वैदिक ज्योतिष शास्त्र के अनुसार सूर्य हर माह अपनी राशि बदलते हैं। जिसे सूर्य संक्रांति के नाम से जाना जाता है। सूर्यदेव आत्मा के कारक ग्रह कहे जाते हैं। 16 जुलाई को सूर्यदेव कर्क राशि में प्रवेश कर चुके हैं। इस राशि में सूर्यदेव 16 अगस्त तक रहने वाले हैं। सूर्य के राशि परिवर्तन के कारण और शनि के पहले से अपनी स्वयं की राशि कुंभ में विराजमान होने से षडाष्टक राजयोग का निर्माण हुआ है। वैदिक ज्योतिष शास्त्र के अनुसार जब सूर्य और शनि एक दूसरे से छठवें और आठवें भाव में मौजूद होते हैं षडाष्टक योग बनता है। शनि-सूर्य के संयोग से बना षडाष्टक योग कुछ राशि के जातकों के जीवन में प्रतिकूल प्रभाव साबित हो सकता है। कार्यों में परेशानियां और अशुभ परिणाम देखने को मिल सकते हैं। आइए जानते हैं षडाष्टक राजयोग के बनने से किन-किन राशियों के लिए अच्छा नहीं है।