इसी वर्ष 4 मई की सायं 07 बजकर 56 मिनट पर वक्री हो चुके बृहस्पति 4 माह 9 दिन के बाद पुनः 13 सितंबर की सुबह 06 बजकर 10 मिनट पर मार्गी हो रहे हैं। इनके वक्री एवं मार्गी होने का प्रभाव समस्त भूमंडल पर प्रत्यक्ष दिखाई पड़ता है। स्थूलकाय शरीर, विशाल उदर, भूरे केश तथा भूरी आंखें लिए हुए बृहस्पति मनुष्य के जीवन में मान सम्मान, उत्तम ज्ञान और गहन चिंतनशीलता लाते हैं। इनके शुभ प्रभाव के परिणाम स्वरूप निर्धन परिवार में भी जन्म लेने वाला जातक भी अपने ज्ञान के बल पर जीवन में कार्य व्यापार की दृष्टि से जो कुछ भी करता है उसमें ऊंचाइयां हासिल करता है। ऐसे जातक धर्म-कर्म के मामलों में बढ़-चढ़कर रुचि रखते हैं और दान पुण्य भी करते हैं। बृहस्पति यदि वक्री हो तो तरह-तरह की समस्याएं भी लाते हैं और मार्गी होने पर स्वयं उन समस्याओं का अंत भी कर देते हैं। इनके मार्गी होने का सभी राशियों पर कैसा प्रभाव रहेगा इसका ज्योतिषीय विश्लेषण करते हैं।