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ग्रहों का दुर्लभ संयोग: आज तीन ग्रहों को छोड़कर बाकी सभी ग्रह हैं स्वयं की राशि में

Sun, 13 Sep 2020 11:30 AM IST
विनोद शुक्ला ज्योतिष डेस्क, अमर उजाला
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6 प्रमुख ग्रहों का जो संयोग दिनांक 13 सितम्बर 2020, रविवार को बन रहा है, - फोटो : अमर उजाला
ज्योतिष गणना के अनुसार आज यानी 13 सितंबर का दिन बहुत ही खास है। 13 सितंबर, रविवार को सभी नौ ग्रहों में से 6 ग्रह स्वयं की राशि में विद्यमान है। ऐसे संयोग को बड़ा ही दुर्लभ संयोग माना जाता है जब एक साथ इतने ग्रह स्वयं की राशि में हो। इस तरह के ग्रहों का संयोग सदियों में बहुत कम ही देखने को मिलता है। अब इसके बाद इस तरह का संयोग कई वर्षो के बाद ही बनेगा जब एक साथ कई ग्रह स्वयं की राशि में होंगे। हिंदू पंचांग के अनुसार आश्विन माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि पर यानी 13 सितंबर 2020 को सूर्य, चंद्रमा, मंगल, बुध, गुरु और शनि सभी 6 ग्रह स्वयं की राशि में मौजूद रहेंगे। आइए जानते हैं सभी 6 ग्रहों के स्वयं की राशि में होने का महत्व...
1. सूर्य       सिंह राशि में
2. चंद्र       कर्क राशि में
3. मंगल    मेष राशि में
4. बुध      कन्या राशि में
5. गुरु      धनु राशि में
6. शनि    मकर राशि में
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sun
1- सूर्य स्वंय की राशि सिंह में
ज्योतिष शास्त्र की गणना के अनुसार सूर्यदेव हर महीने राशि बदलते हैं। सूर्य इस समय स्वयं की राशि सिंह में मौजूद हैं जहां पर ये 16 सितंबर की शाम तक रहेंगे। इसके बाद सूर्य स्वराशि की यात्रा समाप्त करके अपने मित्र बुध की राशि कन्या में प्रवेश करेंगे। सिंह राशि के स्वामी सूर्य मेष राशि में उच्च राशि के और तुला राशि में नीच राशि के माने गए हैं। फलित ज्योतिष में जन्मकुंडली के भावों अनुसार इनका शुभा-शुभ प्रभाव सर्वाधिक रहता है। किसी भी जातक की जन्मकुंडली में यदि सूर्य बलवान हों तो वह राजसत्ता का सुख भोगता है। समाज में मान प्रतिष्ठा बढ़ती है और उत्तम स्वास्थ्य का स्वामी होता है। 
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super moon 2020 - फोटो : ANI
2- चंद्रमा स्वंय की राशि कर्क में
चंद्रमा ढाई दिनों में अपनी राशि बदलते हैं। ज्योतिष में चंद्रमा को मन का कारक कहा गया है। वैदिक ज्योतिष गणना में चंद्रमा क स्थान बहुत ही महत्वपूर्ण माना गया है। 13 सितंबर को चंद्रमा स्वयं की राशि कर्क में विराजमान होंगे।

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मंगल की वक्री चाल
3- मंगल मेष राशि में
वैदिक ज्योतिष शास्त्र में मंगल का काफी महत्व होता है। मंगल को पृथ्वी का पुत्र कहा जाता है। मंगल ऊर्जा के प्रतीक हैं। ज्योतिष शास्त्र में मंगल मेष और वृश्चिक राशि के स्वामी माने जाते है। मंगल मकर राशि में उच्च के और कर्क राशि में नीच के माने गए हैं। मंगल सूर्य, चंद्रमा और बृहस्पति के मित्र माने  हैं वहीं बुध और केतु के साथ इनका शत्रुवत संबंध है। पृथ्वी पुत्र मंगल 09 सितंबर को वक्री हो गए हैं। अपनी वक्री अवस्था में चलते मंगल 04 अक्तूबर को सुबह 10 बजकर 04 मिनट पर रेवती नक्षत्र एवं मीन राशि में प्रवेश करेंगे और पुनः 14 नवंबर की प्रातः 06 बजकर 04 मिनट पर मार्गी होकर 24 दिसंबर को सुबह 10 बजकर सुबह 10 बजकर 16 मिनट पर मेष राशि में प्रवेश करते हुए 22 फरवरी 2021 की सुबह 04 बजकर 33 मिनट तक गोचर करेंगे उसके बाद बृषभ राशि में प्रवेश कर जायेंगे। इस प्रकार ये 02 माह 04 दिन तक वक्री रहेंगे। 
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mercury transit
4-  बुध कन्या राशि में
ग्रहों में युवराज का दर्जा प्राप्त करने वाले बुध ग्रह इस समय स्वयं की राशि कन्या में हैं। 3 सितंबर को बुध कन्या राशि की यात्रा समाप्त कर स्वयं की राशि प्रवेश किया है। कन्या राशि में ये 22 सितंबर की सायं 6 बजकर 54 मिनट तक रहेंगे, उसके बाद तुला राशि में प्रवेश कर जाएंगे। इस तरह से जिन जातकों की राशियों अथवा जन्म कुंडलियों के अनुसार बुध केंद्रगत रहेंगे उनके लिए पंच महापुरुष योगों में से एक भद्र योग का निर्माण करेंगे। इसी योग के प्रभावस्वरूप जातक अत्यंत विनम्र, विवेकशील, कुशल वक्ता, अपनी अलग पहचान बनाने वाला, तर्कशास्त्री, कानूनविद, शिक्षक, लेखक, प्रकाशक, बैंकिंग एवं बीमा क्षेत्र में काम करने वाला कुशल प्रशासक होता है। 
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jupiter transit 2020 - फोटो : अमर उजाला
5- गुरु धनु राशि में
सभी ग्रहों में सबसे शुभ फल देने वाले गुरु ग्रह 13 सितंबर को स्वयं की राशि में भ्रमण करते हुए वक्री से मार्गी हो गए हैं। गुरु लगभग 1 वर्ष में अपनी राशि बदलते हैं। इस समय गुरु स्वयं की राशि धनु में हैं। ज्योतिष में गुरु को धन, स्वर्ण और सुख सुविधा का कारक माना जाता है। धनु और मीन राशि के स्वामी बृहस्पति कर्क राशि में उच्च तथा मकर राशि में नीचराशिगत माने गए हैं। गुरु के शुभ प्रभाव के परिणाम स्वरूप निर्धन परिवार में भी जन्म लेने वाला जातक भी अपने ज्ञान के बल पर जीवन में कार्य व्यापार की दृष्टि से जो कुछ भी करता है उसमें ऊंचाइयां हासिल करता है। ऐसे जातक धर्म-कर्म के मामलों में बढ़-चढ़कर रुचि रखते हैं और दान पुण्य भी करते हैं। 
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मकर राशि में शनि
6- शनि मकर राशि में 
वैदिक ज्योतिष में शनि को मंद गति से चलने वाला ग्रह माना जाता है। शनि लगभग ढाई वर्षों में एक राशि से दूसरी राशि में जाते हैं। वहीं एक राशि में दोबारा आने में शनि को 30 वर्षों का लंबा समय लगता है। शनि का ज्योतिष गणना में विशेष महत्व होता है। शनि इस समय स्वयं की राशि मकर में गोचर हैं। कुंडली के शुभ भाव में शनि के बैठने से जातकों को उनके कार्यक्षेत्र में उन्हें ऊंचाईयों तक ले जाते हैं वहीं अगर कुंडली में शनि की दशा खराब होती है तो जातकों का कई तरह के कष्ट झेलने पड़ते हैं।
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