Lakshmi Narayan Rajyog: वैदिक ज्योतिष शास्त्र के अनुसार ग्रह एक निश्चित अंतराल पर राशि परिवर्तन करते हैं। इसके अलावा दो या दो से अधिक ग्रह किसी एक ही राशि में जब गोचर करते हैं तब ग्रहों की युति भी बनती है। सुख, वैभव, प्रेम और आकर्षण के कारक ग्रह माने जाने वाला शुक्र 13 अक्तूबर तक अपनी मूल त्रिकोण राशि तुला में रहने वाले हैं, जहां पर बुध भी इसी राशि में आने वाले हैं। बुध 10 अक्तूबर को सुबह 11 बजकर 25 मिनट पर तुला राशि में आ जाएंगे। इस तरह के बुध और शुक्र की युति होने से लक्ष्मी नारायण योग का निर्माण होगा। वैदिक ज्योतिष शास्त्र के अनुसार भोग-विलास के कारक ग्रह शुक्र एक निश्चित अवधि के बाद अपनी राशि परिवर्तन करते हैं। जिसका प्रभाव सभी राशियों के जातकों पर पड़ता है। इसके अलावा शुक्र ग्रह समय-समय पर अन्य ग्रहों के साथ युति भी करते हैं जिससे कई योग को निर्माण होता है। वहीं ग्रहों के राजकुमार बुध वाणी, बुद्धि, व्यापार आदि के कारक माने जाते हैं। ऐसे में बुध-शुक्र की युति से बना लक्ष्मी नारायण योग कई राशि वालों को अच्छा लाभ दिला सकते हैं। आइए जानते हैं इस योग से किन-किन राशि की किस्मत में बदलाव देखने को मिल सकता है।