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सीएए प्रदर्शन में 22 मरे, 83 घायल और 322 लोग जेल में, इलाहाबाद हाईकोर्ट में यूपी सरकार ने कहा

Tue, 18 Feb 2020 08:04 AM IST
विनोद सिंह न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रयागराज
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इलाहाबाद हाईकोर्ट
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प्रदेश सरकार ने सीएए के विरोध में प्रदर्शन करने वालों पर पुलिस कार्रवाई की रिपोर्ट हाईकोर्ट में प्रस्तुत कर दी है। कोर्ट के निर्देश पर प्रदेश सरकार ने हलफनामा दाखिल कर अब तक हुई प्रगति की जानकारी दी। मामले की अगली सुनवाई 18 मार्च को होगी।

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कोर्ट ने इस बीच प्रदेश सरकार और याचीगण के अधिवक्ताओं को अपना जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है। मामले की सुनवाई मुख्य न्यायमूर्ति गोविंद माथुर और न्यायमूर्ति सिद्धार्थ वर्मा की पीठ कर रही है।

हाईकोर्ट के निर्देश पर प्रदेश सरकार के अपर महाधिवक्ता मनीष गोयल ने घटना से संबंधित रिपोर्ट कोर्ट में प्रस्तुत की। उन्होंने बताया कि 20 और 21 दिसंबर 2019 को सीएए के विरोध में प्रदर्शन करने के दौरान प्रदेश भर में कुल 22 लोगों की मौत हुई और 83 लोग घायल हुए, जबकि 45 पुलिस कर्मचारियों और अधिकारियों को गंभीर चोटें आई। उन्होंने घायलों की सूची भी प्रस्तुत की।
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कोर्ट ने घायल पुलिसकर्मियों के बारे में भी जानकारी मांगी है। अपर महाधिवक्ता ने बताया कि घायलों के उपचार  के लिए 24 घंटे एंबुलेंस सेवा उपलब्ध रखी गई है। यह कहना गलत है कि एंबुलेंस सेवा पर किसी प्रकार की रोक लगाई गई। घायलों को उपचार की पूरी सुविधा दी गई। पुलिस और प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों ने अस्पतालों में जाकर उनका हालचाल भी जाना।

883 की हुई गिरफ्तारी

court - फोटो : prayagraj
अपर महाधिवक्ता मनीष गोयल ने बताया कि बलवा और तोड़फोड़ की घटनाओंं के सिलसिले में प्रदेश भर में कुल 883 लोगों को गिरफ्तार किया गया था। इसमें से 561 लोग जमानत पर बाहर आ चुके हैं। 322 लोग अब भी जेल में हैं, जबकि 111 लोगों की जमानत अर्जियां अदालतों में लंबित हैं।

पुलिस के खिलाफ शिकायत की हो रही जांच
याचिकाकर्ताओं की मुख्य शिकायत थी कि पूरी घटना में एक भी पुलिसकर्मी के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज नहीं की गई है। अपर महाधिवक्ता मनीष गोयल ने बताया कि घटना के सिलसिले में पुलिसकर्मियों के खिलाफ आठ शिकायतें प्राप्त हुई हैं, जिनको विवेचना का हिस्सा बनाया गया है। दो शिकायतें अदालतों में दाखिल की गईं। इस प्रकार से नागरिकों की ओर से पुलिस वालों के खिलाफ  कुल दस शिकायतें प्राप्त हुईं जिनकी जांच की जा रही है।

court - फोटो : court
घायल का क्योें नहीं लिया बयान
कोर्ट ने कानपुर के बाबू पुरवा में मोहम्मद कासिम को गोली मारे जाने के मामले में पूछा कि क्या घायल का किसी मजिस्ट्रेट द्वारा बयान लिया गया है या नहीं। इस पर सरकारी वकील का कहना था कि वह इस बारे में जानकारी लेकर शीघ्र ही न्यायालय को अवगत कराएंगे जबकि याची पक्ष के वकीलों का कहना था कि अब तक घायल का कोई बयान नहीं लिया गया है। कोर्ट ने पूछा कि अब तक बयान लेने के लिए किसी ने पहल क्यों नहीं की। एसआईटी जांच के बारे में भी जानकारी मांगी कि क्या कोई ऐसी अधिसूचना जारी की गई है।  इस पर सरकारी वकील ने कहा कि एसआईटी जांच के लिए शासन ने अधिसूचना जारी की थी
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सीएए और एनआरसी - फोटो : अमर उजाला
सुनवाई के लिए कोर्ट के पास पर्याप्त आधार
न्यूयार्क टाइम्स और कई अन्य अखबारों में प्रकाशित समाचारों के आधार पर चीफ जस्टिस को याचिका के लिए पत्र लिखने वाले अजय कुमार का विरोध करते हुए अपर महाधिवक्ता ने कहा कि न्यूयार्क टाइम्स और अन्य अखबारों में प्रकाशित समाचारों की जांच में पाया गया है कि यह समाचार सही नहीं है। सरकार की ओर से समर्थन में अन्य समाचारपत्रों की कटिंग भी पेश की गई। कहा गया कि निजी जानकारी के बिना सिर्फ समाचार पत्रों के आधार कोई याचिका नहीं सुनी जानी चाहिए। ऐसा करने से गलत परंपरा शुरू होगी।  

कोर्ट का कहना था कि हमारे पास याचिका पर सुनवाई करने के पर्याप्त आधार हैं। हम इस मामले पर स्वत: संज्ञान लेकर सुनवाई कर रहे हैं। सरकारी वकील की ओर से मृतकों की पोस्टमार्टम रिपोर्ट व एफआईआर की कॉपी इत्यादि भी अदालत में दाखिल की गई। कोर्ट ने याची पक्ष के वकीलों को 16 मार्च तक अपने जवाब और दस्तावेज इत्यादि दाखिल करने का निर्देश दिया हैै। हाईकोर्ट रजिस्ट्री को निर्देश दिया है कि वह इस मामले में किसी भी संवाद, दस्तावेज, पत्र आदि को रिकॉर्ड में शामिल करे। सुनवाई 18 मार्च को होगी।

एएमयू मामले में सुनवाई 24 को
 अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के छात्रों पर पुलिस कार्रवाई के खिलाफ  दाखिल याचिका पर सोमवार को सुनवाई टाल दी गई। कोर्ट ने इस मामले में मानवाधिकार आयोग को जांच कर अपनी रिपोर्ट देने को कहा था। आयोग के अधिवक्ता ने बताया कि अभी जांच चल रही है। जल्दी ही उनको आयोग की ओर से निर्देश प्राप्त हो जाएंगे।  इस पर कोर्ट ने अगली सुनवाई की तारीख 24 फरवरी नियत करते हुए प्रगति से अवगत कराने को कहा है।
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