जन्माष्टमी व्रत के नियम
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जन्माष्टमी व्रत के नियम
जन्माष्टमी व्रत से एक दिन पहले यानी 3 सितंबर से ही सात्विक भोजन करना उचित माना जाता है। व्रत रखने वाले व्यक्ति को अपने विचार, व्यवहार और वाणी में भी संयम बनाए रखना चाहिए। मन में किसी के प्रति द्वेष, हिंसा या नकारात्मकता न रखें और झूठ बोलने से बचें।
जन्माष्टमी का उपवास भाद्रपद कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि के सूर्योदय से शुरू होकर नवमी तिथि के सूर्योदय तक माना जाता है। व्रत के दौरान अन्न का सेवन नहीं किया जाता। भक्त अपनी क्षमता और परंपरा के अनुसार फल, दूध या अन्य फलाहार ग्रहण कर सकते हैं।