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जो लोग करते हैं ये 6 काम, उनके घर में आती है दरिद्रता

Mon, 07 Dec 2020 04:45 PM IST
Shashi Shashi ज्योतिष डेस्क, अमर उजाला
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maa lakshmi
हमारे शास्त्रों में सुबह उठने से लेकर रात को सोने तक कुछ कार्यों को लेकर नियम बताएं हैं। हमारे बुजुर्ग भी इन बातों को मानते आए हैं, लेकिन आज के समय में बदलती जीवनशैली में लोग इन बातों को अनदेखा करने लगे हैं। हर कार्य को करने का एक सही समय माना गया है। जो लोग इन नियमों को अनदेखा करते हैं या फिर जानकारी के अभाव में गलतियां करते हैं, मां लक्ष्मी उनसे रूष्ट हो जाती हैं। ऐसे लोगों के घर में दरिद्रता आने लगती है। तो चलिए जानते हैं कि वे कौन से 6 हैं जिन्हें करना वर्जित माना गया है।
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सुबह जल्दी उठना चाहिए (प्रतीकात्मक तस्वीर) - फोटो : pexel
हमारे शास्त्रों में बताया गया है कि मनुष्य को हमेशा ब्रह्म मुहुर्त में उठना चाहिए। जो लोग बहुत ज्यादा देर तक सोते रहते हैं उनके घर में लक्ष्मी वास नहीं करती हैं। ब्रह्म मुहुर्त में उठना स्वास्थ्य की दृष्टि से भी बहुत अच्छा रहता है। इससे शरीर रोगों से बचा रहता है।
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संध्या का समय ईश्वर वंदन का समय होता है (प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : सोशल मीडिया
शास्त्रों में संध्या के समय सोना, पढ़ना और भोजन करना निषिद्ध माना गया है। कहा जाता है कि संध्या के समय दोनों बेला का मिलन होता है। संध्या का समय ईश्वर वंदन का समय माना गया है। जो लोग संध्या के समय सोते हैं, उन्हें धन हानि होती है। इसी तरह से संध्या के समय खाना खाने से शरीर में रोग लगे रहते हैं।

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बिस्तर पर गंदे या भीगे हुए पैर लेकर सोने वालों के घर समृद्धि नहीं आती है(प्रतीकात्मक तस्वीर) - फोटो : pixabay
बिस्तर पर कभी बिना हाथ-पैर धोए नहीं जाना चाहिए न ही भीगे हुए पैर लेकर बिस्तर पर सोना चाहिए। माना जाता है कि जो लोग भीगे हुए या गंदे पैर लेकर सोते हैं, उनके घर में समृद्धि नहीं आती है। इसलिए पैरों को साफ करके पोंछने के बाद बिस्तर पर सोना चाहिए। 
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दिन के समय न सोएं (प्रतीकात्मक तस्वीर) - फोटो : iStock
शास्त्रों में दिन के समय सोना भी वर्जित माना गया है। जो लोगो दिन के समय सोते हैं, उनका शरीर रोगों से घिरा रहता है, इसलिए दिन के समय नहीं सोना चाहिए। सभी ऋतुओं में दिन के समय सोना वर्जित माना गया है लेकिन ग्रीष्मकाल में कुछ देर सो सकते हैं। 
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रात के समय न करें दही का सेवन (प्रतीकात्मक तस्वीर)
रात के समय दही का सेवन नहीं करना चाहिए। माना जाता है कि रात के समय दही का सेवन करने से भाग्य लिए अनुकूल नहीं रहता है साथ ही रात्रि के समय दही के सेवन स्वास्थ्य की दृष्टि से भी सही नहीं रहता है। 
 
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पूर्णिमा या अमावस्या तिथियों को न पेड़ पौधे न काटें (प्रतीकात्मक तस्वीर) - फोटो : अमर उजाला
शास्त्रों के अनुसार अमावस्या, सक्रांति, ग्रहण, पूर्णिमा आदि पर्वकाल के दिन पेड़-पौधे आदि को नहीं काटना चाहिए। माना जाता है कि इन तिथियों पर पेड़-पौधे काटने से ब्रह्म हत्या का पाप लगता है। वैसे भी वृक्ष काटना पर्यावरण के लिए नुकसान पहुंचाता है।
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