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Jyeshtha Maah 2025: इन 3 ग्रहों को करें प्रसन्न, मिल सकता है आर्थिक लाभ और समाज में मान-सम्मान

Tue, 20 May 2025 05:26 PM IST
श्वेता सिंह ज्योतिष डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

Importance of Jyestha Month: हिंदू धर्म में ज्येष्ठ माह का व्रत अत्यंत पवित्र माना जाता है, इस दौरान शनि, राहु और केतु की पूजा करने से आर्थिक तंगी दूर हो सकती है। इन ग्रहों की कृपा से व्यक्ति को जीवन में समृद्धि और मानसिक शांति प्राप्त होती है।
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Shani Rahu Ketu Puja - फोटो : adobe stock
Shani Rahu Ketu Puja: सनातन धर्म में ज्येष्ठ मास को अत्यंत शुभ और फलदायी महीनों में से एक माना गया है। यह समय विशेष रूप से आध्यात्मिक साधना, व्रत-उपवास और ग्रहों की कृपा प्राप्त करने के लिए उत्तम होता है। माना जाता है कि इस माह में की गई पूजा-पाठ, तप और उपायों का फल कई गुना अधिक मिलता है। जीवन में सुख, समृद्धि और सफलता की प्राप्ति के लिए लोग इस समय विशेष प्रयास करते हैं ताकि बाधाओं से मुक्ति मिल सके और सौभाग्य में वृद्धि हो।
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विशेष रूप से जिन जातकों के कार्य बार-बार रुक जाते हैं या सफलता उनके निकट आकर दूर हो जाती है, उनके लिए ज्येष्ठ माह में शनि, राहु और केतु की पूजा अत्यंत लाभकारी मानी जाती है। यह भी मान्यता है कि इन तीन ग्रहों की विशेष आराधना से न केवल आर्थिक तंगी दूर होती है, बल्कि समाज में मान-सम्मान और स्थिरता भी प्राप्त होती है। ऐसे में आइए जानते हैं कि ज्येष्ठ मास में इन ग्रहों की पूजा का क्या महत्व है और किन उपायों से शुभ फलों की प्राप्ति की जा सकती है।
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Shani Rahu Ketu Puja - फोटो : adobe
शनि देव की पूजा से मिलेगी बाधाओं से मुक्ति
ज्येष्ठ माह में शनि देव की पूजा विशेष रूप से फलदायी मानी जाती है, क्योंकि इसी माह शनि जयंती भी आती है। खासकर जिन लोगों की कुंडली में साढ़ेसाती या ढैय्या का प्रभाव चल रहा है, उन्हें इस माह में शनि देव की पूजा विधिपूर्वक करनी चाहिए। इससे जीवन में आ रही रुकावटें दूर हो सकती हैं और परेशानियों से राहत मिल सकती है। शनिवार के दिन प्रातःकाल स्नान कर नीले वस्त्र धारण करें। शनि देव की प्रतिमा को पंचामृत से स्नान कराएं, फिर शुद्ध जल से अभिषेक करें। इसके बाद सरसों के तेल से अभिषेक करना भी शुभ माना जाता है। शनि देव को काले तिल, काले चने, गुड़ से बने पकवान या इमरती का भोग अर्पित करें। पूजा के समय "ॐ शं शनैश्चराय नमः" और "ॐ प्रां प्रीं प्रौं सः शनैश्चराय नमः" मंत्रों का जाप करें और अंत में शनि आरती करें।
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Shani Rahu Ketu Puja - फोटो : adobe stock
राहु की पूजा से दूर होंगे मानसिक कष्ट और भ्रम
ज्येष्ठ माह में शनि पूजा के साथ-साथ राहु की पूजा भी करना चाहिए, क्योंकि यह भी छाया ग्रह है और इसके प्रभाव से जीवन में अचानक उतार-चढ़ाव आते हैं। सबसे पहले शनि देव की पूजा करें और फिर राहु की आराधना शुरू करें। राहु को तिल, सरसों और मिश्री अर्पित करें, फिर उनकी परिक्रमा करें। इसके बाद "ॐ राहवे नमः" या "ॐ भ्रां भ्रीं भ्रौं सः राहवे नमः" जैसे बीज मंत्रों का जाप करें। काले चने अर्पित करना भी शुभ माना जाता है। राहु की पूजा से भ्रम, मानसिक अशांति और नकारात्मक सोच से मुक्ति मिलती है।
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Shani Rahu Ketu Puja - फोटो : adobe stock
केतु की पूजा से मिल सकता है आध्यात्मिक बल और आर्थिक लाभ
राहु के बाद केतु की पूजा करना चाहिए, क्योंकि यह भी एक छाया ग्रह है जो अचानक घटनाओं और आध्यात्मिक अनुभवों से जुड़ा होता है। केतु की पूजा में उन्हें काले तिल, काले चने और काले कपड़े का टुकड़ा अर्पित करें। पूजा के दौरान  "ॐ केतवे नमः" या "ॐ स्रां स्रीं स्रौं सः केतवे नमः" मंत्रों का जाप करें। मान्यता है कि केतु की पूजा करने से आर्थिक परेशानियों से मुक्ति मिलती है और व्यक्ति को निर्णय क्षमता व मानसिक स्थिरता प्राप्त होती है।



डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।
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