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रत्न ज्योतिष: शनिदेव का रत्न है नीलम, जानें पहनने के नियम, फायदे-नुकसान और शुभ-अशुभ संकेत

Thu, 17 Jun 2021 12:08 PM IST
विनोद शुक्ला ज्योतिष डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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नीलम रत्न को पहनने के नियम - फोटो : अमर उजाला
ज्योतिषशास्त्र के अनुसार व्यक्ति कभी न कभी किसी ग्रह के दुष्प्रभाव के कारण तमाम तरह की परेशानियों और बीमारियों से घिरा रहता है। ज्योतिष के अनुसार सभी ग्रहों में शनि ग्रह को बहुत ही प्रभावशाली ग्रह माना जाता है। कुंडली में शनि के अशुभ भाव में बैठने पर जातकों कष्ट मिलने लगते हैं। लोगों के मन में शनि ग्रह से जुड़े साढ़ेसाती, ढैय्या और महादशा के चलने पर भारी परेशानियां आने का ख्याल होने लगता है। शनि ग्रह के अशुभ प्रभाव से बचने के लिए कई तरह के उपाय किए जाते हैं। इन उपायों में से एक उपाय शनि ग्रह का रत्न नीलम को धारण करना बताया गया है। माना जाता है अगर शनि कुंडली में अशुभ हो तो कई तरह की परेशानियां आने लगती हैं और बनते हुए काम भी बिगड़ने लगते हैं। ऐसे में जिन जातकों पर शनि भारी होते हैं उन्हें नीलम रत्न धारण करने की सलाह दी जाती है।
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वैदिक ज्योतिष में रत्नों का महत्व
ज्योतिष में नीलम रत्न 
नीलम रत्न को शनि ग्रह का रत्न माना गया है। नीलम रत्न को धारण करने पर अगर इसका शुभ प्रभाव जातक पर पड़ने लगता है तो व्यक्ति फर्श से अर्श तक पहुंच जाता है। उसकी सारी परेशानियां धीरे-धीरे खत्म हो जाती है और वह दिन ब दिन सफलता की सीढ़ियां चढ़ने लगता है। जिन लोगों की कुंडली में शनि अशुभ होते हैं उन्हें शनि का रत्न नीलम पहनने की सलाह दी जाती है। यही नहीं अगर कुंडली में शनि शुभ भाव में भी हैं तो इनका शुभ प्रभाव बढ़ाने के लिए भी नीलम रत्न धारण किया जाता है।
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किसे पहनना चाहिए नीलम रत्न, क्या कहता है ज्योतिष 
- ज्योतिष के अनुसार अगर किसी व्यक्ति के ऊपर शनि की महादशा, अंतर्दशा, साढ़ेसाती और ढैय्या का प्रकोप हो तो उसे नीलम रत्न धारण करना चाहिए।
- ज्योतिष शास्त्र का मानना है कि कुंभ और मकर राशि के जातकों को नीलम रत्न पहनना शुभ होता है।
- कुंडली में शुभ शनि होने पर भी नीलम रत्न पहनना अच्छा माना जाता है। इसके अलावा अगर शनि षष्ठेश या अष्टमेश तो भी नीलम पहना जा सकता है। ध्यान रखने के बात यह कि नीलम रत्न पहनने से पहले किसी अच्छे ज्योतिषी की सलाह अवश्य लेनी चाहिए।

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नीलम रत्न पहनने के नियम, फायदे-नुकसान और शुभ-अशुभ संकेत
रत्न ज्योतिष शास्त्र के अनुसार सभी प्रमुख 9 रत्नों में से एक नीलम को खास रत्न माना जाता है। आइए जानते हैं नीलम रत्न को पहनने के नियम, फायदे-नुकसान और शुभ-अशुभ संकेत...

1- नीलम रत्न का प्रभाव बहुत ही तेजी से दिखता है। अगर यह रत्न आपके लिए अनुकूल नही हैं तो आपकी आंखों में तकलीफ होनी शुरू हो जाएगी। 
2 - अगर किसी जातक के नीलम पहनने पर उसके साथ दुर्घटनाएं और शारीरिक कष्ट बढ़ने लगे तो समझिए यह रत्न आपके लिए शुभ नहीं है।
3 - नीलम के अशुभ होने पर जो व्यक्ति को फौरन ही आर्थिक नुकसान होने लगता है।
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4- नीलम अगर अनुकूल नहीं है तो बुरे और डरावने सपने आने शुरू हो जाते हैं।
5 - नीलम के अनुकूल और शुभ होने पर इसे धारण करते ही शुभ फल मिलना आरंभ हो जाता है। सबसे पहले तो स्वास्थ्य संबंधी कोई परेशानी चल रही है तो उससे राहत मिलनी शुरू हो जाती है।
6 - नीलम शुभ होने पर व्यक्ति को आर्थिक लाभ मिलने के साथ नौकरी और व्यवसाय में उन्नति के संकेत भी दिखाई देने लगते हैं।
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7 - नीलम धारण करने के बाद आपके साथ कुछ अशुभ घटना न हो तब यह समझना चाहिए कि आपके लिए यह रत्न शुभ है।
8 - जन्म कुंडली में शनि की महादशा विपरीत हो तो उसके लिए नीलम बेहद शुभ होता है। नीलम पहनते ही कमजोर शनि का प्रभाव कई गुना बढ़ जाता है।
9- नीलम रत्न पहने पर मन की एकाग्रता बढ़ने लगती है जिस कारण से कार्यकुशलता में वृद्धि होने लगती है।
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10 - जिन जातकों का जन्म वृष लग्न और तुला लग्न में होता है उनके लिए नीलम राजयोग की कारक होता है।
11- नीलम को कभी भी तुरंत नहीं पहनना चाहिए। नीलम को धारण करने से पहले उसका परिक्षण करके देखा जाता है कि पहनने वाले व्यक्ति के लिए यह अनुकूल है या नहीं।
12- नीलम रत्न को घर पर लाने के बाद उसे गंगाजल से भरे किसी पात्र में रख देना चाहिए और शनिवार के दिन धारण कर इसके प्रभाव के बारे में ध्यान से देखना चाहिए। 
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13- नीलम को शनिवार के दिन दाएं हाथ की मध्यमा अंगुली में धारण किया जाना चाहिए।
14- नीलम रत्न को पहनने से पहले किसी अच्छे ज्योतिष से अपनी कुंडली दिखाकर सलाह जरूर लेनी चाहिए। 
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