लिए नक्षत्रों की स्थिति को देखकर ही मुहूर्त तय किया जाता है। नक्षत्रों का स्वामी ग्रह और चंद्रमा की स्थिति मिलकर यह तय करते हैं कि व्यक्ति के जीवन में कौन से शुभ या अशुभ योग बनेंगे।



डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): ये लेख लोक मान्यताओं पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। 
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