वैदिक ज्योतिष में 9 ग्रहों के बारे में विस्तार से बताया गया है। हर एक ग्रह का अपना विशेष महत्व होता है। ग्रहों का विशेष प्रभाव व्यक्ति के जीवन पर पड़ता है। ग्रहों के शुभ-अशुभ प्रभाव से व्यक्ति की आदतों पर नियंत्रण रहता है।
ज्योतिष शास्त्र में माना जाता है कि मनुष्य का स्वभाव, उसके कर्म और उसकी आदतें सीधे तौर पर ग्रहों की स्थिति और उनके फलादेश को प्रभावित करती हैं। ग्रह केवल जन्मकुंडली में ही अपना प्रभाव नहीं दिखाते, बल्कि व्यक्ति के आचरण से भी सक्रिय या निष्क्रिय होते हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार जब मनुष्य अपनी आदतों पर नियंत्रण नहीं रख पाता, तब वे आदतें उसके ग्रहों को दुर्बल कर जीवन में बाधाएं बढ़ा देती हैं।
ज्योतिष में सूर्य ग्रह का महत्व
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सूर्य
धार्मिक ग्रंथों में सूर्य को आत्मा, तेज और सम्मान का कारक माना गया है। यदि व्यक्ति में अत्यधिक अहंकार हो, वह माता-पिता, बुजुर्गों या गुरुजनों का सम्मान न करें, तो सूर्य ग्रह कमजोर होता है। सूर्य के कमजोर होने से प्रतिष्ठा हानि, नेतृत्व क्षमता में कमी और स्वास्थ्य समस्याएं प्रकट होती हैं। विनम्रता और सेवा सूर्य को मजबूत करती है।
चंद्रमा
चंद्रमा मन और भावनाओं का प्रतीक है। जो लोग अत्यधिक चिंता करते हैं, हर वक्त नकारात्मक सोचते हैं या क्रोध में निर्णय लेते हैं, वे चंद्रमा को कमजोर करते हैं। इसके प्रभाव से मानसिक अस्थिरता, घर-परिवार में तनाव और नींद से जुड़ी समस्याएं बढ़ती हैं। शांत रहने की आदत और जलदान से चंद्रमा संतुलित होता है।
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ज्योतिष में मंगल ग्रह को सेनापति का दर्जा प्राप्त है
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मंगल
मंगल साहस और ऊर्जा का ग्रह है। यदि किसी व्यक्ति में अत्यधिक क्रोध, झगड़ा करने की प्रवृत्ति, हिंसा या जोखिम उठाने की जल्दबाजी हो, तो मंगल ग्रह अशांत हो जाता है। इसके चलते दुर्घटनाएँ, कोर्ट-कचहरी के मामले और रक्त-संबंधी समस्याएं निर्माण होती हैं। संयम और अनुशासन मंगल को शुभ बनाते हैं।
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बुध ग्रह का प्रभाव
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बुध
बुध बुद्धि और वाणी का कारक है। जो लोग आदतन झूठ बोलते हैं, दूसरों को गलत सलाह देते हैं या गपशप में लिप्त रहते हैं, उनका बुध ग्रह खराब होने लगता है। इसके दुष्प्रभाव से निर्णय क्षमता घटती है और व्यापार में नुकसान होता है। सत्य बोलने और विद्या का सम्मान करने से बुध मजबूत रहता है।
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वैदिक ज्योतिष में गुरु ग्रह
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गुरु
गुरु धार्मिकता, ज्ञान और सदाचार का प्रतीक है। यदि व्यक्ति अत्यधिक लोभ रखता है, उपकार का मूल्य नहीं समझता या गुरुजनों का अनादर करता है, तो बृहस्पति दूषित हो जाता है। इसके प्रभाव से जीवन में रुकावटें, आर्थिक अस्थिरता और विवाह संबंधी समस्याएं अधिक होती हैं। दान, आदर और सदाचरण गुरु को शुभ बनाते हैं।
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शुक्र राशि परिवर्तन
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शुक्र
शास्त्रों के अनुसार जो लोग अनियंत्रित भोगविलास में जीवन बिताते हैं, शराब या व्यसनों में डूबे रहते हैं, उनका शुक्र ग्रह कमजोर होता है। इससे स्वास्थ्य, दांपत्य जीवन और आर्थिक स्थिरता प्रभावित होती है। संयम, स्वच्छता और कला का सम्मान शुक्र को संतुलित करता है।
आमतौर पर धार्मिक ग्रंथों में शनि महाराज के प्रभाव और उनकी महिमा का उल्लेख देखने को मिलता है। कहा जात
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शनि
शनि कर्म, न्याय और अनुशासन का देवता है। आलस्य, काम टालने की आदत, किसी का हक छीनना या छल-कपट करना शनि को कुपित कर देता है। इसके परिणामस्वरूप जीवन में बाधाएं, नौकरी में समस्याएं और संघर्ष बढ़ जाते हैं। ईमानदारी और मेहनत शनि को प्रसन्न करती है। इन आदतों से बचकर व्यक्ति ग्रहों को शुभ बनाता है और जीवन में सुख-समृद्धि प्राप्त करता है।