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Hal Shashthi 2026: हरछठ आज, बन रहे 3 शुभ योग; जानें पूजा सामग्री, विधि और व्रत के नियम

Wed, 02 Sep 2026 09:58 AM IST
श्वेता सिंह धर्म डेस्क, अमर उजाला

सार

Hal Shashthi 2026: आज हरछठ का पर्व मनाया जा रहा है। इसे हलषष्ठी, हल छठ और ललही छठ के नामं से भी जाना जाता है। संतान की सुख-समृद्धि और अच्छे स्वास्थ्य की कामना से महिलाएं यह व्रत रखती हैं। जानें हल छठ की सही तारीख, 3 शुभ योग, पूजा सामग्री और पूजा विधि।

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हरछठ 2026 - फोटो : amar ujala

Hal Shashthi 2026: हिंदू धर्म में हरछठ, हल छठ या हल षष्ठी का विशेष महत्व माना जाता है। यह पर्व हर वर्ष भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की षष्ठी तिथि को मनाया जाता है। इसे अलग-अलग क्षेत्रों में हरछठ, ललई छठ और बलराम जयंती के नाम से भी जाना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इसी दिन भगवान श्रीकृष्ण के बड़े भाई और शेषनाग के अवतार माने जाने वाले भगवान बलराम का जन्म हुआ था। उनका प्रमुख अस्त्र हल था, इसलिए इस पर्व का नाम हल षष्ठी पड़ा। हल छठ के दिन माताएं अपनी संतान की लंबी आयु, अच्छे स्वास्थ्य और सुख-समृद्धि की कामना से व्रत रखती हैं। कई जगह संतान की इच्छा रखने वाली महिलाएं भी संतान प्राप्ति की कामना से यह व्रत करती हैं। इस दिन खेती और कृषि से जुड़ी चीजों का विशेष महत्व होता है। इस बार हल छठ के दिन तीन शुभ योगों का संयोग भी बन रहा है।
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उदया तिथि के अनुसार हरछठ का व्रत 2 सितंबर 2026, बुधवार को रखा जाएगा।

कब है हरछठ?
वैदिक पंचांग के अनुसार, भाद्रपद कृष्ण पक्ष की षष्ठी तिथि 2 सितंबर 2026 को सुबह 6 बजकर 12 मिनट से शुरू होगी और 3 सितंबर को सुबह 4 बजकर 25 मिनट पर समाप्त होगी। उदया तिथि के अनुसार हरछठ का व्रत 2 सितंबर 2026, बुधवार को रखा जाएगा। धार्मिक मान्यता के अनुसार, यह पर्व जन्माष्टमी से दो दिन पहले मनाया जाता है। हरछठ को विशेष रूप से संतान की सुख-समृद्धि और परिवार की खुशहाली से जोड़कर देखा जाता है।

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हल छठ पर बनेंगे 3 शुभ योग - फोटो : adobe stock

हरछठ पर बनेंगे 3 शुभ योग
इस वर्ष हरछठ का दिन शुभ योगों के संयोग से खास माना जा रहा है। पंचांग के अनुसार, इस दिन ध्रुव योग का निर्माण होगा, जो सुबह से लेकर रात 9 बजकर 12 मिनट तक रहेगा। इसके बाद व्याघात योग शुरू होगा, जो पूरी रात तक रहेगा। इसके अलावा तिथि और नक्षत्र के संयोग को भी पूजा-पाठ के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। ऐसे में हरछठ पर विधि-विधान से पूजा करने और संतान की मंगलकामना करने का विशेष महत्व रहेगा।

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हरछठ पूजा सामग्री की पूरी लिस्ट

हरछठ पूजा सामग्री की पूरी लिस्ट

  • भैंस का दूध, दही और घी
  • भैंस का गोबर
  • महुआ के फल, फूल और पत्ते
  • ऐपण
  • मिट्टी के छोटे कुल्हड़
  • ज्वार की धानी
  • मिट्टी की मटकी
  • देवली-छेवली
  • पसही चावल या तालाब में उगा चावल
  • भुना हुआ चना
  • घी में भुना हुआ महुआ
  • धान का लावा
  • सात प्रकार के अनाज
  • लाल चंदन
  • हल्दी
  • नया वस्त्र
  • जनेऊ
  • कुश
  • मिट्टी का दीपक
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इस तरह करें हल छठ की पूजा - फोटो : अमर उजाला
 इस तरह करें हरछठ पूजा 
  •  सुबह जल्दी उठकर स्नान करती हैं। परंपरा के अनुसार महुए की दातून से दांत साफ करने के बाद व्रत का संकल्प लिया जाता है।
  • इसके बाद पूजा स्थल पर भैंस के गोबर से दीवार पर हल छठ माता, हल, सप्तऋषि, पशु और किसान से संबंधित आकृतियां बनाई जाती हैं।
  • एक चौकी पर साफ कपड़ा बिछाकर कलश स्थापित किया जाता है। इसके साथ भगवान गणेश और माता पार्वती की प्रतिमा भी स्थापित की जाती है।
  • इसके बाद विधि-विधान से पूजा की जाती है। मिट्टी के कुल्हड़ में ज्वार की धानी और महुआ रखा जाता है। वहीं मटकी में देवली-छेवली रखी जाती है।
  • सबसे पहले हल छठ माता, फिर कुल्हड़ और उसके बाद मटकी का पूजन किया जाता है।
  • पूजा में सात प्रकार के अनाज, धूल के साथ भुना हुआ चना, आभूषण और हल्दी से रंगा हुआ वस्त्र अर्पित किया जाता है।
  • परंपरा के अनुसार भैंस के दूध से बने मक्खन से हवन किया जाता है। इसके बाद हल छठ की कथा सुनी जाती है और भगवान बलराम व भगवान श्रीकृष्ण की आरती की जाती है।
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हल छठ व्रत में क्या खाएं? - फोटो : इंस्टाग्राम

हरछठ व्रत में क्या खाएं?

  • हरछठ के व्रत में अन्न का सेवन नहीं किया जाता।
  • मान्यता के अनुसार व्रती हल से जोती या बोई गई फसल से प्राप्त अनाज, फल और सब्जियों का सेवन नहीं करती हैं।
  • इस व्रत में भैंस के दूध और उससे बने दही का सेवन करने की परंपरा है।
  • व्रत के समापन पर महुए के पत्ते पर महुआ फल और भैंस के दूध से बनी दही ग्रहण कर व्रत खोलने की परंपरा बताई गई है।
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हल छठ का धार्मिक महत्व

हरछठ का धार्मिक महत्व
हरछठ केवल संतान की सुख-समृद्धि से जुड़ा पर्व ही नहीं है, बल्कि इसका संबंध कृषि और ग्रामीण जीवन से भी गहरा है। भगवान बलराम का प्रमुख अस्त्र हल माना जाता है, इसलिए इस पर्व में हल और खेती से संबंधित वस्तुओं का विशेष महत्व होता है। मान्यता है कि हरछठ का व्रत करने से माताओं को संतान के अच्छे स्वास्थ्य और दीर्घायु का आशीर्वाद प्राप्त होता है। वहीं संतान की कामना रखने वाली महिलाएं भी श्रद्धा और विश्वास के साथ यह व्रत करती हैं।

डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।

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