ज्योतिष शास्त्र में दो ग्रहों का राशि परिवर्तन और इन ग्रहों का वक्री या मार्गी होना बहुत ही महत्वपूर्ण माना गया है। 20 जून को सबसे बड़े और शुभ गुरु ग्रह कुंभ राशि में उल्टी चाल से चलने वाले हैं। कुंभ राशि शनि की राशि है,जहां पर ये 120 दिनों तक वक्री चाल में रहेंगे। फिर इसके बाद 18 अक्तूबर 2021 को एक बार फिर से मार्गी हो जाएंगे। वहीं 14 सितंबर को गुरु ग्रह शनि की ही राशि मकर में गोचर करते हुए मार्गी हो जाएंगे। गुरु के मकर राशि में मार्गी होने से एक बार फिर से शनि के साथ युति में रहेंगे। 21 नवंबर 2021 को एक बार फिर से ये कुंभ राशि में आ जाएंगे। वैदिक ज्योतिष के अनुसार गुरु ग्रह ज्ञान, बुद्धि, विवेक, वैवाहिक जीवन, भाग्य और सुख का कारक है। कुण्डली में गुरु का वक्री होना जातक को कई तरह के शुभ फल की प्राप्ति करवाते हैं। सभी ग्रहों में यही ग्रह है जो वक्री अवस्था में सबसे ज्यादा शुभ फल प्रदान करते हैं।
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guru ka rashi parivartan
- फोटो : अमर उजाला
ज्योतिष में गुरु
देवगुरु बृहस्पति को दो राशियों पर अधिपत्य प्राप्त है। पहली राशि धनु और दूसरी मीन राशि है। गुरु कर्क राशि में उच्च के और मकर राशि में नीच के माने गए हैं। ऐसे में जब भी गुरु ग्रह अपनी राशि बदलते हैं या चाल में वक्री या मार्गी होते हैं। तब कर्क राशि वालों के लिए सकारात्मक और मकर राशि पर नकारात्मक प्रभाव छोड़ते हैं।
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गुरु का राशि परिवर्तन
ज्योतिष में गुरु ग्रह
बृहस्पति को ग्रहों और देवी-देवताओं का गुरु माना गया है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार सभी ग्रहों में गुरु शुभ फल देने वाले माने गये हैं। देवगुरु बृहस्पति ग्रह एक राशि में लगभग एक वर्ष रहते हैं और 12 राशियों का चक्र पूरा करने में लगभग 13 वर्ष का समय लेते हैं। गुरु ग्रह चार महीने वक्री चाल से राशियों की चक्कर काटते हैं। इन्हें धनु और मीन राशि पर आधिपत्य प्राप्त है यानी धनु और मीन राशि के ये स्वामी ग्रह हैं। गुरु कर्क राशि में उच्च के और मकर राशि में नीच के माने जाते हैं।
वृषभ राशि पर वक्री गुरु का प्रभाव
वृषभ राशि में गुरु दसवें भाव में गोचर कर रहे हैं। कुंडली का दसवां भाव कर्म का भाव है। यह समय आपके लिए कार्यक्षेत्र और व्यापार के लिए अच्छा है, आर्थिक पक्ष सामान्य रहने के बीच किसी भी कार्य में जल्दबाजी से बचें। साथ ही वाद- विवाद में न पड़ें।