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कुंभ राशि - इस राशि के जातकों के लिए केतु का गोचर अष्टम भाव से होने जा रहा है। इस भाव से दुर्घटना और आकस्मिक नुकसान का बोध होता है। इस भाव में विराजमान केतु की दृष्टि द्वादश,द्वितीय और चतुर्थ भाव पर होगी। अष्टम में केतु का गोचर जातक को स्त्री विरोधी बना देता है। जातक की बुद्धि उसके मित्रों के द्वारा संचालित होने लगती है। इस भाव में केतु के गोचर के कारण आप अपनी पत्नी और ससुराल पक्ष से विवाद कर सकते हैं। अचानक से धन की कोई बड़ी हानि संभव है। इस समय आपको कोशिश करनी होगी कि कुटुंब में आपके कारण कोई पारिवारिक कलह उत्पन्न नहीं हो। गुप्त साधना और ज्योतिष विद्या में रत जातकों को सफलता मिलेगी। इस समय आपकी वाणी के प्रभाव से आप किसी बड़े कार्य को सिद्ध करके दिखाएंगे।