17 जून से मंगल अपनी ही राशि वृश्चिक में उलटी चाल चलेंगे। वृश्चिक राशि में इन दिनों शनि भी मौजूद हैं ऐसे में शनि मंगल मिलकर 'द्वन्दयोग' बना रहे हैं। मंगल के उलटी चाल चलते हुए तुला में आने से कई व्यक्तियों की गोचर कुंडलियों में 'रूचक' एवं द्वन्दयोग समाप्त हो जाएगा। 30 जून को ब्रह्ममुहूर्त में मंगल मार्गी होंगे और 12 जुलाई को दोपहर 02 बजकर 02 मिनट पर वापस अपनी राशि वृश्चिक में प्रवेश कर फिर 'रूचक' और शनि के साथ द्वन्दयोग' बनाएंगे।
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अब उल्टी चाल में चलेंगे मंगल, इन चार राशि के लिए हुए अमंगलकारी
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मंगल
ज्योतिषशास्त्र के अनुसार शनि-मंगल अशुभ फलदायी होते हैं लेकिन छठे, आठवें एवं ग्यारहवें घर में क्रमशः छोटे भाइयों, ननिहाल पक्ष और बड़े भाइयों के स्वास्थ्य-सुख छोड़कर इन भावों के अन्य फल पूर्णता के साथ देते हैं। मंगल युवा, चुस्त, बलिष्ठ, छोटे कद वाला, रक्त-गौर वर्ण, पित्त प्रकृति, शूरवीर, उग्र, रक्त नेत्र वाला, और गौरवशाली ग्रह है।
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शनि
इसके विपरीत शनि दुर्बल, लंबा शरीर, रूखे बाल, मोटे दांत और नाखून वाला, दुष्ट, क्रोधी, आलसी और वायु प्रकृति वाला ग्रह है। कुंडली में बलवान शनि सुखकारी तथा निर्बल या पीड़ित शनि कष्टकारक और दुखदायी होता है। मंगल का प्रभाव शरीर के खून में रहता है, इसलिए कुंडली में इनकी अशुभता से रक्तविकार, लो या हाई ब्लड प्रेशर, ब्लडकैंसर, न्यूरोलोजिकल समस्याएं, एवं विषाणु जनित गुप्त रोगों की समस्याएं होती है अतः वर्तमान गोचर अथवा जन्मकुंडली के लग्न गोचर से भी इनकी शुभता-अशुभता का विचार किया जाता है।
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राशिचक्र
- फोटो : zodiac sign
मेष, कर्क, तुला, और वृश्चिक राशि वालों के लिए मंगल की यह चाल कष्टकारी रह सकती हैं, इन्हें सावधान रहना होगा। किसी भी तरह के अनुबंध आदि पर ध्यान पूर्वक हस्ताक्षर करें। वाहन सावधानी पूर्वक चलाएं। बाकी राशियों के फल अपेक्षाकृत सामान्य रहेगा। व्यापार के क्षेत्र में मंगल ज्वलनशील पदार्थों, मेटल्स, रियलस्टेट, इंफ्रा, सीमेंट, ठोस पदार्थों वाली वस्तुओं के कारक हैं अतः इनका वक्री होना इन वस्तुओं के सेक्टर्स पर अधिक प्रभाव डालेगा।