वैदिक ज्योतिष में ग्रहों की चाल का विशेष महत्व होता है। ग्रहों की चाल से ही शुभ और अशुभ दोनों ही तरह के योग बनते हैं। वैदिक ज्योतिष शास्त्र के अनुसार ग्रह समय-समय पर अपनी चाल में बदलाव करते हैं। जिस वजह से इसका सकारात्मक और नकारात्मक दोनों ही तरह का प्रभाव सभी 12 राशियों के जातकों पर पड़ता है। अगस्त माह में एक साथ शनि, सूर्य और राहु मिलकर अशुभ योग का निर्माण करेंगे। दरअसल अगस्त माह में शनि और सूर्य अपनी-अपनी राशि में रहते हुए समसप्तक योग बनाएंगे। वैदिक ज्योतिष शास्त्र के अनुसार शनि और सूर्य की आपस में शत्रुता का भाव रहता है। वहीं इसके अलावा सूर्य और राहु की खास पोजिशन से षडाष्टक योग भी बनेगा। इस तरह से सूर्य का दो अशुभ ग्रहों के साथ मिलकर एक खतरनाक योग का निर्माण होगा। अगस्त माह में एक साथ समसप्तक और षडाष्टक योग बनने से कुछ राशि वालों को बहुत ही संभलकर रहना होगा।
दरअसल ज्योतिष शास्त्र की गणना के अनुसार आत्मा के कारक ग्रह सूर्य 16 अगस्त को कर्क राशि की अपनी यात्रा को समाप्त करते हुए अपनी स्वराशि सिंह में प्रवेश कर जाएंगे। इस तरह से सूर्य और शनि दोनों ही अपनी स्वराशि में मौजूद होंगे। और एक दूसरे से 180 डिग्री पर रहेंगे। ज्योतिष की भाषा में सूर्य और शनि दोनों ही एक दूसरे से 7वें भाव में संचरण करते हुए द्दष्टि डालते हुए समसप्तक योग का निर्माण करेंगे। इस तरह से सूर्य-शनि से समसप्तक योग बनेगा। वहीं दूसरी तरफ सूर्य और राहु दोनों ही एक दूसरे के छठे और आठवें भाव में रहते हुए षडाष्टक योग का निर्माण करेंगे। ये दोनों ही योग बहुत ही अशुभ माने जाते हैं।