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संक्रमण से बचने के लिए शास्त्रों में उल्लेखित है महत्वपूर्ण बातें, महामारी में रह सकते हैं सुरक्षित

Wed, 26 May 2021 12:00 PM IST
Shashi Shashi ज्योतिष डेस्क, अमर उजाला
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(सांकेतिक तस्वीर)
सामाजिक जानकारों के अनुसार 100 साल में एक एक ऐसी बीमारी या संक्रमण फैलता है। वैश्विक स्तर पर लोग जिसकी चपेट में आते हैं। इसे महामारी कहा जाता है। आज कोरोना नामक वायरस के संक्रमण से पूरी दुनिया के लोग संक्रमित हो रहे हैं। इस संक्रमण ने न जाने कितने अपनों को अपनों से छीन लिया। पूरी दुनिया के लोग अपने-अपने स्तर से इससे बचने का प्रयास कर रहे हैं। तो वहीं डॉक्टर और वैज्ञानिक भी लोगों को बचाने का हर संभव प्रयास कर रहे हैं। इस समय कोरोना की दूसरी लहर चल रही है जो बेहद घातक साबित हो रही है, जानकारों के अनुसार कोरोना की तीसरी लहर का सामना भी करना पड़ सकता है। ऐसे में सबसे अच्छा उपाय है कि स्वयं को बचाकर रखा जाए। हमारे शास्त्रों में उल्लेखित नियमों का यदि दैनिक दिनचर्या में ध्यानपूर्वक पालन किया जाए तो संक्रमण से बचा जा सकता है। जानते हैं संक्रमण से बचने के लिए शास्त्रों में उल्लेखित नियमों के बारे में।
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(प्रतीकात्मक तस्वीर)
"न अप्रक्षालितं पूर्वधृतं वसनं बिभृयात"
विष्णु स्मृति में उल्लेखित इस श्लोक के अनुसार एक बार धोए गए कपड़े को पहनने के बाद दोबारा बिना धोए कभी धारण नहीं करना चाहिए। यदि बिना साफ किए कपड़ों को दोबारा पहना जाए तो उन कपड़ों में मौजूद किटाणु आपके शरीर में पहुंच जाते हैं, जिससे संक्रमण बढ़ने का खतरा की गुना ज्यादा बढ़ जाता है।
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(प्रतीकात्मक तस्वीर)
मार्कण्डेय पुराण में कहा गया है कि "अपमृज्यान्न च स्नातो गात्राण्यम्बरपाणिभि:" यानी कभी भी गीले कपड़े से अपना शरीर कभी नहीं पोंछना चाहिए। इससे संक्रमित होने की संभावना बढ़ जाती है। कपड़ों को हमेशा अच्छे से धूप में सुखाकर ही प्रयोग करना चाहिए।

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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : I Stock
मनुस्मृति में उल्लेखित "घ्राणास्ये वाससाच्छाद्य मलमूत्रं त्यजेत् बुध:" इस श्लोक में कहा गया है कि हमेशा नाक, मुंह, सिर ढककर और मौन रहकर ही मल-मूत्र त्याग करना चाहिए। मल-मूत्र के जरिए संक्रमण की संभावना बहुत अधिक रहती है। यदि इस श्लोक में बताई गई बात को ध्यान में रखा जाए तो संक्रमण से बचा जा सकता है।
 
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(प्रतीकात्मक तस्वीर)
"चिताधूमे सेवने सर्वे वर्णा: स्नानम् आचार्य:। वमने श्मश्रु कर्मणि कृते च"
विष्णु स्मृति में उल्लेखित इस श्लोक के अनुसार श्मशान भूमि से लौटने, बाल कटवाने या फिर उल्टी होने के बाद तुरंत स्वच्छ जल से स्नान करने के बाद स्वच्छ वस्त्र धारण करने चाहिए।
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : सोशल मीडिया
भारतीय संस्कृति में प्राचीन समय से ही हाथ जोड़कर अभिवादन करने की परंपरा चली आ रही है, हालांकि बदलते दौर में अब लोग हाथ मिलाकर अभिवादन करने लगे हैं, लेकिन कोरोना महामारी के आने के बाद पूरी दुनिया के लोगों ने माना कि भारत में अभिवादन करने का तरीका सबसे अच्छा है। हमारे शास्त्रों में शाकाहार पर जोर दिया गया है। आज के समय में लोग शाकाहार की ओर बढ़ रहे हैं।
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