फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Astrology and Health: बीमारियों की वजह हो सकती है आपकी कुंडली का ये दोष, जानिए कौन-सा ग्रह दे रहा कष्ट

Sun, 04 May 2025 11:48 AM IST
श्वेता सिंह ज्योतिष डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

Kundali Effects:ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, हर ग्रह हमारे शरीर के किसी न किसी हिस्से या मानसिक स्थिति से जुड़ा होता है। जब कोई ग्रह अशुभ स्थिति में होता है, जैसे कि नीच का हो, शत्रु राशि में हो, पाप ग्रहों से पीड़ित हो या फिर उसका गोचर खराब चल रहा हो तो उसका असर हमारी सेहत पर दिखना शुरू हो जाता है।
विज्ञापन
1 of 10
Astrology and Health - फोटो : adobe stock
Health Problems Linked to Kundali: अक्सर देखा गया है कि कुछ लोग बिना किसी बड़ी वजह के बार-बार बीमार पड़ते हैं। कई बार डॉक्टरी इलाज से भी फायदा नहीं होता, तब लोग सोचने लगते हैं कि आखिर बात क्या है? ऐसे मामलों में ज्योतिष एक नई दिशा दिखा सकता है, क्योंकि हमारी जन्मकुंडली में मौजूद ग्रहों की स्थिति हमारे शरीर और मन दोनों पर गहरा असर डालती है।
Guru Aditya Yoga: सूर्य-गुरु की युति से इन राशियों को मिलेगा अपार करियर और व्यवसाय में लाभ
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, हर ग्रह हमारे शरीर के किसी न किसी हिस्से या मानसिक स्थिति से जुड़ा होता है। जब कोई ग्रह अशुभ स्थिति में होता है, जैसे कि नीच का हो, शत्रु राशि में हो, पाप ग्रहों से पीड़ित हो या फिर उसका गोचर खराब चल रहा हो तो उसका असर हमारी सेहत पर दिखना शुरू हो जाता है।
Shani Placement In Kundali: कुंडली के किस भाव में स्थित होने पर शनि देते हैं अकूत संपत्ति, यहां जानें
उदाहरण के लिए, अगर चंद्रमा अशुभ हो तो मानसिक तनाव और नींद की दिक्कतें आ सकती हैं। मंगल दोष से खून से जुड़ी समस्याएं या चोट-चपेट की संभावनाएं बढ़ जाती हैं। इसी तरह शनि की प्रतिकूल स्थिति से हड्डियों और जोड़ों की समस्या हो सकती है।
Chandra Gochar: बगलामुखी जयंती पर चंद्रमा करेंगे राशि और नक्षत्र परिवर्तन, इन राशियों की पलटेगी किस्मत
आइये जानते हैं कि कौन-सा ग्रह किन बीमारियों से जुड़ा होता है और उन ग्रहों को शांत करने के लिए क्या-क्या ज्योतिषीय उपाय किए जा सकते हैं। जब ग्रहों की दशा सुधरती है, तो स्वास्थ्य में भी धीरे-धीरे सुधार आने लगता है।
Gajlakshmi Rajyog: गुरु-शुक्र की युति से बनेगा का गजलक्ष्मी राजयोग, इन राशियों को मिलेगा धनलाभ
विज्ञापन

2 of 10
Astrology and Health - फोटो : adobe stock
हृदय, सिर और आंखों से जुड़ी समस्याएं
अगर सूर्य ग्रह अशांत हो जाए तो व्यक्ति को आंखों की कमजोरी, सिरदर्द, कान की समस्या, हृदय की बीमारी और हड्डियों में कमजोरी जैसी परेशानियाँ हो सकती हैं। सूर्य का प्रभाव शरीर और आत्मविश्वास पर भी पड़ता है। इस स्थिति से बचने के लिए रोज़ सुबह सूरज को जल चढ़ाना और रविवार को सूर्य स्तोत्र का पाठ करना लाभकारी हो सकता है। इसके अलावा, सूर्य को मजबूत करने के लिए 12 मुखी रुद्राक्ष पहनने से भी फायदा मिलता है।
विज्ञापन

3 of 10
Astrology and Health - फोटो : Adobe Stock
मानसिक तनाव, नींद की समस्याएं और भावनात्मक असंतुलन
चंद्रमा का प्रभाव हमारी मानसिक स्थिति और भावनाओं पर ज्यादा होता है। जब चंद्र कमजोर हो जाता है, तो मानसिक तनाव, चिंता, नींद की कमी और भावनात्मक असंतुलन जैसे समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं। इस स्थिति को सुधारने के लिए सोमवार को शिवजी की पूजा करें और सफेद वस्तुएं जैसे दूध, चावल या चांदी का दान करें। इसके अलावा, चंद्र को मजबूत करने के लिए 2 मुखी रुद्राक्ष धारण करना भी फायदेमंद होता है।

4 of 10
Astrology and Health - फोटो : Freepik
खून, त्वचा और पित्त से संबंधित विकार
मंगल ग्रह के कमजोर होने से पित्त विकार, फोड़े-फुंसी, त्वचा रोग और अपेंडिक्स जैसी बीमारियाँ हो सकती हैं। यह ग्रह खून और शरीर के गर्मी से जुड़ा होता है। मंगल को मजबूत करने के लिए मंगलवार को हनुमान चालीसा का पाठ करें और मसूर की दाल किसी गरीब को दान करें। साथ ही, 3 मुखी रुद्राक्ष पहनने से भी मंगल का प्रभाव सकारात्मक हो सकता है।
विज्ञापन

5 of 10
Astrology and Health - फोटो : freepik
गले, बोलने की क्षमता और मानसिक स्पष्टता से जुड़ी परेशानियां
बुध ग्रह के कमजोर होने पर गले में खराश, नाक से जुड़ी समस्याएं, तर्क करने में कठिनाई और बोलने में परेशानी हो सकती है। बुध का प्रभाव हमारे संवाद और सोच पर पड़ता है। इसे सुधारने के लिए बुधवार को गणेश जी की पूजा करें और गायों को हरी घास खिलाएं। बुध को मजबूत करने के लिए 4 मुखी रुद्राक्ष धारण करें।
विज्ञापन

6 of 10
Astrology and Health - फोटो : adobe stock
मोटापा, पाचन समस्याएं और जोड़ों का दर्द
गुरु ग्रह के कमजोर होने पर मोटापा, पाचन की समस्या, जोड़ों में दर्द और शरीर में सूजन जैसी समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं। यह ग्रह पाचन तंत्र और शारीरिक संतुलन से जुड़ा होता है। इस ग्रह की स्थिति को ठीक करने के लिए गुरुवार को व्रत रखें, भगवान विष्णु की पूजा करें और पीले फल, गुड़ या चना दान करें। 5 मुखी रुद्राक्ष पहनने से गुरु ग्रह का प्रभाव बेहतर होता है।
विज्ञापन

7 of 10
Astrology and Health - फोटो : adobe stock
गुर्दे, प्रजनन अंगों और आंतरिक स्वास्थ्य की दिक्कतें
कमजोर शुक्र ग्रह से शरीर के अंदरूनी अंगों जैसे गुर्दे, प्रजनन से जुड़ी समस्याएं और सफेद पानी जैसी बीमारियाँ हो सकती हैं। शुक्र ग्रह का प्रभाव हमारी शारीरिक और मानसिक संतुलन पर पड़ता है। शुक्र को मजबूत करने के लिए शुक्रवार को इत्र, दही, खीर, चांदी और रंग-बिरंगे कपड़े दान करें। साथ ही, 6 मुखी रुद्राक्ष पहनने से शुक्र का प्रभाव सकारात्मक हो सकता है।

8 of 10
Astrology and Health - फोटो : अमर उजाला
हड्डियों के रोग और सांस लेने की समस्याएं
शनि ग्रह की खराब स्थिति से गठिया, हड्डियों का दर्द, सांस की बीमारियां और कैंसर जैसी गंभीर समस्याएं हो सकती हैं। शनि ग्रह से जुड़ी बीमारियाँ अधिकतर शरीर की नींव और लंबी उम्र से संबंधित होती हैं। शनि ग्रह को शांत करने के लिए शनिवार को शनि मंदिर जाकर सरसों का तेल चढ़ाएं और हनुमान चालीसा पढ़ें। शनि को मजबूत करने के लिए 7 मुखी रुद्राक्ष पहनें।

9 of 10
Astrology and Health - फोटो : amar ujala
विषाक्त रोग, छिपी बीमारियां और त्वचा की एलर्जी
राहु ग्रह के अशांत होने पर व्यक्ति को बार-बार बुखार, विषजनित रोग, डर और त्वचा की एलर्जी जैसी समस्याएं हो सकती हैं। राहु से जुड़े रोग आमतौर पर अचानक उत्पन्न होते हैं और उनका इलाज करना कठिन हो सकता है। राहु के प्रभाव को सुधारने के लिए "ॐ रां राहवे नमः" मंत्र का जाप करें और काले तिल का दान करें। इसके अलावा, 8 मुखी रुद्राक्ष पहनने से राहु के दोष से छुटकारा मिल सकता है।
 
विज्ञापन

10 of 10
Astrology and Health - फोटो : adobe stock
पाचन तंत्र और कब्ज से जुड़ी समस्याएं
केतु ग्रह के दुष्प्रभाव से पेट की खराबी, पाचन से जुड़ी समस्याएं और त्वचा के रोग उत्पन्न हो सकते हैं। यह ग्रह मानसिक अस्थिरता और शारीरिक समस्याओं का कारण बन सकता है, विशेष रूप से जब यह कुंडली में अशांत हो। केतु के दोष से बचने और इससे होने वाली परेशानियों को दूर करने के लिए शनिवार को कुत्तों को रोटी खिलाना और भैरव जी की पूजा करना अत्यंत लाभकारी हो सकता है। साथ ही, 9 मुखी रुद्राक्ष धारण करने से केतु के प्रभाव को संतुलित किया जा सकता है।


डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें