भगवान शिव
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होलिका दहन और राहु-केतु का प्रभाव
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार होलिका दहन के समय राहु ग्रह की उग्र स्थिति बनी रहती है। इसके पीछे एक पौराणिक कथा जुड़ी हुई है। कहा जाता है कि माता पार्वती भगवान शिव से विवाह करना चाहती थीं, लेकिन शिव जी ध्यान और तपस्या में लीन थे। माता पार्वती के प्रयासों के बावजूद, शिव जी का ध्यान भंग नहीं हुआ। तब कामदेव ने अपना पुष्प बाण चलाकर भगवान शिव की तपस्या भंग करने की कोशिश की। इस पर भगवान शिव क्रोधित हो गए और उन्होंने अपनी तीसरी आंख खोलकर कामदेव को भस्म कर दिया।