Saturn Retrograde 2025: वैदिक ज्योतिष शास्त्र में सभी ग्रहों में शनि ग्रह का विशेष महत्व होता है। शनि को ज्योतिष में कर्मफलदाता और न्यायाधिकारी का दर्जा प्राप्त है। सभी ग्रहों में शनि एक मात्र ऐसे ग्रह हैं जो सबसे मंद गति से चलले हैं, जिसके कारण इनका ज्योतिष में महत्व बहुत है। शनि एक राशि में करीबी ढाई वर्षों तक रहते हैं फिर इसके बाद दूसरी राशि में गोचर करते हैं। इस तरह से शनि राशिचक्र का एक चक्कर पूरा करने में 30 वर्षों का समय लेते हैं। इस साल शनि का गोचर कुंभ से मीन राशि में ढाई साल के बाद हुआ है और शनि गुरु की राशि मीन में करीब 30 बाद आएं हैं। शनि के मीन राशि में गोचर करने के बाद अब कुछ दिनों के बाद शनि वक्री होने वाले हैं। शनि के वक्री होने का असर सभी 12 राशियों के जातकों के ऊपर देखने को मिलेगा। कुछ राशियों पर अच्छा तो कुछ पर बुरा प्रभाव देखने को मिल सकता है। वैदिक पंचांग के अनुसार कर्मफलदाता शनि 13 जुलाई को सुबह 09 बजकर 36 मिनट पर मीन राशि में वक्री हो जाएंगे। शनि वक्री अवस्था में 138 दिनों तक रहेंगे। शनि के 138 दिनों तक वक्री अवस्था में रहने से कारण कुछ राशि वालों को सावधान रहने की जरूरत है। आइए जानते हैं शनि की मीन राशि में उल्टी चाल से किन-किन राशि वालों को सावधान रहने की जरूरत होगी।