फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Shani Sade Sati: व्यक्ति के जीवन में कब और कितनी बार आती है शनि की साढ़ेसाती

Sat, 08 Jul 2023 01:18 PM IST
विनोद शुक्ला ज्योतिष डेस्क, अमर उजाला
विज्ञापन
1 of 7
shani sade sati 2023 - फोटो : अमर उजाला
शनि की चाल और दशा से हर एक व्यक्ति के जीवन पर गहरा प्रभाव पड़ता है। शनि सभी ग्रहों में सबसे धीमी गति से चलने वाले ग्रह होते हैं। शनि किसी एक राशि में करीब ढ़ाई वर्षों तक रहते हैं। इस तरह से शनि किसी राशि में दोबारा से आने के लिए करीब 30 वर्षों का समय लेते हैं। शनि की साढ़ेसाती और ढैय्या चलने पर व्यक्ति के जीवन में कई तरह के परिवर्तन देखने को मिलते हैं। आइए जानते हैं शनि की साढ़ेसाती किसी व्यक्ति के जीवन में कितनी और कब-कब आती है।
विज्ञापन

2 of 7
Shani Amavasya - फोटो : iStock
वैदिक ज्योतिष शास्त्र के अनुसार शनि की साढ़ेसाती के दौरान व्यक्ति को कई तरह आर्थिक, मानसिक और शारीरिक परेशानियों जूझना पड़ता है। शनि की साढ़ेसाती किसी के ऊपर लगभग 7 वर्षों तक चलती है। शनि जब भी ढाई वर्षों के बाद किसी राशि में गोचर करते हैं तब उस राशि के ऊपर शनि की साढ़ेसाती तो लगती ही साथ ही उस राशि के एक राशि आगे और एक राशि पीछे पर साढ़ेसाती शुरू हो जाती है। 
विज्ञापन

3 of 7
Shani Dev - फोटो : अमर उजाला
राशि चक्र में कुल 12 राशियां होती हैं। शनि एक राशि में करीब ढाई वर्षों तक रहते हैं। ऐसे में सभी 12 राशियों का चक्कर लगाने में शनि को 30 साल का समय लग जाता है। इस तरह से किसी व्यक्ति के जीवन में शनि की साढ़ेसाती 3 बार जरूर आती है। हर 30 साल बाद व्यक्ति को साढ़ेसाती का सामना करना पड़ता है। 

4 of 7
Shani Dev - फोटो : istock
शनि की साढ़ेसाती की पूरी अवधि को ढाई-ढाई साल के तीन चरणों में बांटा जाता है। शनि की साढ़ेसाती का पहला चरण जिसमें व्यक्ति को आर्थिक परेशानियों से जूझना पड़ता है, दूसरा चरण में व्यक्ति को अपने कार्यक्षेत्र और 
पारिवारिक क्षेत्र में परेशानियां मिलती है और तीसरे चरण में व्यक्ति की सेहत पर असर पड़ता है। 
यह भी पढ़ें-
विज्ञापन

5 of 7
shanidev
शनिदेव इस साल कुंभ राशि की यात्रा में हैं ऐसे में 2023 में मकर, कुंभ और मीन राशि वालों के ऊपर शनि की साढ़ेसाती का असर चल रहा है। 

विज्ञापन

6 of 7
ShaniDev - फोटो : अमर उजाला
जब आपकी जन्म राशि यानी चन्द्रमा से बारहवें ,लग्न और दूसरे भाव में शनि संचरण करते हैं तो उसे साढ़ेसाती कहा जाता है। साढ़े सात साल के इस संचरण को आम भाषा में साढ़ेसाती कहा गया है। आम तौर पर यह कष्टकारक समय होता है लेकिन कुंडली में अगर शनि योगकारक है तो जातक को उतना कष्ट नहीं होता। 
विज्ञापन
विज्ञापन

7 of 7
shani dev
जब शनि गोचर काल में राशि से चौथे या आठवें भाव में विराजमान हों तो उस स्थिति में शनि की ढैय्या कहलाती है। दरअसल चौथे भाव से मानसिक सुख और आठवें भाव से दुर्घटना का विचार किया जाता है तो जब भी आपकी चंद्र राशि से शनि इन भाव में गोचर करता है तो उसे शनि की ढैया कहा जाता है। 
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें