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शनि की महादशा के दौरान शनि की अंतर्दशा
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार शनि की महादशा को बहुत ही प्रभावी माना जाता है। शनि की महादशा जातक पर शुभ और अशुभ दोनों तरह का प्रभाव रहता है, क्योंकि ज्योतिष में शनि को न्यायाधीश और दंडाघिकारी माना गया है। ये व्यक्ति को उनके कर्मो के आधार पर शुभ या अशुभ फल प्रदान करते हैं। शनि की महादशा कुंडली में 19 वर्षों तक रहती है। शनि की महादशा के दौरान शनि की अंतर्दशा 3 वर्ष की होती है। जातकों की कुंडली में एक समय में दोनों स्थानों पर शनि का होना मिलाजुला परिणाम देखने को मिलता है। इसमें जातक को जमीन से संबंधित मसलों में फायदा मिलता है। घर परिवार में सुख शांति रहती है। समाज में मान-सम्मान बढ़ता है। वहीं अगर अशुभ फल की बात करें तो यह समय जातक के लिए नौकरी और बिजनेस के नजरिए से परेशानी भरा रहता है। सेहत में गिरावट भी देखने को मिलता है।