शनि की साढ़ेसाती को ही बड़ी पनौती कहा जाता है।
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शनि देव से पनौती का संबंध
ज्योतिष शास्त्र में पनौती शब्द का अर्थ सामान्य रूप से बुरी किस्मत या कठिनाइयों से जोड़ा जाता है, लेकिन इसका वास्तविक संबंध शनि देव से है। शनि की स्थिति और उसकी चाल का असर सीधे किसी व्यक्ति के जीवन पर पड़ता है। ज्योतिष में शनि की सबसे जानी-पहचानी अवस्था होती है साढ़े साती। जब शनि किसी राशि में रहते हैं, तो उसका प्रभाव न केवल उस राशि पर, बल्कि उससे अगली और पिछली राशि पर भी दिखाई देता है। शनि किसी राशि में लगभग 2.5 वर्ष तक ठहरते हैं, इसलिए किसी जातक पर साढ़े साती लगने पर इसका प्रभाव लगभग 7 साल तक महसूस होता है।
शनि की साढ़ेसाती को ही बड़ी पनौती कहा जाता है। इसे जीवन की बड़ी चुनौती माना जाता है क्योंकि इस दौरान व्यक्ति को कई कठिनाइयों और संघर्षों का सामना करना पड़ सकता है। वहीं, छोटी पनौती शनि की ढैय्या कहलाती है। यह उस समय लगती है जब शनि जातक की जन्म राशि से चौथे और अष्टम भाव में आते हैं। छोटी पनौती का प्रभाव लगभग ढाई साल तक रहता है और इसे जीवन में छोटे-मोटे संघर्ष और बाधाओं के रूप में देखा जाता है। सरल शब्दों में कहें तो शनि की यह पनौती जीवन में संघर्ष, सीख और आत्मसंयम का अवसर भी देती है, साथ ही यह चेतावनी भी है कि इस अवधि में सावधानी और धैर्य आवश्यक है।