पुष्य नक्षत्र में मंगल गोचर
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मंगल पुष्य योग का निर्माण
वैदिक ज्योतिष में मंगल ग्रह को अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। इसे भूमिपुत्र और ग्रहों का सेनापति भी कहा जाता है। मंगल ऊर्जा, उत्साह, साहस, आत्मबल और शारीरिक शक्ति का प्रतीक है। मंगल की खगोलीय स्थिति का ज्योतिषीय दृष्टिकोण से हमेशा विशेष महत्व रहा है। जब भी मंगल ग्रह की राशि या नक्षत्र में परिवर्तन होता है, यह सभी राशियों पर प्रभाव डालता है। ज्योतिषीय गणना के अनुसार, 12 अप्रैल 2025 को सुबह 6:32 बजे मंगल ग्रह शनि के स्वामित्व वाले नक्षत्र पुष्य में प्रवेश करेगा, जिससे ‘मंगल पुष्य योग’ का निर्माण होगा।